श्रम क़ानूनों के खिलाफ़ फ्रांस बंद

  • 26 मई 2016
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फ्रांस में नए श्रम क़ानूनों के ख़िलाफ़ मजदूरों के देशव्यापी हड़ताल से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है.

ऑइल रिफ़ाइनरियों, परमाणु बिजली घरों, बदंरगाहों और परिवहन केंद्रों के कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने से स्थिति और ख़राब हो गई है.

एएफ़पी रिपोर्ट के अनुसार, पेरिस में गुरुवार को सबसे बड़ी रैली निकली जिसमें हिंसा भड़कने के कारण प्रदर्शनकारियों से पुलिस की झड़प भी हुई.

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प्रदर्शन के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

फ्रांसीसी सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है क्योंकि दो सप्ताह में ही देश में यूरो 2016 चैंपियनशिप का आयोजन होने जा रहा है.

पोर्ट सिटी ले हावरे, नार्मेंडी से लेकर न्यूक्लियर सबमैरीन बेस वाले पूरब में भी हड़ताली कर्मचारी सड़कों पर उतरे.

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क्षेत्रीय और डेली पैसेंजर ट्रेनों के ड्राइवरों के हड़ताल में शामिल हो जाने से जनजीवन ठप सा हो गया है.

फ्रेंच यूनियन ऑफ़ पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज़ के मुताबिक़, फ्रांस के 12,000 पेट्रोल पम्पों में से एक तिहाई के पास तेल ख़त्म हो चुका है.

बुधवार को परमाणु बिजली घर के कर्मचारियों ने भी हड़ताल में शामिल होने की सीजीटी यूनियन को सहमति दे दी थी.

यूनियन के मुताबिक़ देश के 19 परमाणु बिजली घरों में से 16 प्रभावित हड़ताल से प्रभावित होंगे. देश में कुल खपत का 75 प्रतिशत बिजली परमाणु घरों से पैदा होती है. इस हड़ताल से देश में छह प्रतिशत बिजली की कमी होने वाली है.

हालांकि कुछ यूनियनें श्रम क़ानूनों की तरफ़दारी कर रही हैं.

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सरकार द्वार किए जा रहे श्रम क़ानूनों के अंतर्गत कंपनियों को अपनी मर्जी से नौकरी देने और निकालने का अधिकार होगा.

इसके अलावा कंपनियां काम के घंटे को प्रति सप्ताह 35 घंटे से बढ़ाकर 46 घंटे तक कर सकती हैं.

कंपनियों को वेतन कम करने की भी अधिक आज़ादी देने का प्रावधान है. कंपनियों को सार्वजनिक छुट्टियों और क़ानूनी छुट्टियों में कर्मचारियों की सहमति से कटौती के भी अधिकार देने की बात है.

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राष्ट्रपति फ़्रांसुआ ओलांद का कहना है कि फ्रांसीसी लोगों और अर्थव्यवस्था के हितों को सुनिश्चित करने के लिए हर क़दम उठाए जाएंगे.

कर्मचारी यूनियनें बिना संसद की मंजूरी के इस तरह क़ानून बनाने का विरोध कर रही हैं.

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