'नकली तस्वीर से फतह किया एवरेस्ट'

  • 31 अगस्त 2016
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नेपाली अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने उस भारतीय पर्वतारोही जोड़ी पर दस साल का प्रतिबंध लगा दिया है जिन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय जोड़ी होने का दावा किया था.

अधिकारियों के अनुसार सरकार की जाँच में साबित हो गया कि भारतीय जोड़ी ने एवरेस्ट फतह करने की जो तस्वीरें जारी की हैं वे नकली थीं.

अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंध का मकसद अन्य पर्वतारोहियों को इस तरह के नकली दावे करने से रोकना है.

पुणे में पुलिस कांस्टेबल दिनेश और तराकेश्वरी राठौर ने जुलाई में मीडिया के सामने एवरेस्ट पर पहुंचने का दावा किया था.

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अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने एवरेस्ट फतह की जो तस्वीरें जारी की थीं उनमें फेरबदल किया गया था.

नेपाल के पर्यटन विभाग ने इस बारे में प्रमाणपत्र भी जारी किया था लेकिन अब जांच के बाद इसे रद्द कर दिया गया है.

पर्यटन विभाग के प्रमुख सुदर्शन प्रसाद ढकाल ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि राठौर दंपति ने जो तस्वीरें जमा की थीं उनका विश्लेषण करने के बाद पता चला कि उन्होंने एवरेस्ट पर जीत हासिल करने वाले एक अन्य भारतीय पर्वतारोही की तस्वीरों में फेरबदल कर अपनी तस्वीरें और बैनर जोड़ दिया.

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पर्यटन विभाग के प्रमुख ने ये भी बताया कि कई प्रयासों के बावजूद राठौर दंपति से जांच में किसी तरह का सहयोग नहीं मिल सका. इस जोड़ी की मदद करने वाले दो शेरपा सहायक अब तक फरार हैं.

नकली फोटो का मामला तब सामने आया जब बंगलुरु के एक पर्वतारोही सत्यरुप सिद्धान्त ने पत्रकारों को बताया कि राठौर दंपति ने एवरेस्ट फतह के सबूत के रूप में जो तस्वीरें जमा की हैं, वो वास्तविकता में उनके हैं.

राठौर के दावों पर इसलिए भी शक था क्योंकि उनके एवरेस्ट पर जीत की तारीख और संवाददाता सम्मेलन में घोषित तारीख में कई दिनों का अंतर है.

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