'दौरे या ट्वीट नहीं बताते रिश्ते कितने मज़बूत'

  • 9 जून 2016
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अमरीका ने भारत को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की सदस्यता हासिल करने में भरपूर सहयोग का वादा किया है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के विदेश मामलों पर विशेष सहायक तारिक फ़ातमी इसे हास्यास्पद बताते हैं कि क्योंकि 'न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप भारत के परमाणु परीक्षण की प्रतिक्रिया के तौर पर शुरू किया गया था.'

उनका कहना है कि इन मुल्कों ने एनएसजी की शुरूआत इसलिए की थी कि भारत ने मई 1974 में परमाणु अप्रसार की धज्जियाँ उड़ाई थीं.

वे कहते हैं, ''अगर कोई मुल्क ये तय कर ले कि वो अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानकों की इज़्ज़त ना करे, अगर वो ठान ले कि वो अपने संकीर्ण राष्ट्रीय हित, व्यक्तिगत पसंद-नापसंद पर वैश्विक नीतियों को आगे बढ़ाने की कोशिश करे और वैश्विक मानकों और अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियों की कोई इज़्ज़त ना करे, तो इसका इलाज पाकिस्तान के पास नहीं है.''

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वे कहते हैं, ''लेकिन पाकिस्तान दुनिया से वादा चाहता है कि वैश्विक व्यवस्था को गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाना चाहिए और उसमें देश के आधार पर रियायतें नहीं होनी चाहिए, बल्कि कसौटी के आधार पर फैसला लेना चाहिए.''

तारिक फ़ातमी का कहना है कि पिछले तीन साल में जिस तरह की पहल हुई है, उससे चीन के साथ रिश्ते अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक पहुँच गए हैं. वहीं रूस के साथ केवल व्यापार और वाणिज्य ही नहीं, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में भी व्यापक सहयोग हो रहा है.

उनका मानना है कि पाकिस्तान की विदेश नीति उसे अलग-थलग नहीं कर रही है. चीन के साथ रिश्ते बहुत अच्छे हैं, ईरान के साथ रिश्ते बेहतरीन हैं.

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वे कहते हैं, ''किसी नेता के दौरे और एक प्रेस स्टेटमेंट या ट्वीट से मुल्कों के रिश्ते समझना बहुत मुश्क़िल है.

उनका मानना है कि पाकिस्तान-ईरान के ऐतिहासिक रिश्ते हैं और उसमें बड़ी ताकत है.

(बीबीसी की अंबर खैरी की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के विदेश मामलों पर विशेष सहायक तारिक फ़ातमी से बातचीत के आधार पर)

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