कब, कहां और किसने किए चरमपंथी हमले

  • 14 जून 2016
गोलीबारी के बाद घटनास्थल पर सुरक्षाकर्मी. इमेज कॉपीरइट Reuters

अमरीकी राज्य फ़्लोरिडा के ऑरलैंडो शहर में समलैंगिकों के एक नाइट क्लब में शनिवार को हुई गोलीबारी में 50 लोगों की मौत हो गई.

पुलिस की जवाबी कार्रवाई में हमलावर उमर मतीन की भी मौत हो गई. वो अफ़ग़ान मूल के अमरीकी नागरिक थे.

हाल के दिनों में इस तरह के हमले न सिर्फ़ अमरीका बल्कि दूसरे मुल्कों में भी हुए हैं.

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पंजाब के पठानकोट में स्थित भारतीय वायुसेना के अड्डे के नॉन ऑपरेशनल एरिया में दो जनवरी 2016 को कुछ हथियारंबद हमलावर घुस आए थे.

हमलावरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड़ (एनएसजी) और सेना के जवानों को लगाया गया. इस दौरान गोलीबारी में सात जवानों की मौत हुई. इस कार्रवाई में चार चरमपंथी भी मारे गए.

पठानकोट हमले के लिए भारत ने पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को ज़िम्मेदार ठहराया था. भारत का कहना था कि उसने पाकिस्तान को इस मामले में सबूत भी दिए हैं.

हमले के तत्काल बाद पाकिस्तान स्थित चरमपंथी समूह यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (यूजेसी) ने कहा कि नेशनल हाईवे स्कॉवड ने इस हमले को अंजाम दिया.

इस मामले में पाकिस्तान के पंजाब के प्रांत के गुंजरावाला के एक पुलिस थाने में पठानकोट वायुसेना अड्डे पर हमला करने वालों और उन्हें उकसाने वालों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई थी. पाकिस्तान से आए एक जांच दल ने पठानकोट वायुसेना अड्डे का दौरा भी किया. लेकिन पाकिस्तान ने भारतीय जांच दल को आने की इजाज़त दी.

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अमरीकी राज्य कैलिफ़ोर्निया के सैन बर्नारडिनो में विकलांगों के एक सोशल सर्विस सेंटर पर तीन दिसंबर 2015 को हुई गोलीबारी में 14 लोग मारे गए थे. और 17 अन्य घायल हो गए थे. घटना के समय वहां एक कार्यक्रम चल रहा था.

पुलिस का कहना था कि दो संदिग्ध हमलावर भी मारे गए थे. इनमें एक पुरुष और एक महिला शामिल थे.

पुलिस ने 28 साल के सैय्यद रिज़वान फ़ारुक़ और 27 साल की तशफ़ीन मलिक को हमलावर बताया था. फ़ारूक़ राज्य के स्वास्थ्य विभाग में काम करते थे.

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कैलिफोर्निया पुलिस ने जब फ़ारूक़ के घर की तलाशी ली तो वहां से उसे बम बनाने के उपकरण, हथियार और हज़ारों राउंड गोलियां मिली थीं.

हालांकि अधिकारी ये नहीं पता लगा पाये कि फ़ारूक़ और तशफ़ीन ने हमला क्यों किया था.

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पेरिस में 13 नवंबर 2015 को हुए आत्मघाती हमलों और धमाकों में 129 लोग मारे गए थे और 350 लोग घायल हुए थे. इसे फ़्रांस के इतिहास में सबसे बड़ा चरमपंथी हमला माना जा रहा है.

हमलावरों ने पेरिस में संगीत कार्यक्रम, फ़ुटबॉल स्टेडियम, रेस्तरां और बार को निशाना बनाया था.

तीन हमले पेरिस के उत्तरी छोर पर स्थित फ्रांसीसी स्टेडियम के बाहर हुए. उस समय वहां फ्रांस और जर्मनी के बीच दोस्ताना मैच खेला जा रहा था.

इस दौरान वहां फ़्रांस के राष्ट्रपति फ़्रांसुआ ओलांद भी मौजूद थे. सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से बाहर निकाला.

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ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन ने पेरिस हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी. आत्मघाती हमलावरों ने एक जैसे विस्फोटक जैकेट पहन रखे थे और ख़ुद को उड़ा लिया.

इनमें से एक कथित हमलावर की पहचान 30 साल के फ्रांसीसी नागरिक उमर इस्माइल मुस्तफ़ई के रूप में हुई थी. उनका आपराधिक रिकॉर्ड था, लेकिन वो कभी जेल नहीं गए थे.

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पेरिस हमलों के बाद एक संदिग्ध हमलावर अब्देसलाम हो गए थे. उन्हें 18 मार्च 2016 को बेल्जियम के ब्रसेल्स में पुलिस कार्रवाई के बाद गिरफ़्तार किया गया.

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पाकिस्तान के पेशावर शहर के आर्मी पब्लिक स्कूल में 16 दिसंबर 2014 को कुछ हथियारबंद लोगों ने घुसकर गोलीबारी की थी. इस हमले में 132 बच्चों समेत 140 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

इसके बाद सेना के कमांडो ने मोर्चा संभाला. इस दौरान सभी हमलावर मारे गए. इस हमले की ज़िम्मेदारी पाकिस्तान तालिबान ने ली थी. हमले के बाद पाकिस्तान की सेना से चरमपंथियों के ख़िलाफ़ देशभर में एक अभियान शुरू किया.

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ऑस्ट्रेलिया में सिडनी के लिंट कैफ़े में एक बंदूक़धारी ने 15 दिसंबर 2014 को कुछ लोगों को बंधक बना लिया था.

क़रीब 16 घंटे तक चले कमांडो ऑपरेशन के बाद कैफ़े में बंदी बनाए गए लोगों को छुड़ा लिया गया. इस कार्रवाई में हमलावर समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी.

इस घटना में शामिल बंदूक़धारी की पहचान 49 साल के मन हारून मोनिस के रूप में हुई. ऑस्ट्रेलियाई पुलिस के मुताबिक़ ईरानी मूल के हारून मोनिस राजनीतिक शरण पर ऑस्ट्रेलिया आए थे.

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मोनिस के पूर्व वकील ने बताया था कि वह किसी संगठन से नहीं जुड़े थे, वह अकेले ही काम करते थे.

मोनिस पर विदेश में सेवा के दौरान मारे गए ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों के मां-बाप को गालियों से भरे पत्र भेजने का आरोप था.

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कनाडा की राजधानी ओटावा में 22 अक्तूबर 2014 की सुबह क़रीब दस बजे एक बंदूक़धारी वॉर मेमोरियल पर तैनात एक सुरक्षाकर्मी को गोली मारकर पास ही स्थित संसद भवन में घुस गया.

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पुलिस कार्रवाई में इस बंदूक़धारी की मौत हो गई. पुलिस ने बंदूक़धारी का नाम माइकल ज़िहाफ़ बेब्यू बताया था. वो कनाडा के नागरिक थे और धर्म बदलकर मुसलमान बने थे.

संसद के भीतर बंदूक़धारी की गोली से किसी की मौत नहीं हुई थी.

कनाडाई अधिकारियों के मुताबिक़ वो पहले से संदिग्ध थे. उनका पासपोर्ट भी ज़ब्त किया जा चुका था.

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अमरीका में टेक्सस प्रांत के फ़ोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर नौ नवंबर 2009 को एक मेजर ने गोलीबारी कर अपने 12 साथियों की हत्या कर दी. इस हमले में 31 अन्य लोग घायल हुए थे. मृतकों में एक पुलिसकर्मी भी थे. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वो घायल हो गए थे.

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अधिकारियों के मुताबिक़ इस घटना को मेजर निदाल मलिक हसन ने अंजाम दिया. हमले के लिए हसन ने दो बंदूक़ों का इस्तेमाल किया था.

हसन का जन्म अमरीका में ही हुआ था और क़रीब 40 साल की उम्र के हसन सेना में मनोचिकित्सक थे. उन्हें इराक़ में तैनात किया गया था. उन्हें कुछ दिन बाद ही वहाँ जाना था.

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