ये मस्का ईसा से भी पहले का है

  • 18 जून 2016
मक्खन का गोला इमेज कॉपीरइट CAVAN COUNTY MUSEUM

आयरलैंड में दलदल में 10 किलो मक्खन का 2000 साल पुराना एक गोला मिला है, जिसे नुमाइश के लिए रखा जाएगा.

जैक कॉनवे कीचड़ में खड़े होकर घास की कटाई का काम कर रहे थे, तभी अचानक उन्होंने देखा कि उनके सामने मक्खन का एक विशाल गोला पड़ा है.

इसे आयरलैंड के एम्लो में एक दलदल में पाने के बाद जैक ने स्थानीय म्यूज़ियम से संपर्क किया. उसके बाद म्यूज़ियम ने इस डेरी पदार्थ का विश्लेषण किया.

कैवन काउंटी म्यूज़ियम ने जैक को बताया कि बटर के 10 किलो का गोला असल में 2000 साल पुराना है.

उजले रंग का यह मक्खन ज़मीन से क़रीब 12 फ़ूट नीचे पाया गया था. सविना का कहना है, "इसके ज़मीन ने इतने अंदर पाए जाने का मतलब यह हो सकता है कि उस ज़माने में इसे भगवान को चढ़ाने के लिए धर्म या परंपरा के मुताबिक़ यहाँ गाड़ा गया होगा ताकि ज़मीन और जानवर सुरक्षित रहें."

मध्यकाल में आयरलैंड में बहुत सारी चीजों को दलदल में गाड़ा जाता था, क्योंकि ऐसे स्थान पर किसी चीज को सुरक्षित रखने के कई गुण होते थे; मसलन कम तापमान, कम ऑक्सीजन और इस स्थान का एसिडिक गुण.

इमेज कॉपीरइट CAVAN COUNTY MUSEUM

इस मक्खन को आमतौर पर लकड़ी के बक्से में होना था, लेकिन यह खुले में ही पाया गया.

म्यूज़िम मानता है कि मक्खन का खुले में होने का मतलब है कि इसे परंपरा या भगवान को भोग चढ़ाने लिए गाड़ा गया होगा और जिसने भी इसे गाड़ा होगा, उसे दोबारा इसका इस्तेमाल नहीं करना था.

लेकिन गाय से जुड़ी कोई भी चीज संपत्ति और प्रतिष्ठा की तरह महत्व रखती थी.

सविना का कहना है, "पहले मक्खन को एक विलासिता की वस्तु माना जाता था. लोग इसे खाने के इरादे से बनाते थे या फिर इसे बेचकर टैक्स या किराया चुकाते थे. इस मक्खन की महक बहुत अच्छी नहीं है यह गाढ़े पनीर की तरह महकता है. आप इसे चखकर देख सकते हैं, लेकिन हम आपको ये सलाह नहीं देंगे."

इस मक्खन को डबलिन के नेशनल म्यूज़ियम में भेज दिया गया है, जहाँ कार्बन डेटिंग से इसकी सही उम्र का पता लगाने के बाद इसे आम लोगों की नुमाइश के लिए रखा जाना है.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें, जो बीबीसी न्यूज़बिट पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार