छात्रों से पैसा कमाने का धंधा है चंगा

  • 1 मई 2016
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रियल एस्टेट में निवेश लंबे वक़्त का निवेश माना जाता है. मगर बहुत लोग इसमें पैसा लगाकर कम वक़्त में मुनाफ़ा कमा रहे हैं.

छात्रों के लिए रिहाइशी सुविधाओं या स्टूडेंट रियल्टी एस्टेट का क्षेत्र कम वक़्त में मुनाफ़ा देने वाला क्षेत्र है. इसमें हाल के दिनों में काफ़ी तेज़ी आई है.

कनाडा के टिम कॉलिंस शहरों में छात्रों को रिहाइश की सुविधाएं देकर काफ़ी पैसे कमा रहे हैं.

कॉलिंस बताते हैं कि वो रियल एस्टेट में पैसा लगाकर लंबा इंतज़ार नहीं करना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने यह तरीक़ा चुना.

आज की बात करें तो कनाडा के टोरंटो में टिम के पास छात्रों को किराए पर देने के लिए दर्जनों मकान हैं. वो इस काम में दूसरों की मदद के लिए एक वेबसाइट भी चलाते हैं. इससे कॉलिंस को अपनी लगाई हुई पूंजी पर 25 फ़ीसद सालाना की दर से मुनाफ़ा मिल रहा है.

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कॉलिंस इस सेक्टर में निवेश करने वाले इकलौते शख़्स नहीं हैं. पहले बड़े और रईस घराने के लोग अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए ऐसे मकान ख़रीदा करते थे. बाद में उसे किराए पर उठाकर पैसे कमाते थे.

मगर आज रियल एस्टेट का ये सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है. आज सिर्फ़ छात्रों के लिए रिहाइशी कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं.

अमरीका में तो छात्रों के लिए रिहाइशी कॉम्प्लेक्स बनाने का कारोबार पिछले बीस सालों से काफ़ी अच्छा चल रहा है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में भी यह कारोबार ज़ोर पकड़ रहा है.

अमरीका में साल 2004 में पहली बार, ''अमरीकी कैम्पस कम्युनिटीज़'' नाम से छात्रों के लिए रियल एस्टेट में पैसे लगाने वाला एक ट्रस्ट बना. इसके बाद आरइआईटी नाम के ट्रस्ट में ख़ुद को शेयर बाज़ार में रजिस्टर किया.

इसके बाद तो स्टूडेंट हाउसिंग के लिए कई कंपनियां बन गईं. कोई कंपनी छोटे शहरों में छात्रों के लिए अपार्टमेंट बना रही थी. तो कोई महानगरों में अमीर छात्रों के लिए शानदार मकान बनाने के काम में लगी थी. ब्रिटेन में भी बाथ, मैनचेस्टर और ग्लासगो शहरों में ऐसी कई रियल एस्टेट कंपनियां बनाई गईं.

आज बहुत से लोग इस क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं. इसकी तरक़्क़ी की रफ़्तार पचास फ़ीसद सालाना बताई जाती है. अमरीका में यह बाज़ार क़रीब छह अरब डॉलर का है. वहीं ब्रिटेन में इस क्षेत्र का कारोबार 6 से 8 अरब पाउंड बताया जाता है.

आज बहुत से फंड मैनेजर स्टूडेंट रियल्टी में निवेश को बेहतर विकल्प मानते हैं. कई निवेश और पेंशन फंड ने इस क्षेत्र में पैसा लगाया हुआ है. इससे इस बाज़ार में ज़बरदस्त तेज़ी आ गई है.

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जानकार इसमें और तेज़ी आने की उम्मीद जता रहे हैं.

छात्रों के लिए रिहाइशी सुविधाओं के क्षेत्र में तेज़ी की कई वजहें हैं. पहली वजह है, छात्रों का यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में आना. तो दूसरी यूनिवर्सिटीज़ के पास पैसों की कमी है. तीसरी वजह पूरी दुनिया में रियल्टी सेक्टर का मंदी की चपेट में आना भी है. स्टूडेंट रियल्टी इस मंदी की मार से अछूती रही है.

अमरीका में यूनिवर्सिटी जाने वाले छात्रों की तादाद तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. 2014 में अमरीका में जहां एक करोड़ 9 लाख छात्रों ने यूनिवर्सिटी में पढा़ई शुरू की, तो वहीं 2024 में उनकी तादाद एक करोड़ तेईस लाख होने की उम्मीद है. ब्रिटेन में भी इस संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है.

लेकिन पैसे की कमी की वजह से तमाम शिक्षण संस्थान सभी छात्रों को रहने की सुविधा नहीं दे पा रहे हैं. ऐसे में छात्रों के रहने की सुविधा की डिमांड तेज़ी से बढ़ रही है. मसलन अमरीका में 25 से तीस फ़ीसद छात्रों को ही यूनिवर्सिटी की तरफ़ से रहने की सुविधा मिल पाती है. बाक़ी छात्रों को ख़ुद से जुगाड़ करना पड़ता है.

साथ ही, आज के युवाओं को हॉस्टल में दूसरों के साथ कमरा शेयर करना पसंद नहीं आता. वे हॉस्टल के मुक़ाबले बाहर मिलने वाली दूसरी सुविधाओं के भी आदी हो जाते हैं.

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जानकार कहते हैं कि स्टूडेंट रियल्टी सेक्टर में आपका निवेश कितना मुनाफ़ा देगा यह अलग-अलग प्रोजेक्ट पर निर्भर करता है. आपको सालाना सात से 18 फ़ीसद तक का फ़ायदा हो सकता है.

कम जोखिम वाले निवेश वो इलाके होते हैं जो तेज़ी से बढ़ रहे कैम्पस के पास होते हैं, सस्ते होते हैं और जहां आसानी से मकान नहीं मिलते. जैसे अमरीका के बर्कले में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया के कैम्पस के पास की इलाका. वहीं अमरीका के फ्लोरिडा स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी से थोड़ी दूरी पर अपार्टमेंट बनाना ज़्यादा फ़ायदेमंद है.

अमरीका के मुक़ाबले यूरोपीय देशों में स्टूडेंट रियल्टी का बाज़ार अभी शुरुआती दौर में ही है. यहां मांग से ज़्यादा आपूर्ति की स्थिति है. ऐसे में निवेश करना जोखिम का सौदा है.

इस सेक्टर में निवेश का सबसे अच्छा तरीक़ा शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध कंपनियों के ज़रिए पैसा लगाना है.

आपके पास ज़्यादा पूंजी है तो आप ख़ुद की कंपनी खोलकर भी इस सेक्टर में निवेश कर सकते हैं. हालांकि इसके लिए आपको अच्छा ख़ासा वक़्त देना पड़ेगा. साथ ही आपको गिने-चुने शहरों में ही निवेश का जोखिम लेना होगा, वरना भारी नुक़सान हो सकता है.

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ज़्यादातर यूनिवर्सिटीज़ के पास, या आने-जाने की सुविधाओं वाले क़रीबी ठिकानों में ऐसे अपार्टमेंट बनाना फ़ायदे का सौदा होता है. फिर भी पैसे लगाने से पहले आप बाज़ार को अच्छे से समझ लें. हर कैम्पस की अलग मांग होती है.

छात्रों के लिए बने मकानों में निवेश में एक और जोखिम है जो रख रखाव से जुड़ा है.

छात्र अक्सर बेतरतीब ज़िंदगी जीते हैं. ऐसे में उनके रहने के लिए बने अपार्टमेंट का रख रखाव बेहद ख़र्चीला होता है. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो आपके अपार्टमेंट को कोई किराए पर लेगा ही नहीं.

निवेश के वक़्त इस बात को ध्यान में ज़रूर रखें. इन इमारतों के बीमे की रकम भी ज़्यादा होती है.

आम रिहाइशी इमारतों से अलग इन अपार्टमेंट का करारनामा भी अलग और थोड़ा सख़्त होता है.

अपने किराएदार छात्रों से भी बेहतर ताल्लुक़ात रखना ज़रूरी है. वो किराए पर रहने वाले आम परिवारों से अलग होते हैं. उन्हें मकान मालिक का दखल पसंद नहीं होता.

यही नहीं, आपको छात्रों के मां-बाप से भी लगातार संपर्क में रहना होगा. आख़िर वो ही अपने बच्चों के गारंटर होंगे. उनके बच्चे आपकी प्रॉपर्टी में अच्छे से रहें, इसके लिए उनसे बेहतर संबंध बनाए रखना ज़रूरी है.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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