पनामा पेपर्सः स्रोत ने कहा सज़ा माफ़ी मिले

  • 6 मई 2016
पनामा पेपर्स

पनामा पेपर्स लीक करने वाले अज्ञात स्रोत ने पहली बार कुछ कहा है और सज़ा माफ़ी की शर्त पर कानून लागू करने वाली संस्थाओं की मदद की पेशकश की है.

एक 1,800 शब्द के बयान में 'जॉन डो' ने कहा है कि उन्होंने कभी किसी जासूसी संस्था या सरकार के लिए काम नहीं किया.

उनके बयान की शुरुआत वह लीक की वजह 'आय की असमानता' को बताते हुए करते हैं.

पनामा पेपर्स से पता चला है कि कुछ रईस लोग टैक्स और प्रतिबंध से बचने के लिए विदेशों में बनी कंपनियों का इस्तेमाल करते हैं.

ये दस्तावेज़ मोज़ैक़ फ़ोनसेंका लॉ फ़र्म के हैं. जिसका कहना है कि उसने कोई ग़लत काम नहीं किया है और वह सिर्फ़ हैकिंग का शिकार हुई है.

इन दस्तावेज़ों की सैकड़ों खोजी पत्रकारों ने जांच की जिनमें बीबीसी के पत्रकार भी शामिल थे. इन दस्तावेज़ों को इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ़ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के साथ मिलकर गुप्त रूप से महीनों तक परखा गया.

हालांकि बयान में जॉन डो नाम का इस्तेमाल किया गया है लेकिन स्रोत के लिंग का ख़ुलासा नहीं किया गया है.

दि रिवोल्यूशन विल भी डिजिटाइज़्ड, नाम से जारी बयान में जॉन डो इस वाक्य के साथ अपनी बात शुरू करते हैं, "आय में असमानता आज के समय का सबसे बड़ा मुद्दा है."

वह आगे कहते हैं, "अगर कानून नियामक संस्थाएं असली दस्तावेज़ों को हासिल करें और उनका मूल्यांकन करें तो पनामा पेपर्स के ज़रिए हज़ारों को सज़ा दी जा सकती है."

"आईसीआईजे और इसके साथी प्रकाशनों ने ठीक कहा है कि वह उन दस्तावेज़ों को कानून नियामक संस्थाओं को नहीं सौपेंगे."

Image caption अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्या राय का नाम भी पनामा पेपर्स लीक में आया है. इन्होंने किसी भी तरह के ग़लत काम किए जाने का खंडन किया है.

"हालांकि मैं कानून नियामक संस्थाओं को उस स्तर तक सहयोग करने को तैयार हूं जहां तक मैं कर सकता हूं."

लेकिन वह आगे कहते हैं, "ग़लत बात को उजागर करने वाले असली व्हिसलब्लोअर्स, चाहे को अंदर के हों या बाहर के, सरकारी सज़ा से से माफ़ी के हक़दार होते हैं."

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