ढाका: 'सुरक्षित क्षेत्र में आईएस के हमले से खुली पोल'

  • 3 जुलाई 2016
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बांग्लादेश की राजधानी ढाका की होली आर्टिसन बेकरी पर दुस्साहसी हमले का समय, निशाना और संदेश ज़ोरदार और साफ़ था.

इस्लामी चरमपंथियों ने रमज़ान महीने के आखिरी दिनों में मुसलमानों के धार्मिक त्यौहार ईद से पहले ये हमला किया. निशाना भी उस कैफ़े को बनाया गया जो विदेशियों और मध्यम वर्ग के बांग्लादेशियों के बीच ख़ासा लोकप्रिय है. वहाँ उस समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

उच्च सुरक्षा वाले गुलशन ज़िले को ढाका के सबसे सुरक्षित इलाकों में माना जाता है. इसके आस-पास कई दूतावास और गैर सरकारी संगठनों के कार्यालय हैं और सैकड़ों की संख्या में विदेशी और अमीर बांग्लादेशी भी यहाँ रहते हैं.

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2015 में संदिग्ध चरमपंथियों ने इस इलाके में इटली के एक कर्मचारी के हत्या कर दी थी, इसके बाद इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई थी. सुरक्षा नाके से गुजरे बिना गुलशन इलाके से गुजरना बेहद मुश्किल है, लेकिन इस हमले ने दिखा दिया है कि गुलशन क्षेत्र भी सुरक्षित नहीं है.

पिछले तीन सालों से संदिग्ध इस्लामी चरमपंथियों ने 40 से अधिक लोगों की हत्या की है. लेकिन अब तक हमले हिंदू पुजारियों, ईसाई दुकानदारों, ब्लॉगरों, कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और धार्मिक अल्पसंख्यक सदस्यों को निशाना बनाकर किए जाते थे.

पढ़ें: बांग्लादेश: अल्पसंख्यक और उदारवादी निशाने पर

कैफ़े पर हमला सुनियोजित और संगठित लगता है.

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चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है, हालाँकि बांग्लादेश की सरकार पहले भी वहाँ तथाकथित आईएस की मौजूदगी से इनकार करती रही है. लेकिन इस सुनियोजित हमले ने इस चिंता को बढ़ा दिया है ये चरमपंथी संगठन शायद बांग्लादेश में अपनी जड़ें जमा रहा है.

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विशेषज्ञ सरकार को समय-समय पर बढ़ते कट्टरपंथ और उदारवादियों पर हो रहे हमलों पर चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन सरकार इन्हें छिटपुट घटनाएं बताकर टालती रही है.

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बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के महासचिव राना दासगुप्ता कहते हैं, “बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, पर हमलों की घटनाओं के बाद हिंदू, बौद्ध और ईसाई असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.”

वो कहते हैं, “कट्टरपंथी ताक़तें हमें देश से बाहर निकालने की कोशिशें कर रही हैं, लेकिन सरकार ने आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कुछ कदम उठाए हैं और हमारी प्रधानमंत्री शेख हसीना आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”

आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के बांग्लादेश के प्रयासों की अमरीका और भारत ने निंदा की है. एक दशक पहले, बांग्लादेश कट्टरपंथी हिंसा के शिकंजे में थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकारों ख़ासकर मौजूदा अवामी लीग की सरकार ने इस्लामी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाए हैं.

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सरकार ने पश्चिमी देशों के साथ मिलकर आतंकवाद निरोधी कदम उठाए हैं, लेकिन कट्टरपंथ संबंधी हिंसा की घटनाएं फिर से बढ़ी हैं.

लेकिन मौजूदा हमले ने दिखाया है कि सरकार चरमपंथियों के मंसूबों से अनजान थी और कैफ़े पर हमले ने सरकारी ख़ुफ़िया तंत्र की भी पोल खोल दी है.

नतीजतन चिंता जताई जा रही है कि अगर सरकार ने अपनी गलतियों से सबक नहीं सीखा तो पटरी पर लौटती बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था फिर से न डगमगा जाए और देश अस्थिरता के भंवर में न फंस जाए.

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