'मोदी के नक़्शे वाले क़ानून को मानेगा कौन?'

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नरेंद्र मोदी सरकार के प्रस्तावित भू-स्थानिक सूचना नियमन विधेयक 2016 पर भारत में तो बहस हो ही रही है. सीमा पार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भी इसकी चर्चा है, हालाँकि ये राजनीतिक दलों और धार्मिक संस्थाओं तक सीमित है.

भारत सरकार ने चार मई को इस विधेयक के मसौदे को सुझावों के लिए वेबसाइट पर डाला था. लोगों से 2 जून तक सुझाव मांगे गए थे.

विधेयक में प्रावधान है कि जो भी संस्था, प्रकाशक या व्यक्ति भारत के नक़्शे को तोड़मरोड़ कर दिखाएगा, उसके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

नक़्शा ग़लत दिखाने पर 100 करोड़ रुपए तक का जुर्माना और सात साल तक की जेल या दोनों का प्रावधान है.

मुज़फ़्फ़राबाद समेत पाकिस्तान प्रशासित क्षेत्र के नौ ज़िलों के अधिकांश सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में पाकिस्तान प्रशासित जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बोर्डों का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है.

दोनों बोर्ड के पाठ्यक्रमों में पाकिस्तान के नक़्शे में जम्मू-कश्मीर के तमाम हिस्सों को दिखाया गया है.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर को आज़ाद कश्मीर, जबकि भारत प्रशासित कश्मीर के हिस्से को विवादित क्षेत्र के रूप दिखाया गया है.

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Image caption बेग़म तनवीर लतीफ़, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के टेक्स्ट बुक बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष हैं

इस क्षेत्र में बोर्ड की कुछ किताबों में चीन प्रशासित कश्मीर क्षेत्र अक्साई चिन को भी विवादित इलाक़े के रूप में पाकिस्तान के नक़्शे में दिखाया गया है.

लेखिका और शिक्षाविद् बेगम तनवीर लतीफ़ पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में कुछ साल पहले स्थापित हुए पहले टेक्स्ट बुक बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष हैं.

उन्होंने इस प्रस्तावित क़ानून के बारे में कहा कि मोदी सरकार को पाक-चीन आर्थिक कॉरिडोर हज़म नहीं हो रहा है. इस वजह से वह इस तरह के क़ानून लाना चाहती है.

उनका कहना था कि जम्मू-कश्मीर के विवादित दर्जे के आधार पर संयुक्त राष्ट्र ने इस क्षेत्र के दोनों विभाजित हिस्सों में संयुक्त राष्ट्र मिशन क़ायम कर रखे हैं.

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लतीफ़ कहती हैं, "यह अजीब सी बात है और राजनीतिक तौर पर हास्यास्पद लग रही है. मोदी ने जो सज़ाएं निर्धारित की हैं, उसे वो किस क़ानून के तहत देंगे और इन्हें मानेगा कौन? क्या अंतरराष्ट्रीय अदालतें मोदी के अधीन हैं. इस तरह की बातों का अंजाम अच्छा नहीं होता. वो अपने देश के लिए अच्छा नहीं कर रहे हैं."

उनका कहना था, "आज़ाद कश्मीर के विवादित दर्जे को पाकिस्तान ने स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया है और दुनिया भी इसे स्वीकार करती है. इस तरह के झूठ चलने वाले नहीं. मोदी इस क़ानून की वजह से अपना और अपने देश का मज़ाक़ उड़वाएंगे."

लतीफ़ ने कहा कि भारत में बुद्धिजीवी और लोकतांत्रिक लोग मौजूद हैं, जो मोदी के कारनामों का जवाब देंगे, जिसका इंतज़ार रहेगा.

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Image caption फ़िज़ा साजिद, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी के एक निजी स्कूल में पढ़ती हैं

वहीं, 15 साल की फ़िज़ा साजिद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी के एक निजी स्कूल में पढ़ती हैं.

उन्होंने इस क़ानून पर बीबीसी से कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य दोनों देशों के लिए विवादास्पद क्षेत्र है, इसलिए भारत और पाकिस्तान इसके विवादित दर्जे का सम्मान करें.

उन्होंने कहा कि यदि भारत कश्मीर को अपना हिस्सा बताकर हठधर्मी करेगा, तो पाकिस्तान भी ऐसा ही करेगा. इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ेगा और इस क्षेत्र की शांति तबाह हो जाएगी.

उन्होंने नरेंद्र मोदी से अपील की कि वो हठधर्मी छोड़कर होश से काम लें.

इस क्षेत्र में शांति के लिए काम करने वाली पत्रकारों की संस्था 'प्रेस फ़ॉर पीस' के प्रमुख राजा वसीम ने दोनों देशों के शांतिप्रिय लोगों को चेतावनी दी कि मोदी सरकार की ओर से विवादित जम्मू-कश्मीर के बारे में इस तरह के क़ानून पर अमल से क्षेत्र में शांति को गंभीर झटका लग सकता है. इसलिए वह ऐसे क़ानूनों की रोकथाम में अपनी भूमिका निभाएं.

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पाकिस्तान ने भी भारत के इस प्रस्तावित विधेयक को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी.

पाकिस्तान और भारत दोनों पूरे कश्मीर को अपना हिस्सा बताते हैं. वहीं संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की रोशनी में इसे नक़्शों में विवादित क्षेत्र के रूप में दिखाया जाता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सोशल मीडिया पर जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों को पाकिस्तान में और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों को चीन में दिखाने वाले नक़्शों को देखते हुए सरकार ने ये क़दम उठाने का फ़ैसला किया है.

हाल ही में ट्विटर पर कश्मीर को चीन में और जम्मू को पाकिस्तान में दिखाया गया था, बाद में भारत सरकार के कड़े विरोध के बाद इसे ठीक किया गया था.

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प्रस्तावित विधेयक के मसौदे के मुताबिक़ भारत की किसी भी जगह की अंतरिक्ष से ली गई तस्वीर या जानकारी प्राप्त करने, उसे प्रसारित करने और उसे वितरित करने से पहले सरकार से इजाज़त लेना ज़रूरी होगा.

विधेयक के मुतािबक़, जो भी भारत के किसी स्थान के बारे में क़ानून से हटकर जानकारी देगा उस पर एक करोड़ से 100 करोड़ रुपए तक का जुर्माना होगा या फिर सात साल तक की क़ैद या फिर दोनों सज़ाएं एक साथ भी हो सकती हैं.

पिछले साल अप्रैल में भारत सरकार ने कश्मीर को नक़्शे में चीन और पाकिस्तान का हिस्सा दिखाने पर अल-जज़ीरा टीवी चैनल के प्रसारण को पांच दिन के लिए बंद कर दिया था.

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