227 साल में पहली महिला, पर 'ग़ायब है उत्साह'

  • 12 जून 2016
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यहां तक पहुंचने में 227 साल लग गए. वर्ष 1789 में जॉर्ज वॉशिंगटन अमरीका के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति बने. इसके बाद 42 लोग अमरीका के राष्ट्रपति चुने गए, इनमें 41 श्वेत थे.

आज तक कोई महिला अमरीका की राष्ट्रपति नहीं बन पाई हैं.

लेकिन अब हिलरी क्लिंटन इतिहास बनाने के क़रीब हैं, वे व्हाइट हाउस के लिए दावेदारी करने वाली किसी प्रमुख पार्टी की ओर से पहली महिला बनने ही वाली हैं.

ऐसे में मुझे ज़्यादा उत्साहित क्यों नहीं होना चाहिए?

थोड़े समय के लिए राजनीति को दूर रखें और आपका राजनीतिक झुकाव चाहे जिस ओर रहा हो, लेकिन यह महिलाओं के लिए उत्साहित करने वाला पल है.

क्लिंटन मैडम राष्ट्रपति बन सकती है. इससे पहले दुनिया के सबसे शक्तिशाली पद पर हमने महिला को क़ाबिज़ नहीं देखा है.

अगर आपका भरोसा इसमें हैं कि कारोबार हो या पत्रकारिता, क़ानून का क्षेत्र हो या फिर मेडिसिन की दुनिया, वरिष्ठ पदों पर महिलाओं के आने से हम सबकी स्थिति बेहतर होगी, तो अहम पहलू है कि अब तक किसी महिला ने अमरीका को नहीं चलाया है.

आप उन्हें पसंद करते हों या नापसंद, वह रिपब्लिकन हों या फिर डेमोक्रेट. लिबरल हों या कंर्जेवेटिव, वह महिला हैं, यही बात सबसे अहम है. हालांकि ये निश्चित है कि नवंबर में होने वाले चुनाव में केवल इसी मुद्दे पर वोट नहीं डाले जाएंगे. लेकिन मौजूदा समय में इन पलों को थाम लेने की पर्याप्त वजहें तो हैं ही.

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हालांकि इस मुद्दे पर उत्साह की कमी की एक वजह ये हो सकती है, इस पर काफ़ी लंबे समय से बात हो रही थी.

20 जनवरी 2007 को जब हिलेरी क्लिंटन ने व्हाइट हाउस के लिए अपनी उम्मीदवारी घोषित की थी, तभी से हम लोग ऐसी कहानी पर काम कर रहे थे, जिसकी हेडिंग कुछ इस तरह की थी, ‘राष्ट्रपति पद के लिए पहली सक्षम महिला उम्मीदवार.’

हो सकता है हम चूक रहे हों, हमारे पास विशेषणों की कमी पड़ गई हो. हम हिलेरी क्लिंटन के लिए हर तरह की बातों का इस्तेमाल कर चुके हों. आख़िरकार वो पूर्व फर्स्ट लेडी, पूर्व सीनेटर, पूर्व मंत्री रह चुकी हैं.

ऐसे में हिलेरी क्लिंटन के लिए नया कुछ ना भी हो तो भी उनका महिला राष्ट्रपति होना नई बात होगी. युवा मतदाताओं में भी इस ख़बर को लेकर बहुत उत्साह नहीं दिखता है. मैंने कुछ युवा महिलाओं से इस मुद्दे पर बात की.

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इन महिलाओं ने सामूहिक तौर पर यही माना कि ये तो पुरानी ख़बर है, वे बूढ़ी हो चुकी हैं. वे काफ़ी कठोर हैं. वे दूसरे नेताओं की तरह ही है. वे लंबे समय से राजनीति में हैं. उनका हमसे जुड़ाव नहीं हो पाता.

वैसे ये राय सभी महिलाओं की नहीं है. महिलाओं के बीच जनमत सर्वेक्षण में वे डोनॉल्ड ट्रंप पर भारी पड़ी हैं. इसके बावजूद युवा महिलाओं में हिलेरी को लेकर उत्साह नहीं दिखता.

ओवल ऑफ़िस डेस्क पर किसी महिला के काम करने की कल्पना को लेकर बहुत कम उत्साह का होना खटकता है. आख़िर इस डेस्क को क्वीन विक्टोरिया ने वर्ष 1880 में अमरीका को दिया था, ऐसे में क्या समय नहीं आ गया है जब इसका इस्तेमाल किसी महिला को करना चाहिए?

दरअसल आज की 20 साल की महिलाओं को इस बात का भरोसा है कि वे अपने जीवन में महिला राष्ट्रपति देख लेंगी, लेकिन हमारी पाढ़ी के साथ ऐसा नहीं है. युवा महिलाएं इंतज़ार कर सकती हैं लेकिन 50 साल से ऊपर की महिलाओं के लिए इसको लेकर एक अर्जेंसी का भाव है, जो युवाओं में नहीं दिखता.

हालांकि इनमें से कुछ निश्चित तौर पर हिलेरी को वोट देंगी, कुछ ने हिलेरी को अभियान चलाने के लिए चंदा भी दिया होगा. लेकिन वे अभी उत्साहित महसूस नहीं कर रही हैं.

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राष्ट्रपति पद के लिए पहली महिला उम्मीदवार को लेकर उत्साह का माहौल साल 2008 में दिखा था. कई महिलाएं जो हिलेरी को वोट देंगी उन्होंने मुझसे कहा, “मेरी इच्छा है कि मैं और उत्साहित महसूस करूं.”

कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जो हिलेरी को पसंद नहीं करतीं, उनकी नीतियों को पसंद नहीं करतीं.

अभी हिलेरी क्लिंटन एक मज़बूत, सक्षम, और विश्वसनीय राष्ट्रपति हो सकती हैं, यह भरोसा केवल उनके समर्थकों में दिख रहा है. बावजूद इसके उनकी उम्मीदवारी को लेकर एक तरह की सुस्ती देखने को मिल रही है.

हो सकता है आने वाले दिनों में तस्वीर में बदलाव हो. ट्रंप के सामने हिलेरी के पक्ष में उत्साह दिखे. इसका उल्टा भी हो सकता है.

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लेकिन मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही वह दिन आएगा जब हम एक महिला की उम्मीदवारी के बारे में नहीं लिख रहे होंगे.

हमें कई महिला उम्मीदवारों के बारे में लिखना होगा, मुझे उम्मीद है कि ऐसा दिन जल्द ही आएगा.

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