दुनिया के 7.5 करोड़ बच्चों को चाहिए शिक्षा

  • 4 मई 2016
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बच्चों के लिए काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूनिसेफ़ के मुताबिक़ दुनियाभर के 7.5 करोड़ बच्चों को पढ़ाई के लिए मदद की सख़्त ज़रूरत है.

यूनिसेफ़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक 3 से 18 साल की उम्र वाले 46.2 करोड़ बच्चों में से हर चार में से एक बच्चा ऐसे देश में रहता है, जहां मानवाधिकारों का संकट है.

सीरिया में पांच साल से चल रहे गृहयुद्ध के कारण 6 हज़ार स्कूल बंद हो गए हैं. वहीं पूर्वी यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के कारण हर पांच में से एक स्कूल क्षतिग्रस्त हो गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ शरणार्थियों में स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या पांच गुना अधिक है.

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रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि संघर्ष के दौरान लड़कों के मुक़ाबले लड़कियों में स्कूल न जा पाने की संख्या 2.5 फ़ीसदी अधिक हो जाती है.

तुर्की के इस्तांबुल में 23 और 24 मई को होने वाले वर्ल्ड ह्यूमैनिटेरियन समिट से ठीक पहले यह रिपोर्ट आई है.

इस सम्मेलन में शिक्षा के लिए एक नया आपातकालीन फंड, एजुकेशन कैन नॉट वेट (पढ़ाई इंतजार नहीं कर सकती) की शुरुआत होनी है.

यूनिसेफ़ ने उम्मीद जताई है कि अगले 5 सालों में इस फंड में क़रीब 400 करोड़ डॉलर की रकम जमा होगी. इससे 1.36 करोड़ बच्चों को आपातकाल की स्थिति में भी शिक्षा मिल पाएगी.

संस्था के मुताबिक़ ग़रीब समुदाय के वो बच्चे जिनका स्कूल एक साल से ज्यादा समय तक छूट जाता है, वो दोबारा लौटकर स्कूल नहीं आते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया, "संकट के समय बच्चों के शिक्षा से दूर हो जाने का ख़तरा रहता है, हालांकि ऐसे उथल-पुथल के समय बच्चों के लिए स्कूल सुरक्षित जगह होती है और स्कूल उनको महत्वपूर्ण दिनचर्या देते हैं."

"शिक्षा बच्चों को उनकी निजी ज़िंदगी का पुनर्निर्माण करने और इसके साथ-साथ अपने देश का निर्माण करने के लिए प्रेरित करती है."

इस साल की शुरुआत में बच्चों की अभियान चलाने वाली मलाला यूसुफज़ई ने कहा था कि संघर्ष के कारण बेघर हुए लाख़ों सीरियाई शरणार्थी बच्चों को शिक्षा के लिए और अधिक मदद की दरकार है.

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यूसुफज़ई ने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसे बच्चों को मदद नहीं मिली तो पूरी पीढ़ी के खोने का ख़तरा है.

पाकिस्तान में लड़कियों के लिए शिक्षा अभियान चलाने के कारण तालिबान ने 2012 में मलाला यूसुफज़ई के सिर में गोली मारी थी. ब्रिटेन में हुए इलाज के बाद उनकी जान बची थी.

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