ब्रेक्सिट: सोशल मीडिया पर बढ़ी नस्ली टिप्पणियां

  • 27 जून 2016

ब्रिटेन में यूरोपीय संघ से अलग होने को लेकर हुए जनमत संग्रह के बाद सोशल मीडिया पर नस्लवादी टिप्पणियों में तेज़ी देखी जा रही है.

ट्विटर और फेसबुक पर कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जहां लोगों ने महसूस किया है कि उनके साथ भेदभाव किया गया है वो भी सिर्फ इसलिए कि वो काले हैं या फिर मूल रूप से ब्रितानी नहीं हैं.

कई लोगों ने ऐसी टिप्पणियां शेयर भी की हैं.

हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि ऐसी टिप्पणियां जनमत संग्रह से जुड़ी हैं या नहीं लेकिन शुक्रवार के बाद से ऐसी टिप्पणियां बढ़ी ज़रूर हैं.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने जनमत संग्रह के बाद पहली बार संसद में भाषण देते हुए कहा कि इस तरह की हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगे.

उन्होंने कहा, "ये हमारी मूल ज़िम्मेदारी है कि हम अपने देश को एकजुट रखें. हमने पिछले कुछ दिनों में पोलिश समुदाय के बारे में घृणा लायक ग्रफ़िटी देखी है. हमने लोगों को गालियां दिए जाते देखा है क्योंकि वो अल्पसंख्यक हैं. हमें याद रखना चाहिए कि इन लोगों ने यहां आकर इस देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है. हम घृणा के कारण की गई हिंसा और इस तरह के हमले बर्दाश्त नहीं करेंगे. ऐसी हरकते हर हालत में बंद होनी चाहिए."

बर्मिंघम यार्डले की सांसद जेस फिलिप्स ने इसे चिंता का विषय बताया और ट्वीट किया है कि वो इस मामले पर संसद में सवाल उठाएंगी.

ट्विटर पर #Postrefracism सोमवार को 21 हज़ार से अधिक बार इस्तेमाल किया गया. इस हैशटैग को इसी नाम के एक ग्रुप ने शुरु किया है और लोगों से आग्रह किया गया है कि वो नस्ली भेदभाव वाले अनुभव ट्विटर पर शेयर करें.

पूर्व में कंज़रवेटिव पार्टी की उम्मीदवार रहीं शाज़िया अवान कहती हैं कि वो वेल्स में ईयू के साथ रहने का समर्थन कर रही थीं और उन्होंने महसूस किया कि विदेशियों का विरोध करने की घटनाएं बढ़ी हैं.

उनका कहना था, ''मुझे लोगों के व्यवहार में एक अंतर दिखा पिछले कुछ दिनों में. मैं ईयू में रहने का समर्थन करते हुए एक काली महिला से बात कर रही थी. वहां से एक गोरा व्यक्ति निकला और उसने काली महिला के लिए अभद्र शब्द का इस्तेमाल किया.''

शाज़िया अवान ने जब जनमत संग्रह के बाद ये ट्वीट किया कि कंज़रवेटिव पार्टी के लिए सबसे कम चिंता का विषय फिलहाल डेविड कैमरन हैं तो उन्हें इस ट्वीट का जवाब मिला कि अपना बैग पैक करो और घर लौट जाओ.

शाज़िया का जन्म वेल्स के केरफिली में हुआ था.

शाज़िया कहती हैं कि सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए कुछ करना ही चाहिए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए