भारत ने दिल से दोस्ती की, पाक भी दिल से करे: करज़ई

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अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि 'भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के साथ दिल से दोस्ती की है और यदि पाकिस्तान भी दिल से दोस्ती करे तो अफ़ग़ानिस्तान उससे हज़ार बार दोस्ती के लिए तैयार है.'

हाल में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर तोरखम में तनाव रहा है.

लंदन में बीबीसी उर्दू सेवा के शफ़ी नकी जामेई के साथ ख़ास बातचीत में करज़ई ने अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के रिश्तों पर ख़ुल कर अपने विचार रखे हैं.

करज़ई ने कहा कि यदि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता को मानता है तो जैसे पाकिस्तान चीन, भारत, अमरीका से बातचीत करता है, उसी तरह उसे मानना चाहिए कि अफ़ग़ानिस्तान को भी यही करने का अधिकार है.

उन्होंने यहां तक कहा कि भारत ने तो अफ़ग़ानिस्तान को मालामाल कर दिया और कई क्षेत्रों में विकास के लिए उसकी मदद की है.

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पेश हैं बीबीसी से अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई की बातचीत के कुछ ख़ास अंश:

सवाल: करज़ई साहब अफ़ग़ानिस्तान, ईरान और भारत का एक जो एलाइंस बना रहा है, क्या बेहतर न होता कि इसमें तीन के बजाए चार होते और पाकिस्तान भी होता?

जवाब: खुशामदीद, बिलकुल ठीक है. बिलकुल आए, पाकिस्तान को इसमें आना चाहिए. वो अगर हो जाए तो हम खुशी से मान लेंगे, पर पाकिस्तान नहीं मानता. पाकिस्तान कहता है कि अफ़ग़ानिस्तान के भारत से कोई ताल्लुकात न हों, कोई तिजारत या ट्रेड न हो, और भारत को अफ़ग़ानिस्तान से सेंट्रल एशिया तक कोई ऐक्सेस (पहुंच) न हो. यह तो हो नहीं सकता. पाकिस्तान यह मान ले कि भारत को अफ़ग़ानिस्तान और सेंट्रल एशिया में ऐक्सेस हो, तो हम बहुत तेज़ी से पाकिस्तान के साथ मेलजोल करेंगे. और मैं संतुष्ट हूं, मुझे भरोसा है कि इसमें भारत भी खुश होगा.

सवाल: भारत की अफ़ग़ानिस्तान में भूमिका किस तरह की है? पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में भारत की भूमिका पर कई कुछ कहता है.

जवाब: होता है, होता है, बेवजह होता है. यही बात है कि हमारे दरमियान वो होता है जो हम नहीं सोचते. अगर पाकिस्तान यह मानता है कि हम एक मुस्तकिल सॉव्रेनिटी (संप्रभु ताकत) हैं...पाकिस्तान खुद भारत के साथ बातचीत करता है, दिल्ली जाते हैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, वहां के प्रधानमंत्री को पाकिस्तान आने की दावत देते हैं. खुशामदीद कहते हैं. वो जो खुद करते हैं उसे हम क्यों न करें? अगर पाकिस्तान की चीन से दोस्ती है तो हम क्यों न करें? अगर पाकिस्तान की अमरीका से दोस्ती है तो हम क्यों न करें? इसी बात पर हम बहुत नाराज़ होते हैं. ये नाराज़गी बहुत अंदरुनी नाराज़गी है. बहुत गंभीर है. अफ़ग़ानिस्तान ने अपनी आज़ादी के लिए बेशुमार कुर्बानियां दी हैं. हमने आज़ादी के लिए अंग्रेजो को नहीं माना, सोवियत यूनियन को नहीं माना. आप देखते ही हैं अमरीका के साथ क्या हो रहा.

फिर ऐसे में पाकिस्तान आए और हमें कहे कि हम भारत के साथ ताल्लुक़ात न रखें? अरे क्यों न रखें. भारत हमें पैसे देता है. भारत कोई बहुत अमीर देश नहीं है. भारत ने फ़कीर दौलत से ही अफ़ग़ानिस्तान को इतना मालामाल कर दिया, जितना किसी और ने नहीं किया. पैसा दिया पुनर्निमाण के लिए, तालीम के लिए, स्वास्थ्य के लिए. इससे अफ़ग़ानिस्तान के नौजवान शिक्षित हुए. भारत जो भी करता दिल से करता है. भारत ने हमसे दिल से दोस्ती की है. हम चाहते है कि पाकिस्तान भी हमसे भारत की तरह दिल से दोस्ती करे और हम हज़ार बार पाकिस्तान से दिल से दोस्ती करेंगे.

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