इराक़ युद्ध ग़ैरक़ानूनी था: पूर्व ब्रितानी डिप्टी पीएम

  • 10 जुलाई 2016
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ब्रिटेन के पूर्व उप प्रधानमंत्री जॉन प्रसेकोट ने कहा है कि इराक़ पर 2003 में अमरीका और ब्रिटेन की फौजों का हमला 'ग़ैरक़ानूनी' था.

जब ये हमला हुआ तो प्रेसकोट उप प्रधानमंत्री थे.

ब्रितानी अखाबार 'संडे मिरर' में उन्होंने लिखा कि वो वह तमाम उम्र इस 'विनाशकारी फैसले' के साथ जीएंगे.

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ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने अपनी इस ग़लती के लिए माफी मांगी है लेकिन उन्होंने कहा कि वह युद्ध के फैसले के अब भी साथ हैं.

प्रेसकॉट ने कहा कि बहुत दुख और ग़ुस्से के साथ वह संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान की इस बात से सहमत हैं कि युद्ध 'अवैध' था.

उन्होंने कहा कि वो मार्च 2003 में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को भेजे गए पूर्व प्रधानमंत्री ब्येलर के संदेश में इस बयान को बहुत ही ख़तरनाक मानते हैं कि 'चाहे जो हो मैं आपके साथ हूं.'

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प्रेसकॉट ने कहा कि कोई दिन ऐसा नहीं गुजरता जब वो युद्ध में जाने के फैसले के बारे में ना सोचते हो, इस युद्ध में जान गंवाने वाले या घायल हुए ब्रितानी सैनिकों के बारे में न सोचते हों, सद्दाम हुसैन को हटाने के नाम पर हुए इस युद्ध में मारे गए 175000 आम लोगों के बारे में न सोचते हों.

प्रेसकोट ने इराक़ युद्ध के लिए माफ़ी मांगी है, ख़ासकर ब्रितानी सैनिकों के परिवारों से.

उनका कहना है कि इराक़ युद्ध में शामिल होने के फ़ैसले की जांच के लिए बनी चिलकॉट जांच समिति की रिपोर्ट में विस्तार से इस बारे में बताया है कि क्या ग़लत हुआ और इससे सबक लेने की जरूरत है.

रिपोर्ट के मुताबिक इराक़ पर अन्य विकल्पों को आज़माए बिना ही हमला कर दिया गया था.

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