2.2 अरब लोगों पर ज़ीका का ख़तरा

  • 21 अप्रैल 2016
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ई-लाइफ़ पत्रिका में छपे एक लेख के मुताबिक दुनिया के दो अरब से ज्यादा लोग उन इलाकों में रहते हैं जहां ज़ीका वायरस फैल सकता है.

एडीज एजिप्टी मच्छरों से फैलने वाले ज़ीका वायरस के कारण इस साल स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति पैदा हो गई.

पिछले हफ्ते अमरीकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने इस बात की पुष्टि की है कि इस वायरस से जन्म के समय बच्चे पर कई तरह के दुष्परिणाम देखे गए.

ताज़ा खोज से पता चला है कि ज़ीका मैपिंग काफी जटिल है.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के खोजकर्ता डॉक्टर ऑलिवर ब्रैडी ने बीबीसी को बताया, "ये पहले ऐसे मैप हैं जो हमारे पास मौजूद डेटा को ज़ीका के लिए इस्तेमाल करते हैं. इससे पहले के मैप ज़ीका को डेंगू और चिकनगुनिया के श्रेणी में रखते थे."

उनके मुताबिक, "ये पहली बार है जब ज़ीका संबंधी सबसे सटीक भौगोलिक और पर्यावरण की स्थिति का डेटा हमारे पास है."

ज़ीका कैसे माहौल में पनपता है, इस जानकारी के आधार पर खोजकर्ता इस बात को बता पाएंगे की आगे कौन से इलाके इससे प्रभावित हो सकते हैं.

खोजकर्ताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि दक्षिण अमरीका का एक बड़ा हिस्सा इस वायरस की चपेट में आ सकता है.

बता दें कि मौजूदा ज़ीका वायरस के प्रकोप का फोकस इसी इलाके में है.

आंकड़ों के मुताबिक 2.2 अरब लोग उन इलाकों में रहते हैं जो ज़ीका के ख़तरे वाले इलाके हैं.

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अंदेशा जताया जा रहा है कि इंफेक्शन से हज़ारों बच्चे कम विकसित दिमाग के साथ पैदा हो रहे हैं.

दक्षिण अमरीका के तटीय इलाकों और अमेज़न नदी से सटे शहरों में ज़ीका का ख़तरा ज्यादा है.

अमरीका के फ्लोरिडा और टेक्सास में गर्मी के दौरान तापमान बढ़ने से संक्रमण को बनाए रखने में मदद मिलेगी.

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डॉक्टर ब्रैडी के अनुसार मच्छर ज़ीका के फैलने का महज़ एक कारण है. कई और कारणों से ये बीमारी फैल रही है.

"गर्मी के कारण ज़ीका मच्छरों के अंदर पनपता है और जहां भी भारी संख्या में लोग रहते हैं वहां ये तेज़ी से फैलता है."

खोजकर्ताओं के मुताबिक अफ्रीका और एशिया के काफी इलाके इस वायरस की चपेट में आ सकते हैं.

यूरोप फिलहाल इस वायरस से अछूता लगता है लेकिन आगे और सबूत मिलने के बाद स्थिति बदल सकती है.

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