'स्कॉटलैंड ब्रिटेन के फ़ैसले को वीटो कर सकता है'

  • 26 जून 2016
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स्कॉटलैंड की फ़र्स्ट मिनिस्टर निकोला स्टर्जन ने कहा है कि स्कॉटलैंड की संसद ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के फ़ैसले को वीटो कर सकती है.

गुरुवार को ब्रिटेन में कराए गए जनमत संग्रह में मतदाताओं ने ब्रिटेन के ईयू से बाहर निकल जाने के पक्ष में वोट दिया था.

लेकिन ब्रिटेन में स्कॉटलैंड ने ईयू में रहने के पक्ष में भारी मतदान किया था.

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इसके बाद प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने अक्तूबर तक पद से इस्तीफ़ा देने की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि नए प्रधानमंत्री की सरपरस्ती में ही इस प्रक्रिया के आगे बढ़ाया जा सकता है.

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पूरे विश्व में शेयर बाज़ार गिरे थे और पाउंड पर डॉलर के मुकाबले बुरी तरह से लड़ख़ड़ा गया था. पिछले तीन दिनों से यही ख़बर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाई हुई है.

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अब इस पूरे विवाद में एक नया मोड़ आया है क्योंकि स्कॉटलैंड की फ़र्स्ट मिनिस्टर निकोला स्टर्जन ने बीबीसी से कहा है कि उनका मानना है कि 'ब्रिटेन के ईयू से बाहर आने के लिए स्कॉटलैंड की संसद को इस बारे में अपनी रज़ामंदी देनी होगी, लेकिन वो स्कॉटलैंड के सांसदों से कहेंगी कि वो मना कर दें और अपनी रज़ामंदी न दें.'

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उनका कहना था, "मैं स्कॉटलैंड के लोगों को ईयू छोड़ने केबुरे परिणामोंसे बचाना चाहती हूँ." वो पहले ही स्कॉटलैंड की ब्रिटेन से आज़ादी के मुद्दे पर दूसरा जनमत संग्रह कराने की बात कर चुकी हैं. पिछली बार हुए आज़ादी के जनमंत संग्रह में स्कॉटलैंड के लोगों ने आज़ादी के ख़िलाफ़ मत दिया था.

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उन्होंने दोहराया है कि ब्रिटेन के ईयू छोड़ने के फैसले के बाद अब आजादी के सवाल दोबारा विचार करना ही स्कॉटलैंड के हितों की रक्षा का एकमात्र विकल्प है.

स्कॉटलैंड ने ईयू में रहने के पक्ष में भारी मतदान किया था.

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उन्होंने बीबीसी को बताया कि वो अगले कुछ दिनों में ईयू के मुख्यालयब्रसेल्समें लोगों से इस बारे में राय लेंगी कि स्कॉटलैंड के लिए क्या बेहतर है.

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