नींबू बता सकता है आपका मिजाज़ ऐसा क्यों है?

  • 30 अप्रैल 2016
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क्या आपको पता है कि आप लोगों से खुलकर बात करते हैं, मिलते-जुलते हैं या फिर अंतर्मुखी हैं?

आपसे कोई भी यह सवाल करेगा तो आप सोच में पड़ जाते होंगे. याद करने लगते होंगे कि आप पार्टियों में कितनी दिलचस्पी लेते हैं. लोगों से कितना घुलते-मिलते हैं. अजनबियों से कैसे बातें करते हैं. शायद आप इस सवाल का जवाब कई लोगों को दे भी चुके हों.

दिक़्क़त ये है कि इन सवालों के सही-सही जवाब, ईमानदारी से दिए ही नहीं जा सकते. जैसे आप पार्टियों में जाना तो पसंद करते होंगे, मगर अपने दोस्तों जितना नहीं. तो इससे आप अंतर्मुखी तो साबित हुए नहीं.

आजकल इस सवाल का जवाब एक नींबू की मदद से तलाशा जा रहा है. जी हां. आपने सही समझा. एक नींबू आपको बता सकता है कि आप मिलनसार हैं, बहिर्मुखी या एक्सट्रोवर्ट हैं या फिर अंतर्मुखी.

किसी का किरदार समझने का यह बहुत पुराना तरीक़ा है. इसे आसानी से घर पर आज़माया जा सकता है.

कोई भी कॉटन बड लीजिए जिसके दोनों किनारों पर रुई लगी हो. इसके ठीक बीच में एक धागा बांधिए. अब इसके एक सिरे को अपनी जीभ पर 20 सेकेंड के लिए रखिए. इसके बाद इसे मुंह से बाहर निकालकर अपनी ज़ुबान पर नींबू की पांच बूंदें डालिए. उसे निगलकर, बड का दूसरा सिरा भी 20 सेकेंड के लिए अपनी जीभ पर रखिए.

अब इसे मुँह से बाहर निकालकर धागे से पकड़कर देखिए, कौन सा सिरा ज़्यादा झुका है? नींबू का रस डालने के बाद वाला या फिर उसके पहले वाला.

अगर, नींबू के रस वाला हिस्सा भारी होने की वजह से झुकता है तो यह बताता है कि आप संकोची स्वभाव के हैं. यानी इंट्रोवर्ट.

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और अगर बड बराबर ही है तो इसका मतलब ये कि आपके ऊपर नींबू के रस का कोई असर नहीं हुआ. यानी आप एक्स्ट्रोवर्ट या खुलकर, आगे बढ़कर लोगों से मिलने और बात करने वाले इंसान हैं.

नींबू के रस से स्वभाव परखने का यह नुस्खा आधी सदी से भी पुराना है. ये नुस्खा जर्मन मनोवैज्ञानिक हैंस आइसेंक और उनकी पत्नी साईबिल आइसेंक ने मिलकर ईजाद किया था. असली नुस्खे में तो आइसेंक दंपति कॉटन बड को बाक़ायदा एक मशीन से तौलते थे ताकि एकदम सटीक बात सामने आए.

हमने आपको जो तरीक़ा बताया है, उसका ज़िक्र पर्सनैलिटी एक्सपर्ट ब्रायन लिटिल ने अपनी क़िताब, 'मी, मायसेल्फ़ एंड अस' में किया है.

असल में जर्मन मनोवैज्ञानिक हैंस आइसेंक साठ के दशक में, लोगों की शख़्सियत के बारे में अपनी थ्योरी परखना चाहते थे. वह मानते थे कि किसी के भी किरदार का मनोवैज्ञानिक आधार होता है. अपनी शख़्सियत के मुताबिक़ लोग किसी भी उकसावे पर ख़ास तरह से प्रतिक्रिया देते हैं. शायद वो बहुत शिद्दत से महसूस करते हैं या बिल्कुल नहीं करते.

यह उनकी शख़्सियत की गवाही देता है. आइसैंक दंपति का दावा था कि उनका ये 'लेमन टेस्ट' उनकी थ्योरी का समर्थन करता है क्योंकि जो लोग खुलकर नहीं मिलते यानी इंट्रोवर्ट होते हैं, वो नींबू के रस के प्रति ज़्यादा तेज़ प्रतिक्रिया देते हैं.

वैसे किसी की शख़्सियत कैसी है, यह बहुत कुछ उसके जींस पर निर्भर करता है. ख़ासतौर से उनके मां-बाप की शख़्सियत कैसी है, इसका बहुत असर होता है. ऐसे में ये आइसैंक दंपति की थ्योरी, सिर्फ़ आधा सच बयां करती है.

आज इसके काफ़ी सबूत जमा हो चुके हैं कि इंट्रोवर्ट या अंतर्मुखी लोग, किसी शोर या दूसरे क़िस्म की संवेदना के प्रति ज़्यादा तेज़ी से रिएक्ट करते हैं. मगर, आइसैंक दंपति की थ्योरी के समर्थन में कम ही सबूत मिलते हैं.

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तो यह बात ऐतबार से कहना मुश्किल है कि नींबू के रस के इस तजुर्बे से आपकी शख़्सियत का सही-सही पता चल जाएगा. हालांकि यह आपकी भावुकता के बारे में दिलचस्प बातें ज़ाहिर करता है. ज़्यादा भरोसेमंद जानकारी के लिए आप ये नुस्खा कई बार आज़मा सकते हैं.

नींबू के रस वाले इस नुस्खे से हम यह भी पता लगा सकते हैं कि लोग दूसरों को लेकर कितनी हमदर्दी रखते हैं. वैसे मनोवैज्ञानिक इसका पता लगाने के लिए सवाल-जवाब का सहारा लेते हैं. इसमें दिक़्क़त इसकी होती है कि लोग पूरी ईमानदारी से जवाब नहीं देते.

इस बारे में स्विटज़रलैंड की ज्यूरिख यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक फ्लोरेंस हैगेनम्यूलर ने एक तजुर्बा किया. उन्होंने कुछ लोगों का ये लेमन टेस्ट तीन बार किया. एक बार उनकी ज़ुबान पर नींबू का रस डाला गया.

दूसरी बार उन्हें दूसरे इंसान के नींबू काटकर खाने का वीडियो दिखाया गया और तीसरी बार एक इंसान को रंगीन गेंदें डिब्बे से निकालकर टेबल पर रखते दिखाया गया.

पता चला कि सबसे ज़्यादा लार लोगों के तब निकली जब वो दूसरे इंसान के नींबू काटकर खाने का वीडियो देख रहे थे. मनोवैज्ञानिक इसे 'ऑटोमैटिक रेज़ोनेंस' कहते हैं. मतलब यह कि जब हम दूसरों को कुछ करते देखते हैं तो हमें ख़ुद भी वैसा महसूस होने लगता है. जैसे आपके सामने कोई जम्हाई ले या दर्द से कराहे, तो आपको भी वैसा महसूस होता है.

वैसे घर पर 'लेमन टेस्ट' करना ज़रा मुश्किल है. और सही नतीजे के लिए आपको यह सही-सही पता होना चाहिए कि वीडियो देखते वक़्त आपने ज़्यादा लार टपकाई या दूसरों ने. स्कूल कॉलेज में यह तजुर्बा करना मज़ेदार होगा.

मनोवैज्ञानिक फ्लोरेंस हैगेनमुलर मानती हैं कि नींबू के रस वाले इस नुस्खे की मदद से लोगों में हमदर्दी नापी जा सकती है. ख़ासतौर से उन लोगों में जो मनोवैज्ञानिकों के सवालों की लंबी फ़ेहरिस्त का सामना नहीं कर सकते. जैसे ऑटिज़्म के मरीज़.

इस तजुर्बे की सबसे अच्छी बात यह है कि जिस पर इसे आज़माया जाना है, उसे कुछ भी नाप-तौल नहीं करनी. उन्हें बस बैठकर वीडियो देखना है.

तो, अगली बार आपके पास नींबू हों तो आप उनका ये इस्तेमाल भी कर सकते हैं. आप नींबू-पानी पी सकते हैं. शर्बत बना सकते हैं. सलाद में उनका इस्तेमाल कर सकते हैं और 'लेमन टेस्ट' भी कर सकते हैं.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

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