अमरीका ने दिया नया नाम, 'मोदी डॉक्ट्रिन'

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अमरीकी यात्रा को ओबामा प्रशासन ने ऐतिहासिक बताया है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के अधिकारियों ने अमरीका-भारत संबंधों को लेकर मोदी के नए नज़रिए को 'मोदी डॉक्ट्रिन' का नाम दिया है.

मोदी ने अमरीकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए 'अतीत की हिचक' छोड़कर वैश्विक मुद्दों पर एक साथ काम करने की बात कही थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने दक्षिण और मध्य एशिया के लिए उप विदेशमंत्री निशा देसाई बिस्वाल के हवाले से कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की जो सबसे अहम बात थी, मोदी द्वारा अमरीकी कांग्रेस के सामने पेश किया गया वो नज़रिया."

वॉशिंगटन में उन्होंने कहा, "विदेशी नीति से संबंधित इस विज़न को मैं मोदी डॉक्ट्रिन कहूंगी, जिसमें अतीत की हिचक से पीछा छुड़ाने की बात है और दोनों देशों के साझा हितों को स्वीकार करता है."

गुरुवार को एक अमरीकी थिंक टैंक हेरिटेज फ़ाउंडेशन और नई दिल्ली के थिंक टैंक इंडिया फ़ाउंडेशन के संयुक्त कार्यक्रम में बिस्वाल ने ये बातें कहीं.

बिस्वाल ने कहा कि अपने भाषण में मोदी ने भारत और अमरीका की साझेदारी का विज़न पेश किया वो एशिया से लेकर अफ़्रीका तक, हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक शांति और सम्पन्नता का वाहक हो सकता है.

यह समुद्री रास्तों की सुरक्षा और समंदर में नौसंचालन की आज़ादी को सुनिश्चित कर सकता है.

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उन्होंने कहा, "यह मोदी डॉक्ट्रिन इस बात को रेखांकित करता है कि एशिया में सहमति से बने एक सुरक्षा ढांचे की गैरमोजूदगी अनिश्चितता पैदा करती है. अंतरराष्ट्रीय नियमों और क़ानूनों के प्रति भारत के समर्थन को साफ़ करता है."

उन्होंने कहा कि एशिया में शक्ति संतुलन स्थापित करने में भारत ओबामा प्रशासन का एक मुख्य साझीदार बन गया है, जो ये मानता है कि भारत-प्रशांत की ख़ुशहाली अमरीकी सुरक्षा और ख़ुशहाली में ही निहित है.

भारत में अमरीकी राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा कि अमरीका प्रधानमंत्री के विज़न का स्वागत करता है और उसका भी यही मानना है.

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