'मुझे दो साल तक ज़ंजीरों में बांधकर रखा गया'

  • 28 जून 2016
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तीन साल तक चरमपंथियों के क़ैद में रहने के वाले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे का कहना है कि अल क़ायदा उनके बदले अल ज़वाहिरी के परिवार की कुछ महिलाओं को रिहा करवाना चाहता था.

पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के बेटे हैदर अली गिलानी को अफ़गानिस्तान में अफ़गान और अमरीकी सुरक्षाकर्मियों के एक विशेष ऑपरेशन में बचाया गया था.

हैदर को साल 2013 में मुल्तान से उस वक्त अग़वा कर लिया गया था जब वो पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे.

लाहौर में अपने आवास पर उन्होंने बीबीसी उर्दू से विशेष बात की और अपनी तीन साल की क़ैद के बारे में बताया.

अली हैदर गिलानी का कहना है कि वह तीन साल तक अलक़ायदा के क़ब्जे में रहे.

उन्होंने बताया, 'अल क़ायदा मेरे बदले में अपने नेता आयमन अल ज़वाहिरी के परिवार की कैद महिलाओं की रिहाई और भारी राशि की मांग कर रहा था.'

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Image caption हैदर गिलानी के अनुसार उन्हें पिता और पूर्व प्रधानमंत्री से बदला लेने के लिए अगवा किया गया.

गिलानी ने बताया कि उनको छह लोगों ने अग़वा किया था.

वे बताते हैं, 'उन्होंने मुझे कार में डाला और इस डर से कि कोई जासूसी उपकरण मेरे कपड़ों में न हों मेरे कपड़े और जूते उतार कर फेंक दिए. उनका पहला सवाल था कि आप सुन्नी हो या शिया."

उन्होंने बताया, "मुझे फ़ैसलाबाद लाया गया. उन्होंने अपना परिचय अलक़ायदा के रूप में करवाया और कहा कि आप यूसुफ रजा गिलानी के बेटे हैं इसलिए आपको अग़वा किया गया है. अपने पिता के शासनकाल में ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ एबटाबाद हमला के अलावा दान और वज़िरिस्तान में कार्रवाई की गई. आप दुश्मन हैं हमारे!"

उन्होंने कहा, "मुझे दो साल तक जंजीरों में बांधकर रख़ा गया."

पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे ने बताया कि अपहरण के बाद उन्हें कुछ समय तक फ़ैसलाबाद में रखा गया जहां से उन्हें वज़ीरिस्तान ले जाया गया.

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Image caption अगवा होने के पहले गिलानी अपने बेटे के साथ.

अली हैदर गिलानी का कहना था, "उन्होंने मेरे साथ कभी शारीरिक हिंसा नहीं की, लेकिन मानसिक दबाव में रखते थे. ज़ंजीरों में बंधे होने के कारण मुझे शौचालय जाने में काफी दिक्क़त होती थी."

जेल के भीतर के हालात के बारे में बताते हुए अली हैदर ने कहा, "मैंने 14 महीने तक आसमान देखना नसीब नहीं हुआ. कमरे में 24 घंटे एक बल्ब जलता रहता था. मैंने एक दिन तंग आकर कहा था कि कम से कम यह बल्ब रात को तो बंद कर दो ताकि मुझे दिन और रात का पता चले."

उनके अनुसार इन परिस्थितियों में अल्लाह पर भरोसा, रिहाई का उम्मीद और धैर्य ने उनका मानसिक संतुलन बनाए रख़ा.

वे कहते हैं, "मैंने अपने कमरे की दीवार पर लिखा था 'विक्टरी कम विद पेशेन्स, जीत धैर्य से मिलती है. रोज सुबह इसे पढ़ता था."

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Image caption अमरीकी सैनिक ने कहा, "गिलानी, अब आप घर जा रहे हैं."

उनके अनुसार उन्हें इसके बाद पाकिस्तान के क़बायली क्षेत्रों से अफगानिस्तान ले जाया गया था.

जब पाकिस्तानी सेना ने दत्ता ख़ैल और शव्वाल में कार्रवाई शुरू की तो उन्हें अफ़गानिस्तान ले जाया गया. वहां ड्रोन और पाकिस्तानी वायुसेना के हमले अक्सर होते रहते थे.

गिलानी ने बताया, "जब बमबारी शुरू होती थी तो वे हमें लेकर बाहर खुले में चले जाते थे. मैंने वहां 200 गज की दूरी से जेट विमान का हमला देखा."

अली हैदर के अनुसार उनको अग़वा करने वालों की मांगे हकीकत से कोसों दूर थीं. जैसे कि अमरीकी सेना की अफगानिस्तान से पूरी वापसी, कैदियों की रिहाई और पैसों का तक़ाजा, लेकिन पैसा उनके लिए कभी मुद्दा नहीं रहा.

वे उनकी क़ैद से कैसे छूटे.

इसके बारे में उन्होंने बताया, "वो नौ मई का दिन था. संयोग से मैं बहुत दुखी था. शाम को अलक़ायदा का आदमी आया और कहा कि आज छापा होगा. नमाज़ (ईशा के बाद रात की नमाज़) के बाद वे मुझे बाहर ले गए. वे मुझे पाकिस्तान की ओर ले जा रहे थे इतना तो पता था मुझे. सीमा के पहाड़ दिखाई दे रहे थे. मेरे चप्पल भी पांव से निकल गए थे. तभी दो अमरीकी शनोक हेलीकाप्टर और शायद दो बिना आवाज़ वाले कोबरा की रोशनी हम पर पड़ी. उन लोगों ने कहा, लेट जाओ तो मैं लेट गया. फिर कहा भागो."

गिलानी के अनुसार वे ख़ुश हैं कि इन नाजुक क्षणों में उन्होंने जो फ़ैसला किया उसकी वजह से वे बच गए.

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Image caption गिलानी के घर आने की खुशी मनाता उनका छह साल का बेटा जमालुद्दीन.

उन्होंने बताया, " उन लोगों के साथ भागने की बजाय मैं दूसरी दिशा में दौड़ा. तीन चार गोलियां चलीं. मुझे विश्वास था कि मैं भी मारा जाऊँगा. बस कुछ सेकंड की दूरी ने मुझे बचा लिया. अलकायदा के अपहरणकर्ता मारे गए. अमरीकी सिपाहियों ने मुझसे पश्तो में कुछ कहा. मैं चीखा, इंग्लिश. फिर उन्होंने फिर मुझे शर्ट उतारने और हाथ ऊंचे रखने के आदेश दिए."

वे कहते हैं, "मैंने उन्हें बताया कि मैं हैदर अली गिलानी हूँ, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री का बेटा. तो वे हैरान हुए. उन्होंने मेरी आंखो पर रोशनी डालते हुए कि कि रंग तो नहीं मिलता. फिर उन्होंने अपने मुख्यालय से संपर्क किया. मिनटों में पुष्टि आ गई. तो उऩ्होंने कहा, गिलानी यू आर गोइंग होम."

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