पाकिस्तान के लिए चुनौती है सलमा बांध?

  • 5 जून 2016
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अफ़ग़ानिस्तान के पश्चिमी हेरात प्रांत में एक बड़े हाइड्रो इलेक्ट्रिक बांध प्रोजेक्ट के उद्घाटन का भारतीय और अफ़ग़ान मीडिया ने स्वागत किया है.

अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को हेरात के चेस्त-ए-शरीफ़ ज़िले में सलमा बांध का उद्घाटन किया.

ये बांध बिजली और सिचाईं के लिए पानी की आपूर्ति करेगा. इस बांध को कठिन सुरक्षा चुनौतियों के बीच कई वर्षों में भारत की आर्थिक मदद से बनाया गया है.

दोनों देशों के मीडिया में इसे अफ़ग़ान-भारत मैत्री बांध कहा जा रहा है.

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अख़बारों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का पूरा होना दोनों देशों के पारंपरिक दोस्ताना संबंधों की एक और मिसाल है. साथ ही उन्होंने इसे दोनों देशों के साझा पड़ोसी पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी भी बताया है, जिस पर इस क्षेत्र में चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगते हैं.

काबुल से छपने वाला दरी भाषा का अख़बार 'द डेली अफ़ग़ानिस्तान' लिखता है, "अफ़ग़ानिस्तान में इस प्रकार के बड़े प्रोजेक्ट में भारत की मौजूदगी और दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक संबंधों और साझा इतिहास ने भारत को अफ़ग़ान लोगों के लिए पसंदीदा देश बना दिया है."

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वहीं दिल्ली से चलने वाली अंग्रेजी वेबसाइट 'फर्स्ट पोस्ट' में प्रकाश नंदा ने लिखा है, "अब तक तो सब ठीक है.. (लेकिन) ये भी सच है कि अफ़गानिस्तान में भारत अपनी सॉफ्ट पावर से जो कर सकता था वह कर चुका है. अब समय है कि भारत अफ़गानिस्तान में अन्य साझेदारों के साथ "स्मार्ट पॉवर" वाली सोच अपनाए."

अफ़ग़ानिस्तान के हेरात से छपने वाले दरी अख़बार 'हाशत-ए-सोभ' का कहना है, "साफ़ तौर पर, हमारा दक्षिणी पड़ोसी पाकिस्तान (नई दिल्ली के) बढ़ते प्रभाव से परेशान है. लेकिन इस्लामाबाद को स्वीकार करना ही होगा कि अगर वो तालिबान के साथ दोस्ती करेगा और अफ़ग़ानिस्तान की बर्बादी में उसकी मदद करेगा तो फिर कैसे वो अफ़ग़ान लोगों की दोस्ती और सम्मान पा सकता है."

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काबुल से निकलने वाले दरी अख़बार अरमान-ए-मेली ने लिखा, "हमारे पड़ोसी देशों ने बांध के ख़िलाफ़ साजिशें रचीं. उन्होंने चरमपंथियों को भाड़े पर लिया और वो इस बड़े प्रोजेक्ट को साकार होने में बांधाएं डालीं. लेकिन देश के लोगों का मज़बूत इरादा जीता, प्रोजेक्ट पूरा हुआ और अब इसका उद्घाटन भी हो गया. इस दौरान हमारा पड़ोसी पाकिस्तान अपने एजेंटों और चरमपंथियों के ज़रिए हमारे नागरिकों को रोज़ाना शहीद कर रहा है, हमारे बुनियादी ढांचों स्कूलों, क्लिनिकों और पुलों को बर्बाद कर रहा है और हमारे देश को मुश्किलों में धकेल रहा है."

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चंडीगढ़ से छपने वाला अंग्रेजी अख़बार 'द ट्रिब्यून' लिखता है, "लगता है सलमा बांध का उद्घाटन दुनिया और एक विशेष पड़ोसी को ये बताने का सही अवसर है कि भारत और अफ़गानिस्तान के बीच संबंध मज़बूत हो रहे हैं."

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'द हिन्दू' लिखता है, "दोनों देश पाकिस्तान के अच्छे चरमपंथी और बुरे चरमपंथी भेद से चिंतिंत हैं. लेकिन भारत सुरक्षा के मुद्दे पर ज़्यादा हाथ पैर नहीं मारना चाहता क्योंकि इससे वो कभी न ख़त्म होने वाले युद्ध में फंस सकता है. इस तरह की सर्तकता ज़रूरी है. लेकिन ये बात भारत को एक ऐसे देश में बड़ी भूमिका अदा करने से ना रोके जिसकी स्थिरता उसकी क्षेत्रीय महत्वकांक्षाओं के लिए ज़रूरी है और जिसके लोग परंपरागत तौर पर भारत को एक अच्छे दोस्त की तरह देखते हैं."

'द इंडियन एक्सप्रेस' ने लिखा है, "उम्मीद है कि सलमा बांध से अफ़ग़ानिस्तान के लिए नए अवसर खुलेंगे, ख़ासकर मध्य एशिया को सड़क और रेल नेटवर्क से जोड़ने वाले ईरान के चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट के पूरे हो जाने पर."

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