पोकेमॉन गो की कामयाबी की मनोवैज्ञानिक वजह

  • 14 जुलाई 2016
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पूरी दुनिया में इस वक़्त 'पोकेमॉन गो' नाम के वीडियो गेम की धूम मची है.

ये गेम पहले ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में लॉन्च किया गया.

वहां इसे इतनी कामयाबी मिली कि पूछिए मत. फिर अमरीका में भी इसी वीडियो गेम को हाथों-हाथ लिया गया.

कई यूरोपीय देशों में भी इसे लॉन्च करने की तैयारी है. लेकिन उससे पहले ही इसकी शोहरत वहां पहुंच चुकी है.

लाखों लोगों ने कोई न कोई जुगत लगाकर इसे अपने मोबाइल पर डाउनलोड कर लिया है.

ब्रिटेन के रहने वाले जॉन नॉरिस को ही लीजिए. उन्होंने 'पोकेमॉन गो' को अपने मोबाइल पर अपलोड कर लिया है.

जबकि ये गेम अभी ब्रिटेन में लॉन्च नहीं हुआ है. नॉरिस का कहना है कि अमरीका में उनके बहुत सारे दोस्त 'पोकेमॉन गो' के पीछे दीवानों की तरह पड़े हुए हैं.

इसी वजह से उन्होंने भी सोचा कि चलों देखें आख़िर 'पोकेमॉन गो' है क्या बला!

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'पोकेमॉन गो' को लेकर ये दीवानगी उस वक़्त है, जब इसे बनाने वालों की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं.

कहा जा रहा है कि ये लोगों की निजता में दखल दे रहा है.

जब आप इसे मोबाइल पर डालते हैं तो ये आपके ई-मेल से लेकर आपकी इंटरनेट सर्च हिस्ट्री तक सब में अपने दखल की इजाज़त मांगता है.

तो, फिर क्यों 'पोकेमॉन गो' के इतने दीवाने हो गए हैं लोग?

ऑक्सफ़ोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट के मनोवैज्ञानिक एंड्र्यू प्राइज़बिलिस्की ने वीडियो गेम्स की कामयाबी की वजह जानने के लिए अच्छी ख़ासी रिसर्च की है.

वो कहते हैं कि किसी गेम की शोहरत की कई वजहें होती हैं.

इनमें सबसे पहली वजह तो आसानी से उपलब्धता है. दूसरी वजह है तकनीकी रूप से आसान होना.

किसी गेम की कामयाबी के लिए तीसरी ज़रूरत ये है कि इसे खेलने वाले दूसरे खिलाड़ियों से किस हद तक जुड़ पाते हैं?

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'पोकेमॉन गो' की सबसे बड़ी ख़ूबी इसका तकनीकी रूप से बेहद आसान होना है.

आज दुनिया भर में लोग स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल कर रहे हैं और ये गेम फ़ोन पर उपलब्ध है.

दूसरी बात, ये लोगों के फ़ोन में मौजूद जीपीएस सिस्टम का इस्तेमाल करता है. वो भी आसानी से लोगों के पास मौजूद होता है.

पुराने गेम जैसे स्नेक या एंग्री बर्ड की कामयाबी के पीछे भी बड़ी वजह यही थी कि वो तकनीकी रूप से पेचीदा नहीं थे.

खिलाड़ियों के लिए उन्हें समझना आसान था. जॉन नॉरिस भी मानते हैं कि 'पोकेमॉन गो' आसान वीडियो गेम है.

'पोकेमॉन गो' की कामयाबी की दूसरी बड़ी वजह ये है कि ये पुरानी यादें ताज़ा करता है.

पोकेमॉन सीरीज़ के पुराने वीडियो गेम्स की याद दिलाता है. ये गेम नब्बे के दशक में आए थे.

'पोकेमॉन गो' की ज़्यादा चर्चा भी लोगों को पुराने गेम्स और पुराने दिनों की याद दिलाती है.

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इन्हें ताज़ा करने के लिए ये 'पोकेमॉन गो' गेम खेलना चाहते हैं.

वैसे मनोवैज्ञानिक एंड्र्यू कहते हैं कि पुरानी यादें ताज़ा करने के साथ ज़रूरी है कि कोई भी वीडियो गेम मौज मस्ती की नई बातें अपने साथ लेकर आए.

'पोकेमॉन गो' ये करने में भी कामयाब रहा है.

ऐसा होने के लिए ज़रूरी है कि वीडियो गेम में खिलाड़ियों को आत्मविश्वास महसूस होता है.

ये खेल उन्हें दूसरे लोगों से जुड़ने का मौक़ा भी देता है.

ये गेम नया-नया खेलना शुरू करने वाले नॉरिस, एंड्र्यू की बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं.

वो कहते हैं कि 'पोकेमॉन गो' उन्हें अपने शहर ब्राइटन में घूमने का मौक़ा देता है. नई चीज़ों की खोज का मौक़ा देता है.

नॉरिस कहते हैं कि 'पोकेमॉन गो' खेलने की वजह से ही उन्हें अपने शहर की कुछ ख़ासियत का भी पता चला.

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असल में 'पोकेमॉन गो' खेलने के दौरान, खिलाड़ियों को पोकेमॉन को तलाश कर पकड़ना होता है.

इसके लिए आपको अपने इलाक़े में उसकी तलाश करनी होती है.

उसकी तलाश में लोगों को अपने शहर के अनजाने हिस्सों में जाने का मौक़ा भी मिलता है.

'पोकेमॉन गो' की शोहरत की ये भी बड़ी वजह है. रात में गेम खेलते वक़्त अपने शहर को नए सिरे से देखना लोगों के लिए एकदम नया तजुर्बा है.

2013 में बर्तानवी लेखक चार्ली ब्रुकर ने अपने 25 पसंदीदा वीडियो गेम्स में ट्विटर की भी गिनती की थी.

लोगों ने सवाल उठाया कि ट्विटर कैसे वीडियो गेम हो गया.

इसके जवाब में चार्ली ने बताया कि इसमें भी लोग वीडियो-फोटो और ग्राफिक्स अपलोड कर सकते हैं.

इसमें भी आपको खेल खेलने और कई बार जीतने का एहसास होता है.

जब आपके फॉलोअर्स की तादाद बढ़ती है या आपके किसी ट्वीट को ज़्यादा लोग पसंद करते हैं.

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तो, चार्ली के मुताबिक़ ट्विटर भी एक वीडियो गेम ही हुआ.

'पोकेमॉन गो' भी लोगों को सोशल नेटवर्किंग का मौक़ा देता है.

लोग इसे खेलते ही नहीं हैं, इसके बारे में ज़ोर-शोर से तमाम सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर चर्चा भी करते हैं.

मनोवैज्ञानिक अब ये बात समझने में लगे हैं कि आख़िर सोशल नेटवर्किंग साइट्स में लोग इतनी दिलचस्पी क्यों लेते हैं? उन्हें सोशल नेटवर्किंग में इतना मज़ा क्यों आता है?

इसके जो कुछ जवाब मिले हैं, उनके मुताबिक़, सोशल नेटवर्क पर लोग अपने से जुड़े तमाम तजुर्बे करते हैं.

ऑनलाइन होने पर उन्हें तमाम नए लोगों से मिलने का, बातें करने का मौक़ा मिलता है.

अपनी ज़िंदगी के क़िस्से लोगों से बांटकर उन्हें ख़ुशी होती है.

एंड्र्यू प्राइजबिलेस्की मानते हैं कि 'पोकेमॉन गो', सोशल नेटवर्किंग के ज़माने का ही खेल है.

इसीलिए इसमें लोग काफ़ी दिलचस्पी ले रहे हैं. इसके बारे में बातें कर रहे हैं. गेम खेलने के साथ ही उन्हें सोशल नेटवर्किंग का भी तजुर्बा मिल रहा है.

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फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग कहते हैं कि सोशल नेटवर्किंग वो है जिसमें हम बिना काट-छांट, बिना किसी रोक-टोक के अपनी बात कह सकें, लोगों से साझा कर सकें.

'पोकेमॉन गो' इस शर्त को पूरा करता है.

अब ये बात और है कि कब तक लोगों की दिलचस्पी इस गेम में बनी रहती है. अभी तो ये नया है. दुनिया के एक बड़े हिस्से तक पहुंचा ही नहीं है.

भविष्य चाहे जो भी हो, फिलहाल तो 'पोकेमॉन गो' कामयाबी के शिखर पर है.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

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