सीरिया में धमाके, डेढ़ सौ की मौत

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सीरिया की सरकार ने आरोप लगाया है कि लताकिया प्रांत के तारतौस और जबलेह शहरों में हुए सिलसिलेवार बम हमलों के पीछे तुर्की, क़तर और सऊदी अरब का हाथ है.

सरकार के मुताबिक ये हमले शांति स्थापित करने की कोशिशों को रोकने के इरादे से कराए गए हैं.

इन हमलों की ज़िम्मेदारी खुद को इस्लामिक स्टेट कहनेवाले संगठन ने ली है.

राष्ट्रपति असद के प्रभाववाले इलाकों में किए गए इन हमलों में दर्जनों लोग मारे गए हैं.

तुर्की, क़तर और सऊदी अरब कई सीरियाई विद्रोही गुटों का समर्थन करते हैं लेकिन इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ बने अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा हैं.

विपक्षी कार्यकर्ताओं का कहना है कि तारतौस और जबलेह शहर के बस अड्डों पर एक साथ हुए धमाकों में क़रीब डेढ़ सौ लोगों की मौत हो गई है.

ये दोनों शहर अब तक सीरिया में जारी गृहयुद्ध से एक तरह से बचे हुए थे. इन दोनों तटीय शहरों को राष्ट्रपति बशर अल असद का गढ़ माना जाता है.

जबलेह शहर में एक अस्पताल को भी निशाना बनाए जाने की ख़बर है.

सीरियाई गृयुद्ध में राष्ट्रपति बशर अल असद का सहयोग कर रहे रूस ने तारतौस शहर में नौसैनिक बेस बनाया है, जबकि जबलेह में उसका वायुसैनिक बेस है.

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