कीनिया में 'गे एनल टेस्ट' को कोर्ट में चुनौती

  • 5 मई 2016
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कीनिया में दो लोगों ने कथित तौर पर पुलिस की ओर से जबरन गे एनल टेस्ट (जबरन गुदा परीक्षण) को अदालत में चुनौती देते हुए इसे असंवैधानिक करार दिए जाने की मांग की है.

इनका आरोप है कि पुलिस ने उनके समलैंगिक संबंधों को साबित करने के लिए उनका एनल टेस्ट करवाया.

उन्होंने आरोप लगाया कि फ़रवरी 2015 में उनकी गिरफ्तारी के बाद समलैंगिक गतिविधियों के संदेह में उनके एचआईवी और हेपिटाइटिस के परीक्षण किए गए थे.

कीनिया में समलैंगिकता अवैध है और इसमें 14 साल तक की जेल के प्रावधान है.

मोम्बासा हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकारी वकीलों को जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है.

इस तरह के परीक्षणों पर वैश्विक स्तर पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाले मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत, जबरन गुदा परीक्षण क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार है जो यातना की हद तक जा सकता है."

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एचआरडब्ल्यू शोधकर्ता नीला घोषाल ने कहा, "गुदा परीक्षणों से कुछ भी साबित नहीं होता है और इससे कुछ हासिल नहीं होता, केवल इससे उन लोगों को अपमान और नीचा दिखाना है जिन्हें नैतिक तौर पर बहिष्कृत माना जाता है."

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने भी गुदा परीक्षण से समलैंगिक निर्धारण करने को "चिकित्सीय तौर पर बेकार" करार दिया है.

बीते साल, कीनिया के उप राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा था कि समलैंगिकों के लिए देश में कोई जगह नहीं है.

कीनिया में अधिकतर धार्मिक समूह और अन्य अफ्रीकी देश समलैंगिकता का पुरज़ोर विरोध करते हैं और इसे गैर-अफ्रीकी मानते हैं.

बीते कुछ वर्षों में कई लोगों को कीनिया की दंड संहिता के तहत अभियुक्त बनाया जा चुका है.

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