जब किसी को नौकरी से निकालना हो..

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किसी जगह का कोई कर्मचारी अगर चोरी करते पकड़ा जाए या कुछ और ग़लत काम करते नज़र में आ जाए तो उसे नौकरी से निकालना ही बेहतर होता है. मगर कई बार ऐसा होता है कि कर्मचारी ग़लतियां करते हैं, लेकिन इतनी बड़ी नहीं. ऐसी स्थिति में क्या करें?

जैसे कि कोई कर्मचारी पूरी तरह ईमानदार न हो. या किसी के पास कंपनी की ज़रूरत के मुताबिक़ काम करने की क़ाबिलियत ही न हो. जो कंपनी में सही फ़िट न बैठ रहा हो. या अगर कंपनी को ख़र्च में कटौती की वजह से किसी को निकालना हो तो?

ऐसे हालात में किसी को कैसे बताया जाए कि उसे नौकरी से निकाला जा रहा है? इसका सही तरीक़ा और वक़्त क्या हो सकता है? क्या कोई तरीक़ा है जिससे नौकरी गंवाने की तकलीफ को कम किया जा सके?

शिकागो की एलिशिया बासुक कहती हैं कि किसी को नौकरी से निकालना आसान फ़ैसला नहीं होता. इसका असर सिर्फ़ एक इंसान पर नहीं पड़ता बल्कि उसके परिवार, रिश्तेदारों और पूरे समाज पर पड़ता है. मगर कई बार ऐसा करना ज़रूरी हो जाता है.

हमेशा सभी विकल्प आज़माएं:

तो, अगर एक मैनेजर की हैसियत से आपको किसी को नौकरी से निकालना ही पड़े तो पहले आप ये सुनिश्चित कर लें कि आपने बाक़ी सभी विकल्प आज़मा लिए हैं. जैसे कि अगर वो काम में कमज़ोर है तो उसका काम बेहतर करने की आपने भरपूर कोशिश कर ली है. साथ ही आप एच आर विभाग से बात करके किसी को नौकरी से निकालने की सही प्रक्रिया भी समझ लें.

एलिशिया कहती है कि अगर आपकी नज़र में कोई नालायक़ भी है तो उसे पर्याप्त मौक़े दें. आख़िरी मौक़े के बाद भी कोशिश करें कि एक मौक़ा और दे दें. बाक़ी दूसरे ज़रियों से उस तक संदेश पहुंचाने की भी कोशिश करें कि उसकी नौकरी ख़तरे में है.

अगर ये नुस्खे भी नाकाम हो जाएं और आपको लगे कि नौकरी से निकालने का आख़िरी विकल्प ही आपके पास बचा है, तभी आप इस पर अमल करें ताकि आपको अफ़सोस न हो. आप इसकी वजह से अपनी नींद न गंवा बैठें.

क्या करें और कैसे करें:

बहुत से अधिकारियों के लिए किसी को नौकरी से निकालने का फ़ैसला बहुत तकलीफ़देह होता है. उन्हें इसकी आदत भी नहीं होती. मगर याद रहे कि आप क्या करते हैं और कैसे करते हैं, इसमें बड़ा फ़र्क़ होता है.

स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर रॉबर्ट सटन ने एक क़िताब लिखी है, ''गुड बॉस, बैड बॉस''. वो कहते हैं कि लोगों को ये समझाना अहम है कि ये फ़ैसला कितना ज़रूरी है, जायज़ है. आप किसी सनक में किसी को नौकरी से नहीं निकालने जा रहे हैं.

नौकरी निकालने का सबसे बुरा असर ये होता है कि लोग अपनी नौकरी पर से अपना नियंत्रण गंवा बैठते हैं. अब आप उन्हें नौकरी पर काबू पाने का मौक़ा तो नहीं दे सकते. लेकिन नौकरी से निकालते वक़्त उन्हें पूरी प्रक्रिया में साझीदार ज़रूर बना सकते हैं.

हर बात का सबूत रखें:

अगर किसी कर्मचारी को उसके बर्ताव की वजह से निकाला जा रहा है तो भी आप उससे इस बारे में बात करें तो उस पर इल्ज़ाम लगाने से बचें. आप इस मीटिंग में हर वो बात कहना चाहेंगे, जिसे कहने से आप बचते रहे हैं. मगर अच्छा होगा कि इस बार भी आप ऐसा करने से बचें. अगर आप कर्मचारी पर आरोप लगाएंगे तो यूं लगेगा कि आप अपने फ़ैसले को सही साबित करने में लगे हैं. इसकी ज़रूरत नहीं.

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जब आप किसी को नौकरी से निकालने के फ़ैसले पर पहुंचते हैं तब तक आपके पास उसके ख़िलाफ़ पर्याप्त वजह और सबूत जमा हो चुके होते हैं. किसी गड़बड़ से बचने के लिए आपको हर बात का लिखित सबूत रखना चाहिए.

वो कहते हैं कि आपको कर्मचारी की कमियों के बारे में ई-मेल भेजकर दस्तावेज़ी सबूत रखने चाहिए. अगर वो बार-बार देर से आता है तो आप उसे चेतावनी देने वाला मेल भी भेज सकते हैं. ये आगे चलकर आपके ही काम आएगा.

दो बार देर होने पर आप उस कर्मचारी को ये लिख सकते हैं कि आगे से वक़्त पर आए वरना आप कार्रवाई को मजबूर होंगे. साथ में उस कर्मचारी की थोड़ी तारीफ़ भी कर दें ताकि मामला इकतरफ़ा न लगे. आगे चलकर कभी ज़रूरत पड़ी तो कम से कम कर्मचारी ये नहीं कह सकेगा कि उसे उसकी ग़लतियों के बारे में वक़्त पर चेताया नहीं गया.

मीटिंग छोटी ही रखें:

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जब आप कर्मचारी को नौकरी से निकालने का फ़ैसला बताने के लिए बुलाएं तो इस मुलाक़ात को छोटा ही रखें. इस काम में किन नियमों का पालन करना है, इसकी जानकारी आप एच आर विभाग से ले सकते हैं. कम से कम शब्दों में कर्मचारी को ये बुरी ख़बर बताएं. जानकार कहते हैं कि इसके लिए ज़्यादा भूमिका बांधना, उस कर्मचारी के लिए तकलीफ़देह होगा.

आप कर्मचारी से मिलें और सीधे ये कहें, 'मुझे अफ़सोस है मगर मुझे तुम्हें नौकरी से निकालना होगा'. इसके बाद कर्मचारी को इस बुरी ख़बर का झटका झेलने के लिए थोड़ा वक़्त दें. फिर उसे कम से कम शब्दों में इसकी वजह बताएं.

कभी अकेले मीटिंग न करें:

इन मामलों के तज़ुर्बेकार योर्ग स्टेगमन कहते हैं कि नौकरी से निकालने की जानकारी देने वाली मीटिंग कभी अकेले नहीं करनी चाहिए क्योंकि उन्होंने ख़ुद बहुत से कर्मचारियों को अलग अलग तरह से रिएक्ट करते देखा है. कोई रोने लगा था तो किसी ने गालियां देनी शुरू कर दी थीं. ऐसे में बेहतर होगा कि किसी एचआर मैनेजर को भी साथ बिठा लें.

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नौकरी जाने की बात सुनकर अक्सर लोग भावुक हो जाते हैं. ऐसी हालत में उन्हें संभालने के लिए आपके साथ कोई होगा तो आपकी मदद ही होगी क्योंकि आपको ये तो बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं होगा कि फलां कर्मचारी, ये ख़बर सुनकर कैसी प्रतिक्रिया देगा.

इन बातों का ख़्याल रखकर आप अपने मातहतों को नौकरी से निकालने की तकलीफ़ कम कर सकते हैं.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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