कौन है तालिबान के नए प्रमुख

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अफ़ग़ानिस्तान तालिबान ने एक बयान में अपने अमीर मुल्ला मुख़्तर मंसूर की एक अमरीकी ड्रोन हमले में मौत की पुष्टि करते हुए उनके सहयोगी मौलवी हिब्तुल्लाह अख़ुंज़ादा को अपना नया प्रमुख बनाए जाने की घोषणा कर दी.

बुधवार को तालिबान की कुछ समितियों की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि मंसूर की मौत कंधार के रेगिस्तान और पाकिस्तान के सूबे बलूचिस्तान के नौशकी के सीमाई इलाके में हुई.

मौलवी हिब्तुल्लाह, मुल्ला अख़्तर मंसूर के डिप्टी थे और शूरा ने हक्कानी नेतवर्क के सिराजुल हक़ पर उन्हें तरज़ीह दी है.

कहा जाता है कि हिब्तुल्लाह तालिबान तहरीक के शुरू होने के बहुत बाद उसका हिस्सा बने थे.

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अफ़ग़ानिस्तान मामलों के जानकार रहीमुल्लाह युसूफ़ज़ई ने बताया है कि वो अफ़ग़ान तालिबान की 1994 में कंधार से शुरू होने वाली तहरीक के 13 सदस्यों वाली समिति का हिस्सा नहीं थे.

रहीमुल्लाह के अनुसार, हिब्तुल्लाह असल में एक मज़हबी रहनुमा हैं जिनका जंगी अनुभव कम है. लेकिन इस वक्त तालिबान कई धड़ों में बंटा है इसलिए एक धार्मिक नेता को प्रमुख बनाया गया है ताकि ज़्यादा लोगों को एतराज़ न हो.

मुल्ला हिब्तुल्लाह तालिबान की जंगी कार्रवाईयों के हक़ में फतवे जारी करते रहे हैं. वे 2001 से पहले अफ़ग़ानिस्तान में कायम तालिबान की हुकूमत में अदालतों के प्रमुख भी रहे हैं.

खबरों के मुताबिक़, उन्होंने अपने जीवन का अधिक हिस्सा अफ़ग़ानिस्तान में ही गुजारा है और उनके विदेशों के सफर के बारे में बहुत कम जानकारी है.

वो कंधार में एक मदरसा चलाते थे जिसकी वजह से बहुत से तालिबान उन्हें अपना उस्ताद मानते हैं. उनकी उम्र 45 से 50 साल के बीच है और वो कंधार के पंज़वाई इलाके में पैदा हुए थे और उनका संबंध नूरज़ई कबीले से है.

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तालिबान के मुताबिक़, शूरा ने सिराजुद्दीन हक्कानी और मुल्ला उमर के बेटे मौलवी याक़ूब को नए नेता के डिप्टी की ज़िम्मेदारी सौंपी है.

रहीमुल्लाह युसूफज़ई का कहना है कि तालिबान मुल्ला याक़ूब को भविष्य के नेता के तौर पर तैयार करना चाहता है.

उन्होंने कहा कि मुल्ला याक़ूब तमाम धड़ों को स्वीकार्य हैं और कहा जा रहा था कि उन्हें 'अमीर' बना दिया जाए तो तालिबान के अलग अलग गुट एक बार फिर एक साथ आ जाएंगे.

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लेकिन उनके कम अनुभव और कम उम्र होने के कारण ऐसा नहीं हो सका.

युसूफ़ज़ई के मुताबिक़, मुल्ला उमर ने अपनी ज़िंदगी में अपने किसी भाई या बेटे को कोई ओहदा नहीं दिया था लेकिन अब तालिबान जिस स्थिति का शिकार है उसमें यही कहा जा रहा है कि मुल्ला याक़ूब ही सभी धड़ों को साथ लेकर चल सकते हैं इसलिए उन्हें तैयार किया जा रहा है.

बीते शनिवार की रात अफ़ग़ान तालिबान के प्रमुख मुल्ला अख़्तर मंसूर की ख़बर सामने आई थी.

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