नेपाल सरकार संकट में, माओवादी पीछे हटे

  • 12 जुलाई 2016
ओली

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली के नेतृत्व वाली सरकार से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के समर्थन वापस लेने के साथ वहाँ राजनीतिक संकट पैदा हो गया है.

बीबीसी नेपाली सेवा के शरद केसी ने बताया है कि माओवादी नेताओं ने ओली सरकार पर पिछले समझौतों को लागू न करने का आरोप लगाया है.

सीपीएन माओवादी पार्टी के अध्यक्ष प्रचण्ड ने मंगलवार को समर्थन वापसी की घोषणा की है.

उनका आरोप है कि ओली की पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूएमएल) दोनों पार्टियों के बीच तय हुए नौ बिंदुओं वाले समझौते को लागू करने और मई में सरकार का मुखिया बदलने के फ़ैसले को लागू करने में हिचक रही थी.

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एक महीना पहले प्रचंड ने ओली सरकार से अचानक समर्थन वापसी की घोषणा की थी लेकिन 24 घंटे के अंदर ही एक नाटकीय घटनाक्रम में वो अपने फैसले से पलट गए थे.

बीबीसी नेपाली सेवा के शरद केसी ने बताया कि सीपीएन माओवादी के महासचिव कृष्ण बहादुर महरा के मुताबिक समर्थन वापसी के बावत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सभापति को सूचना दे दी गई है.

महरा ने संकेत दिया है कि नेपाली कांग्रेस की ओर से माओवादी पार्टी को समर्थन पत्र हासिल हो गया है.

असल में ओली की सरकार बहुमत वाली सरकार थी और माओवादी पार्टी का कहना था कि एक सर्व सहमति वाली राष्ट्रीय एकता सरकार बनाई जानी चाहिए.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने प्रचंड के हवाले से कहा है, "हमारी पार्टी इस बात की ज़रूरत महसूस कर रही है कि नए संविधन को लागू करने, बाकी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने, मधेशी, जनजातियों और थारू समुदाय द्वार उठाए गए मुद्दों का हल निकालने के लिए एक राष्ट्रीय समहति होनी चाहिए."

बीते मई महीने में प्रधानमंत्री ओली और माओवादी पार्टी के मुखिया प्रचंड के बीच एक समझौता हुआ था कि बजट पास होने के बाद प्रधानमंत्री का पद प्रचंड को सौंप दिया जाएगा.

लेकिन प्रधानमंत्री ओली ने इसे अनसुना कर दिया और इस बात पर अड़े रहे कि जबतक नया चुनाव नहीं हो जाता वो पद पर बने रहेंगे.

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