जितने कम कपड़े, उतनी खुशहाल ज़िंदगी

  • 5 अगस्त 2016
कपड़े, वार्डरोब इमेज कॉपीरइट alamy

गर्मियों की सेल का सीज़न अभी-अभी ख़त्म हुआ है. आप लोगों में से बहुतों ने जींस, टी-शर्ट, क़मीज़, कुर्तियां, स्कर्ट, पैंट, जैकेट, ब्लेज़र और न जाने कितने सारे कपड़े ख़रीद डाले होंगे. आख़िर सेल का सीज़न जो था. आपके पसंदीदा ब्रैंड के कपड़े सस्ते में मिल रहे थे.

ढेर सारी ख़रीदारी से आपकी अलमारी भर गई होगी. उसे देखते ही आप ख़ुश हो जाते होंगे कि वाह! आपके पास तो इतने ढेर सारे कपड़े हैं.

मगर, हर सुबह एक सवाल से आपका सामना ज़रूर होता होगा, आख़िर पहनें तो क्या? दफ़्तर जाना है. डेट पर जाना है. या फिर पार्टी में जाना है.

ज़रा सोचिए, कपड़ों से आपकी अलमारी भरी है, फिर भी रोज़, बल्कि दिन में कई बार आपको इस सवाल का जवाब तलाशना पड़ता है कि कौन से कपड़े पहनें?

इस सवाल का बार-बार सामना करना थकाऊ हो सकता है. आपके फ़ैसले लेने की क़ाबिलियत पर असर डाल सकता है.

ऐसे में पश्चिमी देशों में कुछ लोगों ने एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसका नाम है प्रोजेक्ट 333. इसमें शामिल लोगों को अपनी अलमारी में केवल 33 कपड़े और एक्सेसरीज़ रखने की इजाज़त होती है. उसी में काम चलाना होता है.

इमेज कॉपीरइट Anthony Ongaro

सोचने को आप ये भी सोच सकते हैं कि भला केवल 33 कपड़ों, जूतों, बेल्ट और बैग से काम कैसे चलाया जा सकता है? मगर, कुछ लोग हैं जो अपने वार्डरोब को हल्का करके ख़ुशहाल ज़िंदगी जी रहे हैं.

अमरीकी लेखक जोशुआ बेकर को ही लीजिए. वो कहते हैं वार्डरोब में कम कपड़े होने से उनका अच्छा ख़ासा वक़्त बच जाता है. रोज़ ये फ़ैसला नहीं करना पड़ता कि पहनें क्या? बेकर ने अपने वार्डरोब में केवल तीस चीज़ें रखी हैं. इनमें कपड़ों के अलावा जूते, बेल्ट वग़ैरह भी शामिल हैं.

बहुत से लोग हैं जो बेकर जैसी ज़िंदगी जीने में यक़ीन रखते हैं. आज के उपभोक्तावाद के युग में बार-बार की ख़रीदारी, कपड़ों से ठुंसी पड़ी अलमारी भी लोगों के लिए ऊबाऊ और थका देने वाली हो गई है. इसीलिए प्रोजेक्ट 333 जैसी मुहिम चलाई जा रही है. ये लोग रोज़ फ़ैशनेबल कपड़े पहनने में यक़ीन नहीं रखते. बल्कि थोड़े से लेकिन बहुत अच्छी क्वालिटी के कपड़े रखते हैं.

दुनिया के कई कामयाब लोग काफ़ी दिनों से ये नुस्ख़ा आज़मा रहे हैं. जैसे कि अस्सी के दशक में फ़ैशन डिज़ाइनर डोना कैरेन ने कामकाजी महिलाओं के लिए सात कपड़ों वाले वार्डरोब को लॉन्च किया था. आज फ़ेसबुक के मार्क ज़ुकरबर्ग, रोज़ाना एक जैसे कपड़े पहनते हैं. यानी जींस और टी-शर्ट. फ़ैशन डिज़ाइनर कार्ल लैगरफ़ील्ड भी रोज़ एक जैसे कपड़े पहनते हैं. अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा या तो नीला या फिर ग्रे कलर का सूट पहनते हैं. एपल के संस्थापक स्टीव जॉब्स अपनी बिना कॉलर वाली काली टर्टलनेक टीशर्ट रोज़ पहना करते थे.

इमेज कॉपीरइट alamy

कम कपड़ों में काम चलाने के हामी लोगों में से कई ऐसे हैं जो दस कपड़ों को ही अपने लिए काफ़ी मानते हैं. वहीं कुछ लोग 33 चीज़ों की पाबंदी पर अमल करते हैं.

प्रोजेक्ट 333 शुरू करने वाली कोर्टनी कार्वर ने ये मुहिम छह साल पहले शुरू की थी. वो कहती हैं कि कम कपड़ों में काम चलाकर आप ये सीखते हैं कि आख़िर आपके लिए कितना सामान काफ़ी है.

जो लोग इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहते हैं. उन्हें कम सामान में काम चलाने से काफ़ी फ़ायदे हो सकते हैं.

जैसे कि आपका महीने की ख़रीदारी का ख़र्च कम होगा. हालांकि शॉपिंग सबसे पसंदीदा टाइम पास है. मगर इसमें अच्छे ख़ासे पैसे ख़र्च होते हैं. जब आप ये तय कर लेंगे कि आपको कम कपड़ों से काम चलाना है, तो महीने में अच्छे ख़ासे पैसे बचा लेंगे आप. जैसे कोर्टनी कारवर को ही लीजिए. आज वो साल में एक हज़ार डॉलर या क़रीब 68 हज़ार रुपए कपड़ों पर ख़र्च करती हैं. जबकि पहले वो हर महीने छह हज़ार डॉलर, ख़रीदारी पर ख़र्च कर डालती थीं.

कम सामान में काम चलाने के मनोवैज्ञानिक फ़ायदे भी हैं. कम सामान होने पर आप हर कपड़े से अपने जज़्बात नहीं जोड़ते. कई बार हम कुछ कपड़ों को लेकर जज़्बाती हो जाते हैं. कुछ क़िस्से, कुछ यादें उन कपड़ों से जोड़ लेते हैं.

अमरीकी लेखिका जेनिफ़र बॉमगार्टनर कहती हैं कि ये फ़ालतू की बातें हैं. अगर आप कपड़ों से अपने जज़्बातों को अलग कर लेंगे तो आपको अपनी अलमारी साफ़ करने में सहूलियत होगी.

इमेज कॉपीरइट Rebecca Bixler Photography

जेनिफ़र की अपनी अलमारी में हैंगर समेत कुल 65 चीज़ें हैं. वो कहती हैं कि कपड़ों को लेकर क्या जज़्बाती होना? कुछ दिन में उन्हें ख़राब होना ही है और आपको उन्हें फेंकना ही पड़ेगा.

अमरीकी लेखिका जेनिफ़र स्कॉट कहती हैं कि कितने कपड़े ज़रूरी हैं, इसका कोई जादुई आंकड़ा नहीं. वो अपने वार्डरोब में दस अच्छे कपड़े रखती हैं. जिनमें तीन ड्रेस, दो जोड़ी जींस, तीन कुर्तियां, एक स्कर्ट और एक टी-शर्ट है. इसके अलावा उनके पास बेल्ट, जैकेट और स्वेटर हैं. वो कहती हैं कि कपड़ों का ज़्यादा और बेहतर इस्तेमाल करना हो तो मिक्स्ड ऐंड मैच करने की आदत डालनी चाहिए. ताकि आप कुछ कपड़ों को दूसरों से मिलान करके पहन सकें.

कोर्टनी कार्वर यही करती हैं. वो अपनी क़मीज़, स्कर्ट और ब्लेज़र को अलग-अलग कपड़ों से मैच करके पहनती हैं. कभी कैजुअल क़मीज़ के साथ स्कर्ट और कभी जींस के साथ सिली हुई क़मीज़. ब्लेज़र वो कभी भी डाल लेती हैं.

जेनिफ़र बॉमगार्टनर कहती हैं कि कम कपड़े होने पर आपको बार-बार फ़ैसला नहीं लेना पड़ता. असल में बार-बार फ़ैसले लेने की मजबूरी से आपकी क़ाबिलियत पर असर पड़ता है. आप ग़लत फ़ैसले लेने लगते हैं. जेनिफ़र के मुताबिक़ अगर आपकी अलमारी में कम कपड़े हैं तो आपको रोज़ ये सवाल नहीं सताएगा कि पहनें तो क्या? इस आदत को आप अपनी अलमारी से शुरू करेंगे. फिर घर के दूसरे कामों पर लागू करेंगे. जब आप ग़ैरज़रूरी चीज़ें अपनी ज़िंदगी से हटाएंगे. तो, धीरे-धीरे ग़ैरज़रूरी काम और फ़ालतू के लोगों को अपनी ज़िंदगी से कम करेंगे. आपकी ज़िंदगी काफ़ी आसान हो जाएगी.

इमेज कॉपीरइट Danny Liao

वैसे जब ढेर सारे कपड़ों के बीच ज़िंदगी बिताने की आदत पड़ गई हो, तो कम कपड़ों में काम चलाना काफ़ी बड़ी चुनौती लगने लगता है. जोशुआ बेकर इसके लिए एक सलाह देते हैं. वो कहते हैं कि कपड़े हमेशा बढ़ियां ख़रीदने चाहिए. ये टिकाऊ होते हैं. बार-बार धोने पर ख़राब नहीं होते. इनका रंग फीका नहीं पड़ता. जोशुआ बेकर पहले कुछ भी ख़रीद लाते थे. मगर वो कपड़े जल्दी ख़राब हो जाते थे. इसीलिए उन्होंने कपड़ों की क्वालिटी पर ध्यान देना शुरू किया. अच्छी क़िस्म की जींस और टी-शर्ट ख़रीदने से वो ज़्यादा दिन तक ख़रीदारी को मजबूर नहीं होते.

लेखिका जेनिफ़र स्कॉट कहती हैं कि कम कपड़े रखने का ये मतलब बिल्कुल नहीं कि आप स्टाइलिश कपड़े न पहनें. कम कपड़ों में तो आपका अपना स्टाइल और निखरकर आएगा. क्योंकि तब आप पसंदीदा कपड़े ही ख़रीदेंगे और पहनेंगे. इससे लोग आपका ख़ास स्टाइल जानेंगे. क्योंकि कपड़े कम रहेंगे तो उनकी क्वालिटी और फ़िटिंग पर भी आपका ज़ोर रहेगा.

जिन लोगों को अक्सर पार्टियों में जाना होता है. वो दफ़्तर और पार्टियों के हिसाब से अलग-अलग वार्डरोब रख सकते हैं. या फिर मिक्स्ड ऐंड मैच करके दोनों तरह के कपड़ों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं.

कम कपड़े रखने का ये मतलब भी नहीं कि आप ख़रीदारी के लिए जाएं ही नहीं. शॉपिंग के लिए जाएं ज़रूर, मगर चीज़ें पहले कई बार देख लें. फिर जो आपकी सबसे पसंदीदा और स्टाइलिश चीज़ हो, वो ही ख़रीदें.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार