धड़ल्ले से बन और बिक रही नकली वायग्रा से सावधान !

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पिछले साल ब्रिटेन में बिना लाइसेंस के बिकने वाली कामोत्तेजक दवाइयां बड़ी मात्रा में जब्त की गईं.

दवाइयों के इस ज़खीरे की कीमत एक करोड़ दस लाख पाउंड थी.

बिना लाइसेंस वाले वायग्रा का बाज़ार बहुत बड़ा है और इसकी सबसे ज़्यादा ख़रीद इंटरनेट होती है.

इंटरनेट पर यह दो से तीन पाउंड में आसानी से उपलब्ध है.

वायग्रा का जेनरिक भारतीय संस्करण कामाग्रा बड़े पैमाने पर ब्रिटेन भेजा जाता है और वो भी आसानी से इंटरनेट पर उपलब्ध है.

दवाइयों की नियामक एजेंसी का कहना है कि इंटरनेट पर खरीददारी करने वाले ग्राहकों को यह नहीं पता है कि नकली वायग्रा की गोलियों में सीसा और आर्सेनिक जैसे जहरीले रसायन भी हो सकते हैं.

मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (एमएचआरए) ने पिछले हफ्ते पूरे लंदन में 50 अधिकारियों ने 24 जगहों पर सर्च वारंट के साथ एक ऑपरेशन चलाया.

एक गली में छापा मारने के दौरान एमएचआरए के डैनी ली-फ्रॉस्ट ने कहा, "जब आप वेबसाइट पर जाते हैं तो सफेद कोट और स्टेथोस्कोप के साथ एक वैज्ञानिक की तस्वीर दिखती है. लेकिन आपकी दवाई फ़ार्मेसी से नहीं बल्कि ऐसी किसी गली में तैयार होती है."

उन्होंने कहा- "हमें यहां जो दवाइयां मिली हैं वो पीछे के बगीचे के एक अहाते से बेची जाती थीं जो कि नमी युक्त जगह है और जहां चूहे इधर-उधर दौड़ते रहते हैं."

वायग्रा डॉक्टर की सलाह पर, प्रेसक्रिप्शन के साथ ही मिलने वाली दवा है इसलिए यह किसी डॉक्टर और फ़ार्मासिस्ट के पास से ही लेनी चाहिए.

लेकिन डॉक्टर मानते हैं कि कई ऐसे लोग हैं जो ये दवाई इंटरनेट से खरीदते हैं और इस्तेमाल करते हैं.

एक सरकारी डॉक्टर हामिद खान ने बताया, "मैंने कई ऐसे मरीज़ देखे हैं जिन्हें इन दवाइयों से गंभीर साइड इफेक्ट हुए हैं. देखने की समस्या, बेहोशी, रक्तचाप में खतरनाक रूप से कमी या दिल की बीमारी होने की संभावना जैसे इसके कई साइड इफेक्ट देखने को मिले हैं."

वायग्रा बनाने वाली कंपनी फाइज़र ने 111 देशों में नकली वायग्रा को जांचने के लिए टेस्टिंग लैब खोल रखे हैं.

वे पैक पर नीले रंग की छपाई को देखकर नकली वायग्रा की पहचान कर सकते हैं. नकली और असली वायग्रा के पैक पर की गई नीले रंग की छपाई अमूमन अलग-अलग शेड वाली होती है.

ऐसे सुराग मिलने पर सैंपल की रासायनिक जांच होती है.

फाइज़र के उपाध्यक्ष टॉमी डोलान का कहना है कि अगर लोगों के पास नकली और असली दवा का पता लगाने की जानकारी नहीं है तो हो सकता है कि वे अनजाने में नकली उत्पाद खरीद रहे हों.

ली-फ्रॉस्ट का कहना है कि नौजवान इस दवाई के बड़े ग्राहक हैं. वो कहते हैं, "इसका इस्तेमाल ऐसे वयस्क लोग कर रहे हैं जिन्हें इसकी मेडिकल जरूरत नहीं है. इसका इस्तेमाल वे सप्ताहांत पर सेक्स ड्राइव बढ़ाने के लिए करते हैं. "

दर्जनों छापे और गिरफ्तारियों के बाद ब्रितानी एजेंसी को दवाई के कुछ बैग मिले हैं.

उनका मानना है कि यदि लोगों को नकली दवा खरीदने से रोका जाए तो यही इस कारोबार को बंद करने कारगर तरीका है.

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