कश्मीर के प्रदर्शनों को जनमत संग्रह मानें: सलाहुद्दीन

  • 13 जुलाई 2016
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भारत प्रशासित कश्मीर में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों की कार्रवाई के विरोध में बुधवार को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में लोग सड़कों पर उतरे.

इस मार्च में मुत्तेहिदा जिहाद काउंसिल के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन ने एलान किया कि 'हिंदुस्तान से कश्मीर की आज़ादी सिर्फ़ बंदूक के ज़रिए मुमकिन हो सकती है.'

कश्मीर घाटी में पिछले दिनों हिज़्बुल मुजाहिदीन के चरमपंथी बुरहान वानी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद हुए व्यापक प्रदर्शनों में 32 लोगों की मौत हुई है.

इसके विरोध में पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुजफ़्फ़राबाद में निकले मार्च में हिज़्बुल मुजाहिदीन के सैकड़ों सदस्यों के अलावा आम लोगों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया.

बीस से ज़्यादा चरमपंथी गुटों के संगठन मुत्तेहिदा जिहाद काउंसिल के प्रमुख के अलावा कई और गुटों के मुखिया इस मार्च में मौजूद थे.

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इस मौके पर सैयद सलाहुद्दीन ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र अपना दोहरा रवैया छोड़े और कश्मीर में जारी विरोध को हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ जनमत संग्रह माने वरना कोई भी ताक़त दक्षिणी एशिया समेत दुनिया की शांति को तबाह होने से नहीं रोक सकती है."

सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सरकार की भी जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की संसद के सदनों का सत्र बुलाकर भारत के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित किया जाए.

ये मार्च 13 जुलाई को 'कश्मीरी शहादत दिवस' के मौक़े पर आयोजित किया गया. इसी दिन 1931 में डोगरा राजा के आदेश पर हुई कार्रवाई में 22 निहत्थे कश्मीरी मुसलमानों की मौत हो गई थी.

इसी की याद में 13 जुलाई को 'कश्मीरी शहादत दिवस' मनाया जाता है.

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