हमलों से तुर्की की स्थिरता को कितना खतरा?

  • 29 जून 2016
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तुर्की के बड़े शहर अंकारा और इस्तांबुल कई बार घातक बम हमलों का निशाना बन चुके हैं.

ताज़ा हमला तुर्की के शहर इस्तांबुल के अतातुर्क अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ है जिसमें 13 विदेशियों समेत 40 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और 150 घायल हुए हैं.

ताज़ा हमले का वीडियोप्रत्यक्षदर्शी का बयान

तुर्की का वर्तमान संकट कितना बड़ा है? तुर्की के अंकारा और इस्तांबुल शहरों पर लगातार हो रहे हमलों से जाहिर है कि यह देश कई तरफ से निशाना बन रहा है.

कुछ दिन पहले ही इस्तांबुल में कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी यानी पीकेके ने सुरक्षा बलों की एक कार में धमाका किया था. लेकिन इस्तांबुल में चरमपंथी संगठन आईएस भी सक्रिय है.

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एक आत्मघाती हमलावर ने मार्च में तीन इसराइलियों और एक ईरानी टूरिस्ट की हत्या कर दी थी.

जनवरी में भी 12 जर्मन पर्यटक उस वक़्त मारे गए थे जब आईएस के एक हमलावर ने ख़ुद को इस्तांबुल के सुल्तानेहमत पर्यटन क्षेत्र में उड़ा लिया था.

तुर्की के चरमपंथी संगठन टीएके ने कहा था कि 13 मार्च को अंकारा में हुए कार धमाके में उसका हाथ था. इस हमले में 35 लोग मारे गए थे.

वहीं 17 फ़रवरी को अंकारा में ही हुए एक हमले में 29 लोग मारे गए थे. इस हमले की ज़िम्मेदारी भी टीएके ने ली थी.

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यही नहीं, अक्तूबर 2015 में अंकारा रेलवे स्टेशन पर हुए हमले में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

इस हमले के लिए आईएस को ज़िम्मेदार ठहराया गया था. यह हमला तुर्की के राष्ट्रीय ख़ुफिया संगठन के मुख्यालय के क़रीब हुआ था.

हाल फिलहाल के हमलों को छोड़ भी दें, तो तुर्की में ऐसी जितनी घटनाएँ हुई हैं, वो देश के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी कुर्द इलाक़ो में हुई हैं.

वहां पीकेके के ख़िलाफ़ तुर्की सेना कई दशकों से संघर्ष कर रही है.

आज तुर्की दो मोर्चों पर संघर्ष में फंसा हुआ है. पहला तुर्की के अंदर और दूसरा सीरिया की सीमा पर.

पीकेके के साथ सरकार के दो साल के युद्ध विराम ने तुर्की और कुर्द विद्रोहियों के बीच झगड़े पर जैसे एक चादर डाल दी थी.

लेकिन यह युद्ध विराम जुलाई 2015 में ख़त्म हो गया, जब 32 साल के एक युवा वामपंथी कुर्द को दक्षिण-पूर्वी सुरुक शहर में एक बम हमले में मार दिया गया.

जिन लोगों को वहाँ आईएस हमलावरों ने निशाना बनाया, उन्होंने उत्तर सीरिया की ओर जाकर आईएस के हाथों तबाह किए गए शहर कोबान को फिर से बसाने में मदद की योजना बनाई.

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इसका सीधा मतलब था कि सीरिया का संकट तुर्की तक पहुँच चुका है.

पीकेके के इस आरोप के बाद कि तुर्की आईएस लड़ाकों की मदद से सीरिया और इराक़ में कुर्द चरमपंथियों को रोकने की कोशिश कर रहा है, तुर्की में चरमपंथी हमलों और उन्हें रोकने के लिए सेना के साथ एक बड़ी लड़ाई शुरू हो गई.

तुर्की ने उसके बाद दक्षिण-पूर्व के कई शहरों और इलाक़ों में कुर्द चरमपंथियों का सामना करने के लिए कर्फ्यू भी लगाया.

तुर्की और पीकेके युद्ध विराम के पहले यानी 2013 की स्थिति में पहुँच गए.

पीकेके के नेता ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन पर आईएस को बचाने का आरोप भी लगाया.

बीबीसी को अप्रैल में दिए एक इंटरव्यू में पीकेके नेता सेमिल बाइक ने कहा था आम नागरिकों पर होने वाले हमलों को वो ग़लत मानते हैं.

उन्होंने कहा था, "सेना पर हमला किया जा सकता है क्योंकि यह एक युद्ध है और हम भी लड़ाई कर रहे हैं."

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