नौकरी के साथ 'साइड बिजनेस' बहुत आसान है

  • 12 जुलाई 2016
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दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो अपनी नौकरी के साथ-साथ कुछ और काम करते हैं.

कुछ लोग इसे फ्रीलांसिंग कहते हैं, कुछ लोग साइड बिज़नेस. अब ये जो भी है, उसका चलन तेज़ी से बढ़ रहा है.

अमरीका में नौकरी करने वालों में से 12 फ़ीसद ऐसे हैं जो साथ में और भी काम करते हैं.

वहीं ब्रिटेन में ऐसे लोगों की तादाद क़रीब बीस लाख है.

यूरोप में नौकरी के साथ दूसरा काम करने वालों की तादाद सालाना पैंतालीस फ़ीसद की रफ़्तार से बढ़ रही है.

साफ़ है कि नौकरी के साथ कुछ और करने की कोशिश करने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है.

अपने आस-पास ऐसे लोगों को देखकर आपका भी दिल करता होगा, कुछ और काम शुरू करने का.

अगर आप ऐसा सोच रहे हैं, तो हम आपको इस बारे में कुछ मशविरे दे सकते हैं.

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पहली बात तो ये कि जो भी काम आप शुरू करना चाह रहे हैं उसकी अच्छी समझ होनी चाहिए.

मगर उससे भी पहले ज़रूरी ये है कि आपके अंदर वो काम करने की भरपूर ललक होनी चाहिए.

दूसरी बात ये कि आपको एक साथ कई काम करना आना चाहिए.

आपका मल्टीटास्किंग होना ज़रूरी है, वरना नौकरी के साथ कोई धंधा करने का इरादा आपके करियर को भी चौपट कर सकता है.

तीसरी और सबसे अहम बात है कि आपके पास इस नए काम के लिए वक़्त होना चाहिए. वरना सिर्फ़ इरादों से काम नहीं चलने वाला.

नौकरी के साथ नया काम शुरू करने से पहले ख़ुद से सवाल कीजिए कि आप ये काम क्यों शुरू करना चाहते हैं?

क्या आप ये काम पैसों के लिए करना चाहते हैं? या फिर आपके अंदर ये नया काम करने का जोश और ललक है.

क्या आप इस काम को शुरू करके आगे चलकर पूरी तरह कारोबारी बनना चाहते हैं? नौकरी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं?

इन सवालों के सही जवाब मिल जाएं तो आपको नया काम शुरू करने में आसानी होगी.

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जो भी काम आप शुरू करना चाहते हैं उसमें वक़्त लगना तय है.

जैसे कि आप नई वेबसाइट शुरू करना चाहते हैं तो रजिस्ट्रेशन से लेकर डिज़ाइनिंग और लॉन्च तक ढेर सारे काम होते हैं.

बेहतर होगा नुक़सान उठाने से पहले आप बीमा करा लें.

इसी तरह दूसरे कामों में भी वक़्त और पैसे लगेंगे. तो अपनी प्लानिंग में इन सब बातों का ख़्याल रखें.

बाज़ार में उतारने के लिए कोई नया उत्पाद बनाना है तो उसकी मांग, उसके बाज़ार, उसमें नई ख़ूबियों की ज़रूरत के बारे में ख़ूब सोच विचार कर लें.

फिर उसकी सही क़ीमत के बारे में भी फ़ैसला लेना ज़रूरी है.

उस उत्पाद की मार्केटिंग कैसे करेंगे, ये देख लेना सबसे ज़रूरी है. क्योंकि प्रोडक्ट बनाना आसान है.

उसे बेचने के लिए ख़रीदार तलाशना सबसे मुश्किल काम है.

अगर आपके उत्पाद के लिए बाज़ार नहीं है, तो उसे बनाना बेकार होगा.

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जब ख़रीदार नहीं होंगे, तो, आपका वक़्त, आपकी मेहनत और आपके पैसे, सब बेकार जाएंगे.

नए प्रोडक्ट पर आप प्री-सेल या प्री-ऑर्डर के ऑफर से अपने उत्पाद के लिए संभावनाएं तलाश सकते हैं.

आपकी बनाई चीज़ों के ग्राहकों के बारे में आपको अच्छे से पता होना चाहिए.

सिर्फ़ ये कहना कि आप 35 से 55 साल की उम्र के लोगों को टारगेट करेंगे, कम होगा.

अपने टारगेट की सही पहचान कीजिए. भले ही वो कोई एक शख़्स ही क्यों न हो. उसकी ज़रूरतों के बारे में सही समझ होनी चाहिए.

नया काम शुरू करने से पहले आप अपनी नौकरी की शर्तें देख लें.

हो सकता है कि नौकरी की कुछ शर्तें ऐसी हों, जो आपके नया काम शुरू करने में अड़ंगा डालें.

इस बारे में जानकारी न होने पर आपकी नौकरी पर भी मुसीबत आ सकती है. बेहतर होगा, इसकी पड़ताल कर लें.

नये काम में आपका एकमात्र फ़ोकस अपने उत्पाद के लिए ग्राहक और बाज़ार तलाशना होना चाहिए.

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बाक़ी चीज़ें ख़ुद ब ख़ुद हो जाएंगी. पहले से ही इस बात की फ़िक्र करना कि आप काम किससे करवाएंगे, कर्मचारियों की तनख़्वाह का हिसाब कैसे रखेंगे? तो आप परेशान हो जाएंगे.

बेहतर होगा कि पहले काम जुटाएं. क्योंकि अगर प्रोडक्ट के लिए ग्राहक ही नहीं होंगे, तो बाक़ी चीज़ों की ज़रूरत ही नहीं होगी.

नौकरी के साथ नया काम करने के लिए टाइम मैनेजमेंट में सावधानी बरतना ज़रूरी है.

अपने वक़्त को इस तरह अपने और दफ़्तर के काम में बांटिए कि दोनों को नुक़सान न हो.

अपने टारगेट ऐसे तय कीजिए कि आपको कूवत से ज़्यादा मेहनत न करनी पड़े. वरना पहले ही मोर्चे पर मात मिल सकती है.

और सबसे ज़रूरी बात, आपका नया काम चल निकले, आपके उत्पाद की मांग ख़ूब हो जाए, तो ये देख लें कि इस काम के साथ आपकी नौकरी चल सकती है कि नहीं.

अगर काम इतना मिल रहा है कि नौकरी की ज़रूरत नहीं, तो आप अपने इस काम पर ध्यान दीजिए.

अगर नौकरी की अभी भी आपको ज़रूरत है, तो दोनों के बीच तालमेल बनाए रखने पर ज़ोर रहना चाहिए.

आमदनी बढ़ेगी तो टैक्स भी बढ़ेगा. आपको मालूम होना चाहिए कि आपकी पाई-पाई पर इनकम टैक्स वालों की नज़र होती है.

इसलिए ज़रूरी है कि आपको अपनी इस नई आमदनी पर लगने वाले टैक्स की जानकारी हो.

वक़्त पर टैक्स भरना आपकी ज़िम्मेदारी है. उससे बचने की कोशिश आपके लिए नई मुसीबत खड़ी कर सकती है.

सबसे ज़रूरी है कि नए काम से शुरू में ही ज़्यादा उम्मीदें न पालिए. कोई भी नया कारोबार, जमने में वक़्त लेता है.

उसको उतना वक़्त दीजिए. रातों-रात कामयाबी के ख़्वाब देखना नुक़सानदेह हो सकता है.

कोई भी नया काम, सिर्फ़ पैसे के लिए नहीं होता. आप ज़िंदगी में कुछ नया करना चाहते हैं. नया सीखना चाहते हैं.

साथ में पैसे आने लगें तो और भी अच्छी बात. कहने का मतलब ये कि नया काम, ज़िंदगी का नया तज़ुर्बा है.

इसको मौज-मस्ती के साथ कीजिए. ज़्यादा तनाव लेंगे तो काम भी सही नहीं होगा और मक़सद भी पूरा नहीं होगा.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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