सादिक़ ख़ान: बस चालक के बेटे का लंबा सफर

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लेबर पार्टी के सादिक़ ख़ान को लंदन का नया मेयर चुना गया है.

लेकिन कौन है वो आदमी जो अगले चार साल तक ब्रिटेन की राजधानी का प्रबंधन संभालेगा?

पेशे से मानवाधिकारों के वकील सादिक़ ख़ान का अब तक का जीवन मुश्किलों पर जीत की मिसाल रहा है.

लंदन का मेयर बनकर भी उन्होंने ऐसी ही मिसाल पेश की है.

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पिछले साल जब लेबर पार्टी के राजनेता लंदन के मेयर पद के लिए उम्मीदवारी पेश कर रहे थे तब सादिक़ ख़ान शायद ही किसी की पहली पसंद थे.

सट्टेबाज़ों का दांव टोनी ब्लेयर युग के अनुभवी नेता और ओलंपिक खेलों को लंदन लाने में अहम भूमिका निभाने वाले बेरोनेस जोवेल पर लगा था.

लेकिन 45 वर्षीय सादिक़ ख़ान के करियर में एक चीज़ लगातार रही है, वो है पीछे रहते हुए सबसे आगे आ जाने की कला.

लंदन के नए मेयर सादिक़ ख़ान का शुरुआती जीवन बहुत आसान नहीं रहा है.

सादिक़ ख़ान को न ही राजनीति विरासत में मिली है और न ही दौलत.

पाकिस्तानी मूल के सादिक किसी अमीर घराने से ताल्लुक नहीं रखते, और वे एक कर्मठ व्यक्ति के बेटे हैं.

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उनके पिता लंदन में बस ड्राइवर थे और मां सिलाई करके घर का ख़र्च चलाने में मदद करती थीं.

वे दक्षिणी लंदन में रहने वाले एक पाकिस्तानी अप्रवासी परिवार की आठ संतानों में से एक हैं.

सादिक़ ख़ान ने एक साधारण सरकारी स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और फिर वकालत की डिग्री हासिल की.

वे मानवाधिकारों के वकील बने और लंदन मेट्रोपोलिटन के ख़िलाफ़ नस्ली भेदभाव के मामलों की पैरवी करते रहे.

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नेशन ऑफ़ इस्लाम नाम के संगठन से लुई फ़राह ख़ान पर पाबंदी हटाने में भी उन्होंने अहम किरदार अदा किया था.

अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ने उन्होंने साल 2005 में लेबर पार्टी के टिकट पर दक्षिणी लंदन की टूटिंग सीट से चुनाव लड़कर की थी.

चुनाव में कामयाबी हासिल कर वे ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में तत्कालीन नेता सदन जैक स्ट्रॉ के निजी संसदीय सचिव नियुक्त हो गए.

शुरुआती सालों से ही सादिक़ ख़ान ने मुश्किलों के हराकर आगे बढ़ने का संकल्प दिखाया था.

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वे अपनी कामयाबी और अपने लिए ज़रूरी मुद्दों को लेकर हमेशा दृढ़ संकल्प रहे.

इसी संकल्प ने उन्हें ब्रिटेन के सबसे महत्वपूर्ण पद तक पहुँचाया है.

उन्हें न सिर्फ़ लंदन के मेयर के रूप में बेशुमार शक्तियां हासिल होंगी बल्कि ये काम उनके लिए भावनात्मक अहमियत भी रखता है.

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