अब ट्वीट नहीं कर पाएंगे आईएस के चरमपंथी?

  • 11 अप्रैल 2016
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एक सर्वे से पता चला है कि कई इस्लामिक स्टेट समर्थक ट्विटर अकाउंट्स बंद किए जाने के बाद इस चरमपंथी समूह के प्रचार-प्रसार पर असर पड़ा है.

कुछ लोगों की दलील है कि ट्विटर और भी बहुत कुछ कर सकता है.

चरमपंथ के मामले में अमरीकी सरकार को सलाह देने वाली लिसा मोनाको के मुताबिक़ पिछले छह महीने में हो सकता है कि ट्विटर ने इस्लामिक स्टेट के समर्थक 125000 अकाउंट भले बंद किए हों पर अभी भी 90000 ऐसे अकाउंट हैं.

साढ़े 30 करोड़ अनुमानित सक्रिय ट्विटर यूज़र्स का एक छोटा हिस्सा इस्लामिक स्टेट समर्थकों का है पर वे ट्विटर का इस्तेमाल करके दुनिया भर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रहे हैं.

जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जेएम बर्गर ने शोध किया है कि कैसे ये चरमपंथी समूह नए लोगों को 'तैयार' करने में इस नेटवर्क का इस्तेमाल करता है.

इस्लामिक स्टेट के अहम सदस्य मुस्लिम रुझान वाले नेटवर्क में उन लोगों पर नज़र रखते हैं जिनमें समूह में शामिल होने या समर्थक बनने की संभावना रहती है.

शोधकर्ता थॉमस नीसेन का कहना है, "यूज़र अक्सर एक लिंक ट्वीट करके शुरुआत करते हैं और फिर आगे ब्लॉग पर विस्तार से लिखने, वीडियो और दूसरे सोशल मीडिया पर इस्लामिक स्टेट के भर्ती करने वालों से बात करने तक पहुँच जाते हैं."

इस्लामिक स्टेट समर्थक ट्विटर पर बहुत ही असरदार ढंग से मौजूद हैं. वे कई भाषाओं में समय पर सूचनाएं जारी करते हैं और फ़ॉलोअर्स को मल्टीमीडिया माध्यमों से भावनात्मक स्तर पर जोड़े रखते हैं.

इसके लिए वे तस्वीरों, दुआओं और क़त्ल की तस्वीर-वीडियो भी शेयर करते हैं. वे ख़लीफ़ा की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखाते हैं.

इस्लामिक स्टेट अपने 'इलाक़ों' से ग्रुप में मैसेज भेजने के लिए #Raqqa का इस्तेमाल करता है. साथ ही बड़े हमलों जैसे नवंबर के हमले के लिए #ParisOnFire और उसने हाल के हमले में #BrusselsOnFire का इस्तेमाल किया.

जब इस्लामिक स्टेट ने 2014 में इराक़ के मोसुल पर क़ब्ज़ा किया, तो उसने लोकप्रिय हैशटैग्स के बॉट्स और स्पैम्ड इस्तेमाल किए ताकि वे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को दिख पाए.

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एक अरबी भाषा के ऐप से एक दिन में 40000 ट्वीट किए गए. यह इस्लामिक स्टेट के प्रॉपेगैंडा को सर्च इंजन में सबसे ऊपर रखने के लिए काफ़ी था.

बर्गर के अनुमान के मुताबिक़ इस्लामिक स्टेट के समर्थकों की ओर से होने वाले 20 फ़ीसदी ट्वीट बॉट या ऐप से किए गए हैं.

ट्विटर पर ऐसी मौजूदगी यह अहसास कराने में कामयाब होती है कि यह समूह काफ़ी मज़बूत है और उससे समर्थन भी ज़्यादा दिखता है. मगर ट्विटर की कड़ी कार्रवाई के बाद लगता है कि इस पर असर पड़ा है.

बर्गर और उनके सहयोगी हीथर पेरेज़ ने जून से अक्टूबर तक अंग्रेज़ी भाषा के कई ट्विटर अकाउंट पर शोध किया और पाया कि अकाउंट बंद करने की कार्रवाई के कारण इस्लामिक स्टेट के नेटवर्क की पहुँच पर असर पड़ा और जिन यूज़र्स का अकाउंट बार-बार निशाना बना, उनके फ़ॉलोअर्स में बड़ी कमी आई.

हालांकि ट्विटर पर अकाउंट बंद करने के कारण इस्लामिक स्टेट की कुछ गतिविधियों का असर दूसरे सोशल मीडिया नेटवर्क टेलीग्राम पर भी देखने को मिला है पर ट्विटर अभी भी इस्लामिक स्टेट का पहला प्लेटफ़ॉर्म बना हुआ है.

नैटो के लिए इस्लामिक स्टेट का अध्ययन करने वाले जोसेफ़ शाहीन कहते हैं कि अकाउंट बंद करने की दिशा में और क़दम उठाने चाहिए. उसे सक्रिय अकाउंट के बजाय पूरे क्लस्टर्स और कम्यूनिटी को बंद करना चाहिए.

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