कौन है अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव की नई प्रत्याशी!

  • 28 मई 2016
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इस वक़्त अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव का शोर है. डॉनल्ड ट्रम्प और हिलेरी क्लिंटन तो प्रमुख उम्मीदवार हैं ही. एक और दिलचस्प प्रत्याशी मैदान में उतरने को हैं. नाम है बार्बी.

चौंक गए आप! यक़ीन नहीं आया?

असल में अमरीकी चुनावों की चर्चा का फ़ायदा उठाते हुए, गुड़िया बनाने वाली दुनिया की सबसे मशहूर कंपनी ने बार्बी को इस मौक़े के हिसाब से नया लुक दिया है.

बार्बी डॉल को इस बार अमरीकी राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल दिखाया गया है. कंपनी इस बार बाज़ार में जुड़वां बार्बी डॉल उतारेगी. एक राष्ट्रपति पद की तो दूसरी उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार के तौर पर पेश की जाएगी.

वैसे, ये पहली बार नहीं है कि बार्बी ने कोई नया रूप धरा है. बाज़ार में आने के क़रीब साठ सालों के दौर में बार्बी ने हज़ारों रूप लिए हैं. सैकड़ों बार अपना चेहरा और लुक बदला है.

अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवार के तौर पर बार्बी को पेश करने का आइडिया इसे बनाने वाली कंपनी मैटेल के अध्यक्ष रिचर्ड डिक्सन का है.

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वो मानते हैं कि बदलते दौर के साथ बार्बी का मेकओवर भी ज़रूरी है. वरना वो पुरानी लगने लगेगी.

रिचर्ड कहते हैं कि अपनी ऊंची एड़ियों वाली सैंडिल छोड़कर, बार्बी ने हक़ीक़त की ज़मीन पर पांव रखा है. उसके मेकओवर का ही नतीजा है कि आज बार्बी, अपने ख़ास डील-डौल के बजाय आम महिलाओं जैसी दिखने की कोशिश कर रही है.

उसके तीन अवतार बाज़ार में आए हैं. इनमें से एक में वो लंबी है, दूसरे में छरहरी जबकि तीसरे में सुडौल बदन के साथ दिखी है.

आज ट्विटर पर बार्बी नाम से ट्रेंड करने के लिए हैशटैग #TheDollEvolves चलाया जा रहा है. इसका नारा है, लोगों की कल्पनाएं कई तरह की होती है. बार्बी उन कल्पनाओं पर खरा उतरने की कोशिश कर रही है.

इसीलिए बाज़ार में आई है, हेलो बार्बी. जिसमें मशीनी दिमाग़ है. जो लोगों से बात कर सकती है. इस पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने पिछले साल नवंबर में कवर स्टोरी भी की थी.

शीर्षक दिया गया था, 'अब मेरे पास दिमाग़ है!'

बार्बी डॉल की कल्पना रूथ हैंडलर नाम की एक महिला ने की थी. वो मैटेल कंपनी के सह-संस्थापक एलियट हैंडलर की पत्नी थीं.

फ्रांस की राजधानी पेरिस के मशहूर लेस आर्ट्स डेकोरैटिफिस म्यूज़ियम में बार्बी डॉल की पूरी दुनिया बसती है. यहां बार्बी के अब तक के हर अवतार को लोग देख सकते हैं.

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म्यूजियम की देख-रेख फिलहाल एनी मोनियर के हाथों में है. मोनियर बताती हैं कि बार्बी डॉल का आइडिया, रूथ हैंडलर को अपनी बेटी को खेलते देखकर आया था.

रूथ की बेटी का नाम बारबरा था. वो काग़ज़ की गुड़िया से खेल रही थीं. तभी रूथ को औरतों जैसी डॉल बनाने का ख़याल आया.

उन्होंने सोचा कि गुड़िया कोई बच्ची ही क्यों हो, कोई जवां महिला क्यों नहीं? बाद में बारबरा के नाम पर ही बार्बी डॉल को उसका नाम मिला.

हैंडलर के इस आइडिया को पहले-पहल किसी ने पसंद नहीं किया. मगर 1956 में जब स्विटज़रलैंड के दौरे पर गईं तो रूथ ने देखा कि जर्मन अख़बार बिल्ड ने एक कॉमिक किरदार गढ़ा है, जिसका नाम था लिली.

लिली बेहद मज़ेदार कैरेक्टर थी. वो अक्सर मुसीबत में फंस जाती थी और फिर अपने लटके-झटकों से उस मुसीबत से छुटकारा पाती थी.

जिस वक़्त तक रूथ हैंडलर की बार्बी की कल्पना साकार हुई, उस वक़्त तक उनकी बेटी बारबरा की शादी हो चुकी थी. इसी के बाद बार्बी को 1959 में बाज़ार में उतारा गया. उसका पूरा नाम था बारबरा मिलिसेंट रॉबर्ट्स.

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इसके बदन को मशहूर हॉलीवुड स्टार एलिज़ाबेथ टेलर और मर्लिन मुनरो से प्रेरणा लेकर बनाया गया था. बार्बी ने जो पहले कपड़े पहने थे वो स्विमसूट था.

उसकी आंखों का रंग बिल्लियों जैसा था. तो उसने छल्ले वाली ईयररिंग पहनी हुई थीं और उसकी चप्पलें पतली एड़ियों वाली थीं. इसे लोगों ने ख़ूब पसंद किया.

उसके बाद से बार्बी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज पेरिस में बार्बी की नुमाइश में उसके कपड़ों के सात हज़ार डिज़ाइनों की प्रदर्शनी देखी जा सकती है.

1959 में बाज़ार में आने के दो साल बाद ही बार्बी के ब्वॉयफ्रैंड के तौर पर केन को बाज़ार में उतारा गया. केन नाम, बारबरा के भाई का था.

जल्द ही बार्बी की शोहरत इतनी हो गई कि उसके नाम पर किसी भी हॉलीवुड स्टार से ज़्यादा चिट्ठियां आने लगीं. एक हफ़्ते में बार्बी के नाम के क़रीब बीस हज़ार ख़त आते थे.

साठ के दशक में बार्बी और उसके परिवार पर आधारित एक छोटा सा उपन्यास भी लिख डाला गया. फिर टीवी के लिए, बार्बी पर आधारित एक एनिमेशन फ़िल्म भी बनी. बार्बी की अलग ही दुनिया बसा दी गई थी.

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जब पहले-पहल बार्बी को बाज़ार में उतारा गया तो उसके काले और सुनहरे दोनों तरह के बालों के वर्जन आए थे.

फिर उसके तमाम विकल्पों के तौर पर काले रंग की बार्बी की कज़िन भी बाज़ार में उतारी गई. इसका नाम कलर्ड फ्रैंसी था. हालांकि ये बुरी तरह नाकाम रही.

जब मैटेल ने क्रिस्टी के नाम से काले रंग की बार्बी बाज़ार में उतारी तो, इसे ख़ूब पसंद किया गया. ये वो दौर था जब अमरीका में काले लोगों के अधिकारों के लिए आंदोलन चल रहा था.

बार्बी का पहला मेकओवर साठ के दशक में ही हुआ. जब उसके बालों को अमरीकी राष्ट्रपति जॉन कैनेडी की पत्नी जैकी कैनेडी की तरह का बबल कट दिया गया.

जैसे-जैसे समाज में औरतों के रोल बदले बार्बी कामकाजी, आज़ाद होने लगीं, गाड़ियां चलाने लगीं, छोटे कपड़े पहनने लगीं.

बार्बी का रंग-रूप भी बदलता गया. कभी उसकी आंखों की पुतलियां खुलीं. फिर उसके पैर मुड़ने लगे. और फिर लचकती कमर वाली बार्बी भी बाज़ार में आई.

1971 में मैलिबू बार्बी के नाम से इसका नया अवतार बाज़ार में आया. जिसमें इसके चेहरे की बनावट से लेकर बाल तक सबकुछ बदला हुआ था.

पहली बार लोगों को उसके चमकीले, सफेद दांत भी देखने को मिले. पहले वो नज़र चुराती मालूम होती थी. मगर मैलिबू गर्ल लोगों की आंख में आंख डालकर बातें करती दिखती थी.

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बार्बी की शक्लो-सूरत में एक और बड़ा बदलाव इक्कीसवीं सदी की शुरुआत में आया, जब इसका ज्यूविश गर्ल अवतार आया. इसे ब्रिटनी स्पीयर्स जैसी युवा गायिकाओं से प्रेरित होकर बनाया गया था. जो उस वक़्त ख़ूब लोकप्रिय थीं.

बार्बी की बनावट हमेशा से चर्चा का विषय रही है. अभी साल 2011 में हफिंगटन पोस्ट की गैलिया स्लेयन ने इसके बारे में लिखा.

गैलिया ने कहा कि अगर बार्बी असल ज़िंदगी की कोई औरत होती तो वो पांच फुट नौ इंच लंबी होती. उसका बस्ट 39 इंच का होता और कमर 18 इंच की और हिप्स 33 इंच के होते. ऐसी सूरत में वो दो पैरों पर चल ही नहीं पाती. उसे घुटनों के बल चलना पड़ता.

मशहूर अमरीकी पत्रिका, टाइम ने भी मज़ाक़िया लहजे में बार्बी पर एक लेख छापा. इसकी हेडिंग थी, 'नाऊ, कैन वी स्टॉप टाकिंग अबाउट माय बॉडी'.

बार्बी के बदन की ही तरह इसके हज़ारों चेहरे भी देखने को मिले हैं. पेरिस के लेस आर्ट्स डेकोरैटिफिस में बार्बी के ऐसे कई रंग रूप देखने को मिल सकते हैं.

पिछले साठ सालों में बार्बी के बिंदास रंग रूप की ही तरह इसका पेशा भी ख़ूब बदला है. कभी वो मैकडोनाल्ड के रेस्तरां की कैशियर बनी तो कभी फुटबाल कोच और कभी कंप्यूटर इंजीनियर.

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वो पॉप गायिका, डॉक्टर, दमकल कर्मचारी और वैज्ञानिकों के अवतार में भी बाज़ार में आ चुकी है. इसी तरह वो चीयरलीडर भी रही है और मिस अमरीका भी.

साठ के दशक में जब इंसान ने चांद पर क़दम रखा तो बाज़ार मे एस्ट्रोनॉट बार्बी भी आई थी.

अमरीका के राष्ट्रपति चुनावों में तो वो 1992 से ही शिरकत कर रही है. तब किसी महिला उम्मीदवार का नामोनिशां तक नहीं था.

पेरिस के म्यूज़ियम की एनी मोनियर कहती हैं कि बार्बी के बारे में अच्छी ख़बरें कम ही चर्चा में आती हैं. जैसे कि कैंसर के शिकार बच्चों के लिए बनी एला बार्बी जिसके सिर से बाल गायब थे.

वो महिलावादी है. मगर उसे ग्लैमरस गर्ल के तौर पर ही ज़्यादा जाना जाता है. वो किसी भी पेशे को चुनने के लिए आज़ाद है. एनी अपने म्यूज़ियम में ही बार्बी के तमाम अवतार दिखाती हैं,

एनी कहती हैं कि बार्बी ने हमेशा बदलते वक़्त के साथ क़दम मिलाया है. वो फ़ैशन मॉडल भी रही है और हॉलीवुड की हीरोइन भी. उसने दुनिया की ताक़तवर महिलाओं जैसे ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ से प्रेरणा ली है.

एनी मोनियर कहती हैं कि बार्बी बहुत सारे विवादों में फंसी है. इनमें से ज़्यादातर उसके फिगर को लेकर उठे विवाद थे.

लेकिन, याद रहे कि आख़िर में बार्बी महज़ एक खिलौना है.

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