ज़ाकिर नाईक ने ख़ुद को 'शांतिदूत' कहा

  • 15 जुलाई 2016
इमेज कॉपीरइट Facebook

पिछले कई दिनों कई बार टलने के बाद जुमे के दिन विवादित मुस्लिम धर्म प्रचारक ज़ाकिर नाईक की प्रेस कांफ़्रेंस हुई जिसमें उन्होंने कहा, "मैं शांति का दूत हूं."

उन्होंने कहा कि वो आतंकवाद को सही नहीं ठहराते हैं और उनके भाषणों को आधा अधूरा दिखाया गया है जिससे लोगों में उनको लेकर ग़लतफ़हमी पैदा हुई है.

उनका कहना था कि इस्लाम में बेक़सूरों को मारना गुनाह है और इस बात का वो भी समर्थन करते हैं.

जाकिर नाईक ने कहा, ''आत्मघाती हमला इस्लाम के अनुसार हराम है, लेकिन देश हित में आप किसी को मारते हैं या अपनी जान देते हैं तो वो जायज़ है, क्योंकि देश को बचाने के लिए जवान भी तो अपनी जान की बाज़ी लगाते हैं.''

इमेज कॉपीरइट EPA

उन्होंने कहा, 'मैं काफ़ी लोकप्रिय हूं और कई लोग मेरे साथ फ़ोटो खिचांते हैं. मैं कई बार फ़ोटो के दौरान मुस्कुरा देता हूं, इसका यह मतलब नहीं कि मैं उन सभी को जानता हूं.'

जाकिर का कहना था कि मीडिया उनकी लोकप्रियता का फ़ायदा उठा रहा है और उनका मीडिया ट्रायल किया जा रहा है क्योंकि किसी भी सुरक्षा एजेंसी ने अभी तक उन्हें अप्रोच नहीं किया है.

उन्होंने आगे कहा, ''मेरे भाषण अंग्रेज़ी में होते हैं और उनसे किसी अशिक्षित वर्ग को मैं भड़का नहीं सकता, वैसे भी मैं ऐसी कोई बात नहीं करता जिससे लोगों को हिंसा का संदेश मिले. मेरे चैनल ‘पीस टीवी’ को लाईसेंस नहीं दिया जा रहा इसका कारण सूचना प्रसारण मंत्रालय बताए, मैं तो अपनी अर्ज़ी डाल चुका हूं.''

ज़ाकिर ने आरोप लगाया कि वो मुसलमान हैं और इस कारण से उन्हें भारत में उनके चैनल को प्रसारित करने का अधिकार नहीं दिया जा रहा है.

इमेज कॉपीरइट Peace Tv

उन्होंने बताया कि उनके पास आंकड़े नहीं है कि भारत में कितने मुसलमान शिक्षित हैं और कितने अशिक्षित.

इस्लामिक रिसर्च फ़ाउंडेशन की ओर से की जा रही इस कांफ़्रेंस में ज़ाकिर नाईक वीडियो चैट के माध्यम से उपलब्ध हुए.

ज़ाकिर इस वक़्त सउदी अरब के मदीना में हैं और वहीं से वो 10 बजे प्रेस से मुख़ातिब होने वाले थे, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते इस प्रेस कांफ्रेस में देरी हुई.

हॉल में मौजूद प्रेसकर्मियों के ज़ाकिर के भारत नहीं आने का कारण पूछे जाने पर आईआरएफ़ के प्रतिनिधि उनकी वयस्तता का हवाला दे रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट EPA

ज़ाकिर पर आरोप है कि वो अपने भाषणों के ज़रिए युवाओं को चरमपंथ की ओर धकेल रहे हैं और अब मुंबई पुलिस और सुरक्षा एजेंसियो के विभिन्न अधिकारी उनके पुराने भाषणों व वेबसाईट्स की जांच कर रहे हैं.

ज़ाकिर नाईक के कई ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं जिनमें वो इस्लाम को अन्य सभी धर्मों से श्रेष्ठ बताते हैं और किसी और धर्म को मानने की मनाही करते हैं, लेकिन इन सभी वीडियोज़ की जाँच की जा रही है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार