मिस्र: 51 लोगों को 2 साल की सज़ा

  • 15 मई 2016
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मिस्र की एक अदालत ने पिछले महीने राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल-सीसी के दो द्वीपों को सऊदी अरब को देने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने के लिए 51 लोगों दो साल की क़ैद की सज़ा सुनाई है.

काहिरा में 25 अप्रैल को हुए इन प्रदर्शनों में दंगो रोधी पुलिस बल को तैनात किया गया था ताकि विपक्षी दलों के आह्वान पर आयोजित किए जा रहे भारी प्रदर्शन को रोका जा सके.

अदालत के फ़ैसले को सुनने के लिए बचाव पक्ष के 33 लोग वहां उपस्थित थे, जबकि अन्य आरोपी जमानत पर रिहा हो चुके थे.

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मामला लाल सागर के दो द्वीपों को सऊदी अरब को देने के फ़ैसले से जुड़ा है, जिससे मिस्र के कई नागरिक नाराज़ हैं.

यह फ़ैसला राष्ट्रपति अल-सीसी के सऊदी अरब दौरे के दौरान लिया गया था जब वे शाह सुलेमान से मिलने गए थे. इस मुलाक़ात के बाद शाह सुलेमान ने मिस्र के लिए सहायता राशि और निवेश बढ़ाने की घोषणा की थी.

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Image caption मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल-सीसी और शाह सुलेमान की मुलाकात

आलोचकों का कहना है कि राष्ट्पति ने दो निर्जन द्वीप टिरान और सानाफ़िर को निवेश के बदले सऊदी अरब को सौंपा है.

लेकिन मिस्र की सरकार का कहना है कि ये दो द्वीप हमेशा से सऊदी अरब के ही थे लेकिन साल 1950 से इनकी देखभाल मिस्र कर रहा था.

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Image caption मिस्र के सिनाई इलाके और सऊदी अरब के बीच सागर में टिरान (सामने) और सानाफ़िर (पीछे की ओर) द्वीप

फ़ैसले के विरोध में धर्मनिरपेक्ष और इस्लामी कार्यकर्ताओं ने लोगों से इसके विरोध में प्रदर्शनों के लिए आह्वान दिया.

प्रदर्शनों के दौरान दर्जनों लोगों की गिरफ्तारी हुई और उनमें से कईयों पर ग़ैर-क़ानूनी रेलियों में हिस्सा लेने का आरोप लगाया गया.

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