पूरे वेतन के साथ 'पैटरनिटी लीव' का मज़ा

  • 2 जुलाई 2016
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आयरलैंड में नए-नए पिता बनने वालों को इस साल सितंबर से दो हफ़्ते की 'पैटरनिटी लीव' मिलेगी. छुट्टी के दौरान उनका वेतन भी नहीं कटेगा.

इस फ़ैसले के बाद आयरलैंड उन देशों की जमात में शामिल हो गया है जो पिता बनने वालों को 'पेड लीव' देते हैं.

ब्रिटेन, स्पेन, पोलैंड, वेनेज़ुएला, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया भी पिता बनने वालों को तनख़्वाह के साथ छुट्टी देते हैं.

वैसे यूरोप के कई देश हैं जो पिता बनने वालों को तनख़्वाह के साथ एक महीने की छुट्टी देते हैं.

आयरलैंड में अगर कोई पिता बनता है और उसका ख़ुद का रोज़गार है तो भी उन्हें सरकार की तरफ़ से हर हफ़्ते 230 यूरो या 258 डॉलर मिलेंगे.

दुनिया में सिर्फ़ दो ऐसे देश हैं जो मां बनने वाली महिलाओं को 'पेड लीव' नहीं देते. ये देश हैं अमरीका और पापुआ न्यू गिनी.

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लेकिन, दुनिया में ऐसे बहुत से देश हैं जो अपने नागरिकों के पिता बनने की सूरत में उन्हें तनख़्वाह के साथ छुट्टी नहीं देते.

तो, पिता बनने की सूरत में ऐसे देशों के लोगों को छुट्टी लेनी पड़ती है. कई बार तो छुट्टी के लिए उनकी तनख़्वाह काट ली जाती है.

ऐसे हालात में बहुत कम लोग ही पिता बनने पर दो हफ़्ते से ज़्यादा छुट्टी लेते हैं.

बरसों से दफ़्तरों में महिलाओं की तादाद बढ़ाने के लिए उन्हें मैटरनिटी लीव देने पर ज़ोर रहा है.

लेकिन जानकार कहते हैं कि ये सोच इकतरफ़ा है. ज़रूरी है कि पूरे परिवार की आमदनी बढ़ाने पर ज़ोर दिया जाना चाहिए.

इसमें पिता बनने वालों को 'पेड लीव' देने का सुझाव भी शामिल है.

ऐसे कई कारण हैं जिनके चलते ये माना जा रहा है कि पिता बनने वालों को तनख़्वाह के साथ छुट्टी देना, समाज के लिए फ़ायदेमंद हो सकता है.

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कई तजुर्बों से ऐसा लगता है कि पिता बनने पर 'पेड लीव' देने पर मां की आमदनी बढ़ती है.

औरतों को मैटरनिटी लीव देने के नाम पर उनके साथ जो भेदभाव होता है, वो बाप बनने वालों को छुट्टी देने पर कम होगा.

स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड और डेनमार्क जैसे देशों में ऐसा होता देखा गया है.

स्वीडन में हुए एक सर्वे के मुताबिक़, अगर पिता ने एक महीने की पैटरनिटी लीव ली है, तो मां की तनख़्वाह में सालाना औसतन 7 फ़ीसद का इज़ाफ़ा हुआ है.

ऐसा करके स्वीडन, औरतों-मर्दों को बराबर हक़ देने के मामले में चौथी पायदान पर पहुंच गया है.

इसके लिए ज़रूरी है कि नौकरी देने वाली कंपनियों का रवैया भी बदले.

ब्रिटेन में हुए एक सर्वे के मुताबिक़ अगर पिता बनने पर लोग छुट्टी लेकर बच्चों की देखभाल करते हैं, तो मांओं के सीनियर ओहदे पर पहुंचने की उम्मीद बढ़ जाती है.

उनकी आमदनी भी बढ़ती है. लेकिन, पिता के छुट्टी लेने के ख़्याल पर ही लोगों को ऐतराज़ है.

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पेड पैटरनिटी लीव होने की सूरत में, बच्चों के लालन-पालन में पिता भी काफ़ी दिलचस्पी लेते हैं.

स्वीडन में हुए एक सर्वे में पता चला था कि पैटरनिटी लीव लेने वाले मर्द, 12 साल की उम्र तक अपने बच्चों को पालने में बड़ी ज़िम्मेदारी निभाते हैं.

इस दौरान मांओं को अपने करियर पर ध्यान देने का मौक़ा मिला.

पैटरनिटी लीव लेने वाले लोग, अपने बच्चों को पालने में हमेशा बड़ा रोल निभाते हैं.

जैसे कि ब्रिटेन में लंबी छुट्टी लेने वाले लोगों में से 25 फ़ीसद ऐसे थे जो अपने बच्चों की नैपी बदलने का काम करते थे.

इससे भी बड़ी तादाद उन लोगों की थी जो अपने बच्चों को दूध पिलाते थे. ख़ास तौर से रात में जागकर वो अपने बच्चों का ख़्याल रखते थे.

बच्चों के लालन-पालन की ज़िम्मेदारी पिता के संभालने का सबसे बड़ा फ़ायदा महिलाओं को होता है.

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उनकी सेहत बेहतर होती है. वो मां बनने के बाद जल्दी काम पर लौट सकीं. अपने करियर पर ध्यान दे सकीं.

बच्चे होने के बाद मांएं काफ़ी तनाव में रहती हैं. मगर जब उनकी ज़िम्मेदारी का बोझ, पिता साझा कर लेते हैं तो ये तनाव भी कम होता है.

कई देश ऐसे भी हैं जो पिता बनने पर पैटरनिटी लीव लेने वालों को बोनस देते हैं.

जर्मनी में ऐसा ही होता है. यहां बच्चा होने पर मां-बाप दोनों को 12 से 14 महीने तक की छुट्टी मिलती है.

हालांकि अधिकांश मामलों में मांएं ही ज़्यादा छुट्टी लेती हैं.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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