‘पाकिस्तान के दुश्मनों को चुनौती है ये संकल्प’

  • 31 जुलाई 2016
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पाकिस्तान-चीन आर्थिक कॉरिडोर परियोजना को हर हाल में कामयाब बनाने का पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ़ का संकल्प वहां के उर्दू मीडिया में चर्चा का विषय है.

‘जंग’ लिखता है कि जहां ये संकल्प पाकिस्तानी जनता की सामूहिक इच्छा का आईना है, वहीं ये उन क्षेत्रीय ताकतों के लिए चेतावनी भी है जो पाकिस्तान से दुश्मनी का कोई मौक़ा हाथ से नहीं जाने देती हैं.

अख़बार लिखता है कि 47 अरब डॉलर से ज़्यादा की रक़म से बन रहे इस कॉरिडोर के तहत पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से लेकर चीन के शिनचियांग प्रांत तक हाइवे और रेलवे ट्रैक समेत व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा.

अख़बार की राय में इससे पाकिस्तान में विकास कार्यों का जाल बिछाने में मदद मिलेगी.

अख़बार कहता है कि भारत को भी इस परियोजना से फ़ायदा होगा लेकिन 'वो क्षेत्र में अपना दबदबा क़ायम करने के जुनून में' इसका विरोध कर रहा है और पर्दे के पीछे से उसे अमरीका का आशीर्वाद भी हासिल है.

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‘औसाफ़’ का आरोप है कि भारत ने इस परियोजना को नाकाम बनाने की साज़िशों को खुले आम स्वीकार किया है और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ में इसके लिए एक ख़ास डेस्क बनाई गई है और इस काम पर ख़ूब पैसा ख़र्च किया जा रहा है.

अख़बार के मुताबिक़ इसी साल पाकिस्तान में गिरफ़्तार कथित भारतीय जासूस कुलभूषण ने भी यही बात कही थी.

अख़बार कहता है कि भारत ने कुछ पाकिस्तानी राजनेताओं को गुमराह करने की कोशिश भी की है जिससे इस परियोजना को लेकर कई आपत्तियां सामने आई हैं, लेकिन इसके पूरा होने पर पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को ज़बरदस्त मज़बूती मिलेगी और देश में बेरोज़गारी से निपटने में भी बहुत मदद मिलेगी.

रोज़नामा ‘पाकिस्तान’ लिखता है कि जो अंदरूनी और बाहरी ताक़तें इस परियोजना में रोड़े अटका रही हैं, वो चाहती हैं कि ये कामयाब न हो, और अगर ऐसा मुमकिन नहीं है तो इसमें जितना संभव है, उतनी देर हो.

लेकिन अख़बार कहता है कि सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ़ दिल की गहराई से महसूस करते हैं कि इस परियोजना का कामयाब होना कितना ज़रूरी है.

अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तानी सेना ने इसकी सुरक्षा के लिए ख़ास बटालियन भी बनाई है.

वहीं ‘नवा-ए-वक़्त’ का संपादकीय है- कश्मीर के बग़ैर भारत से वार्ता किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं हो सकती.

अख़बार ने ये बात भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप के इस बयान के जवाब में लिखी है कि भारत हिंसा से मुक्त माहौल में पाकिस्तान के साथ हर विषय पर बात करने को तैयार है.

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अख़बार कहता है कि भारत प्रशासित कश्मीर में जो कुछ भारतीय सेना कर रही है उसे देखते हुए तो पाकिस्तान को भारत से हिंसा मुक्त माहौल की मांग करनी चाहिए लेकिन शातिर भारत माहौल में तनाव का ज़िम्मेदार पाकिस्तान को बताता है.

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में आठ साल तक मुख्यमंत्री रहे क़ायम अली शाह की जगह मुराद अली शाह की नियुक्ति पर 'जसारत' ने संपादकीय लिखा है.

अख़बार लिखता है कि सिंध असेंबली में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी का बहुमत है इसलिए मुख्यमंत्री को बदला जाना सिर्फ़ एक औपचारिकता है, लेकिन सवाल ये है कि क्या चेहरा बदल देने से कोई बदलाव आएगा.

अख़बार के मुताबिक़ सब जानते थे कि क़ायम अली शाह कुछ नहीं करते थे और हर फ़ैसला आसिफ़ अली ज़रदारी की तरफ से आता था, या फिर सूबे में जो उनके सिपहसालार हैं उनकी चलती है.

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रूख़ भारत का करें तो संसद के मॉनसून सत्र के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ़ से महंगाई का मुद्दा उठाए जाने पर 'हिंदोस्तान एक्सप्रेस' का संपादकीय है- हर हर मोदी से अरहर मोदी तक.

अख़बार लिखता है कि दिन रात मोदी-मोदी की रट लगाने वाले, महंगाई पर राहुल गांधी के तेवरों से दुखी तो होंगे, लेकिन उनके पास कांग्रेस उपाध्यक्ष की कही बातों की कोई काट नहीं है.

अख़बार के मुताबिक़ राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज़ करते हुए कहा, "चौकीदार की नाक के नीचे चोरी हो रही है और चौकीदार ख़ामोश है."

अख़बार की राय है कि मोदी को सत्ता संभाले दो साल हो गए हैं और अब भी महंगाई डायन बनकर लोगों को पहले से कहीं ज़्यादा ज़हरीले अंदाज में डस रही है और यही वजह है कि सोशल मीडिया पर राहुल के नए नारों की गूंज 'अरहर मोदी, अरहर मोदी' के रूप में सुनी जा रही है.

वहीं 'हमारा समाज' ने अपने संपादकीय में मध्य प्रदेश में गौरक्षा के नाम पर दो मुसलमान महिलाओं की पिटाई का मुद्दा राज्यसभा में उठने पर संपादकीय लिखा है.

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अखबार के मुताबिक़ सदन में बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि एक तरफ़ तो सरकार महिलाओं को सम्मान दिए जाने की बात करती है और दूसरी तरफ़ उनके साथ जानवरों से भी बदतर सलूक किया जा रहा है.

अख़बार कहता है कि सरकार गफ़लत में है और वो सब हो रहा है जो नहीं होना चाहिए.

अख़बार सरकार को सलाह देता है कि वो लोगों को और खास कर दलितों और मुसलमानों को राहत की जिंदगी बख्शे और देश को आगे बढ़ाने के हर संभव प्रयास हों.

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