चीनः पाठ्यक्रम की किताबों में समलैंगिकता मनोरोग?

  • 16 जून 2016
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चीन में विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम की क़िताबों में समलैंगिकता को 'मनोरोग' बताए जाने को लेकर एक लेस्बियन महिला ने शिक्षा मंत्रालय के ख़िलाफ़ मुक़दमा कर दिया है.

चीनी मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, बीजिंग की अदालत ने इस महिला की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है.

गुआंगडांग की 21 वर्षीय यह महिला समलैंगिक है और लंबे समय से इस बदलाव के लिए अभियान चलाती रही हैं. महिला का उपनाम कियू बाई है.

समलैंगिकता के मामले में चीन के रुख में हाल में कुछ नरमी देखी गई है और 1997 में इसे अपराध की श्रेणी से हटाया जा चुका है.

हालांकि समलैंगिक मर्दों और औरतों के प्रति भेदभाव अभी भी जारी है.

इस सप्ताह की शुरुआत में चीनी मीडिया में ख़बर आई थी कि एक गे आदमी ने मानसिक रोगों के एक अस्पताल पर मुकदमा कर दिया है.

ख़बरों में उस व्यक्ति के हवाले से कहा गया था कि उसका 'इलाज' कराने के लिए जब उसकी पत्नी और परिजन उसे अस्पताल ले आए तो उसे नशीली दवाएं दी गईं और पीटा गया.

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2014 में कियू बाई समलैंगिकता के बारे में सूचनाएं इकट्ठा करने के लिए गुआंगझाओ के सुन यात सेन विश्वविद्यालय में किताबें खंगाल रही थीं. इस दौरान उन्हें ऐसी क़िताबें मिलीं जिनमें समलैंगिकता को 'मनोरोग' बताया गया था.

सिक्स्थ टोन वेबसाइट को उन्होंने बताया, "मैं नहीं चाहती कि ये भेदभाव स्कूल में और उन सामग्रियों में भी हों जिनका हम रोज़ इस्तेमाल करते हैं."

चीन में 2001 में ही समलैंगिकता को मानसिक रोगों की श्रेणी से हटा लिया गया है.

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