मोदी ने ग़ालिब का शेर पढ़ा, रुहानी मुस्कुराए

  • 23 मई 2016
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी. इमेज कॉपीरइट VIKAS SWARUP

ईरान की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत और ईरान नए दोस्त नहीं है.

उन्होंने कहा कि दोनों देशों की दोस्ती उतनी ही पुरानी है जितना इतिहास. उन्होंने कहा कि एक दोस्त और पड़ोसी के रूप में दोनों देशों ने एक दूसरे से विकास और ख़ुशहाली को साझा किया है.

मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वो इस बात को नहीं भूल सकते हैं कि गुजरात में 2001 में भूकंप के बाद ईरान पहला देश था, जो मदद के लिए आगे आया था.

इमेज कॉपीरइट VIKAS SWARUP Twitter

इस मौक़े पर भारत और ईरान ने आपसी सहयोग के 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं.

इनमें सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, चाबहार बंदरगाह के विकास और संचालन और चाबहार-ज़ाहेडान के बीच रेलवे लाइन बिछाने संबंधी समझौते प्रमुख हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि चाबहार बंदरगाह और उससे जुड़ी बुनियादी संरचना के विकास के लिए जो समझौता हुआ है, वह मील का पत्थर है.

उन्होंने कहा कि आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी और साइबर अपराध के ख़तरे से निपटने के लिए दोनों देश नियमित विचार-विमर्श पर सहमत हुए हैं.

इमेज कॉपीरइट VIKAS SWARUP Twitter

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन का अंत मिर्ज़ा ग़ालिब के एक शेर से किया

नूनत गरबे नफ्से-ख़ुद तमाम अस्त.ज़े-काशी पा-बे काशान नीम गाम अस्त.

यानी अगर हम अपना मन बना लें तो काशी और काशान के बीच की दूरी केवल आधा कदम होगी.

वहीं जब मोदी शेर पढ़ रहे थे तो ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी मुस्करा रहे थे.

उन्होंने कहा कि चाबहार बदंरगाह भारत-ईरान के बीच सहयोग का बहुत बड़ा प्रतीक बन सकता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार