चीन में रईस युवाओं को लगा नया शौक़

  • 5 जून 2016
कला में निवेश इमेज कॉपीरइट China Photos Getty Images

चीन के अमीर युवाओं में इन दिनों नया चलन चल पड़ा है. ये चलन है कला में निवेश का. युवा रईस, आज दिखावे की चीज़ों के बजाय बढ़-चढ़कर कला में निवेश कर रहे हैं.

असल में, पिछले तीस सालों में ज़बरदस्त आर्थिक तरक़्क़ी के चलते चीन में रईसों का एक बड़ा तबक़ा खड़ा हो गया. इन्हें दूसरी पीढ़ी के रईस कहा जाता है जिन्हें विरासत में संपत्ति मिली है.

इन लोगों को समाज में अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता. मीडिया इन्हें बिगड़ैल रईसज़ादे कहकर इनके रहन-सहन और ग़ुरूर पर ऐतराज़ जताता रहा है.

इस बदनामी से बचने और इमेज सुधारने के लिए इस चीनी पीढ़ी के रईस अब कुछ नया कर रहे हैं. ये लोग कला में निवेश कर रहे हैं.

ऐसे ही चीनी युवा रईस हैं, बीजिंग के लिन हान. उन्होंने पहली बार जब एक कलाकृति ख़रीदी, तो इसके लिए उन्होंने दस लाख़ डॉलर की क़ीमत अदा की.

इमेज कॉपीरइट Lucas Schifres Getty Images

उस वक़्त लिन की उम्र महज़ 26 साल थी. आज चार साल बाद उनका ख़ुद का आर्ट म्यूज़ियम है, बीजिंग में. इसका नाम उन्होंने एम-वुड्स रखा है.

इसमें वो अक्सर कुछ ख़ास लोगों को बुलाकर अपना कलेक्शन दिखाते हैं. इनमें दुनिया भर के मशहूर कलाकारों की रचनाएं हैं. जियॉर्जियो मोरांडी की ऑयल पेंटिंग है. स्वीडिश कलाकार ओलाफर एलियासन की कृति है. चीन के कलाकारों की भी आर्ट उन्होंने इकट्ठी कर रखी है.

लिन हान ने बीस साल की उम्र में ही काफ़ी पैसा कमा लिया था. इस मुनाफ़े का एक हिस्सा उन्होंने रियल स्टेट और शेयर बाज़ार में लगाया. मगर उन्हें तसल्ली नहीं मिली.

लिन कहते हैं कि उनकी ज़िंदगी बहुत बोरिंग थी. उन्होंने साइकिल के बैज ख़रीदे. कुछ महंगी कारें ख़रीदीं. मगर मज़ा नहीं आया. ढाई साल पहले उन्हें कला में दिलचस्पी हुई. हाल ही में वो यूरोप का दौरा करके लौटे हैं. उन्होंने वहां पर म्यूज़ियम और आर्ट गैलरीज़ देखीं.

इमेज कॉपीरइट Suhaimi Abdullah Getty Images

पिछले कुछ सालों में ही लिन ने क़रीब दो सौ कलाकृतियां ख़रीदी हैं. वो हर साल इस पर तीस लाख़ डॉलर ख़र्च करने का इरादा रखते हैं. मगर अक्सर इससे ज़्यादा ख़र्च हो जाता है.

लिन अकेले नहीं. चीन में दूसरी पीढ़ी के बहुत से रईस युवा आज आर्ट में पैसे लगा रहे हैं. असल में अच्छी पढ़ाई लिखाई और अपने मां-बाप से ज़्यादा दुनिया घूमने के बावजूद उनके रहन-सहन पर सवाल उठते रहे हैं. इसीलिए अपनी इमेज सुधारने के लिए वो कला की दुनिया में दिलचस्पी ले रहे हैं.

लिन कहते हैं कि वो ख़ुशक़िस्मत हैं कि उनके पास इतने पैसे हैं कि वो ऐसा निवेश कर सकते हैं. उनके प्राइवेट म्यूज़ियम में अपने कलेक्शन की नुमाइश के साथ आम लोगों के लिए खुली जगह भी है. जहां पर नाटक हो सकते हैं, कॉन्सर्ट किए जा सकते हैं.

लिन कहते हैं कि कला ने उनका दुनिया देखने का नज़रिया बदल दिया है. पहले सब हल्का दिखता था. अब उसमें गहराई आ गई है.

नई पीढ़ी के ये अमीर चीनी ख़ूब दुनिया घूमते हैं. पैसे की कमी है ही नहीं. एक अंदाज़े के मुताबिक़, इस दशक के आख़िर तक चीन में सवा करोड़ अरबपति हो जाएंगे, जिनके पास पंद्रह लाख़ डॉलर या इससे ज़्यादा की संपत्ति होगी.

इमेज कॉपीरइट Per Anders Pettersson Getty Images

बीजिंग के ऐसे ही एक और कला प्रेमी हैं फ्रैंक लिन. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में फ़ाइन आर्ट्स की पढ़ाई की थी. इसके बाद छह साल वो कनाडा मे रहे. जब उनके पिता ने एक आर्ट फाउंडेशन खोलने की सोची, तो ये तय था कि फ्रैंक ही उसकी देखभाल करेंगे.

फ्रैंक लिन हर साल कला में पचास से साठ हज़ार डॉलर तक निवेश का इरादा रखते हैं. पीकिंग फाइन आर्ट्स की संस्थापक मेग मैगियो कहती हैं कि हर चीनी आर्ट ख़रीदने में हर साल औसतन चौदह हज़ार डॉलर ख़र्च करता है.

नीलामघर क्रिस्टी की एशिया में प्रमुख रेबेका वेई कहती हैं कि पहले आर्ट में दिलचस्पी लेने वालों की औसत उम्र पचास बरस हुआ करती थी. आज ये घटकर बीस के आस-पास रह गई है. इनमें से ज़्यादातर निवेशक दूसरी पीढ़ी के अमीर युवा हैं. रेबेका कहती हैं कि इनके मां-बाप पैसे कमाने में व्यस्त हैं. और ये विदेशों में पढ़े लिखे युवा, उस पैसे को आर्ट पर ख़र्च कर रहे हैं.

रेबेका इसकी सबसे बड़ी वजह बताती हैं युवा पीढ़ी के विदेश घूमने का तजुर्बा. नई पीढ़ी के चीनी नागरिक, तमाम देश घूमकर जब लौटते हैं तो उनका नज़रिया बदला होता है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

दूसरा वो विदेश में पढ़े-लिखे होते हैं. इसलिए उन्हें आर्ट की समझ होती है. उसकी क़ीमत पता होती है.

और तीसरी अहम बात ये भी है कि एशिया में आज आर्ट गैलरीज़ की तादाद तेज़ी से बढ़ रही है. ये भी युवाओं को आर्ट में निवेश का हौसला देती हैं.

आज वो चीनी लोग जिनकी जेब में पैसे हैं वो इमेज चमकाने के लिए और अपनी हैसियत दिखाने के लिए कला के कद्रदान बन रहे हैं.

वो अपने निवेश का दायरा बढ़ाना चाहते हैं. इसलिए वो कला में दिलचस्पी ले रहे हैं. पहले की पीढ़ी जहां स्थानीय कलाकारों और पुरानी चीज़ों में दिलचस्पी रखती थी. वहीं युवा चीनी अमीर, विदेशी कलाकारों पर भी मोटी रकम ख़र्च करने को तैयार हैं. इसीलिए पश्चिमी देशों की मॉडर्न आर्ट, आज चीनी बाज़ार में ख़ूब दिखाई दे रही है.

चीन के पैसे वाले लोग, विदेशों में भी सुर्ख़ियां बटोर रहे हैं. अभी हाल ही में सोदबी की एक बोली में तीन चीनी ख़रीदारों ने मिलकर क़रीब 12 करोड़ डॉलर ख़र्च कर डाले, आर्ट की ख़रीदारी में.

पिछले साल चीन में कला का कारोबार क़रीब 12 अरब डॉलर का था. हालांकि 2014 के मुक़ाबले ये क़रीब एक चौथाई कम था. फिर भी अमरीका और ब्रिटेन के बाद आर्ट में निवेश करने वाला चीन, तीसरा बड़ा देश है.

इमेज कॉपीरइट Per Anders Pettersson Getty Images

दुनिया भर के कला के कारोबार में इसकी हिस्सेदारी 19 फ़ीसदी है.

आज चीन के लोग पूरी दुनिया में घूम-घूमकर, बेहतरीन कलाकृतियां ख़रीद रहे हैं. विदेशी कलाकारों में उनकी ख़ास दिलचस्पी है, नीलामघर क्रिस्टी के कुल कारोबार का एक तिहाई, चीन में होता है.

वैसे चीन की आर्थिक तरक़्क़ी की रफ़्तार धीमी होने से शेयर बाज़ार में घबराहट है. मगर कला के कारोबारी बेफ़िक्र हैं. उन्हें इसमें निवेश बढ़ने की ही उम्मीद है. आज चीन में कला के कद्रदान, न्यूयॉर्क या लंदन जैसे ही हैं.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार