जापान में रोने-रुलाने का अजीब कारोबार

  • 31 अगस्त 2016
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Image caption यू जई को कंपनी 'हैंडसम वीपींग ब्वॉय' कहती है जो रुलाने में मदद करता है

आजकल जापान की कंपनियां अपने कर्मचारियों को रुलाने के अजीब काम में जुटी हैं और इसके लिए एक सर्विस भी ले रही हैं.

इस सर्विस के तहत पहले कर्मचारियों को फिल्में दिखाकर रुलाया जाता है फिर रुमाल से उनके आंसू पोंछे जाते हैं.

आप ये ज़रूर जानना चाहते होंगे कि आख़िर ऐसा करने का मकसद क्या है?

जापान में ऐसा मानना है कि इससे लोगों के बीच एक टीम के रूप में संबंध प्रगाढ़ होते हैं.

ये रुलाने का कारोबार ऐसे होता है-

टोक्यो में एक कंपनी के कॉन्फ़्रेस हॉल में एक आदमी वहां मौजूद दस लोगों को फ़िल्म दिखाने की तैयारी कर रहा था.

कुछ ही देर में स्क्रीन पर एक बहरे आदमी और उसकी बेटी की दिल दहला देने वाली कहानी शुरू हुई.

फ़िल्म की कहानी में जब बहरे आदमी की बेटी गंभीर रूप से बीमार पड़ती है तो वो उसे लेकर हॉस्पिटल जाता है.

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लेकिन बहरा होने के कारण वो हॉस्पिटल के रिसेपशन पर यह नहीं बता सका कि वो लड़की का पिता है और इसकी वजह से उसे लड़की के पास नहीं जाने दिया गया.

इस फिल्म के अंत में लड़की की मौत हो जाती है और आख़िरी वक़्त में वो लड़की पूरी तरह से अकेली होती है. उसके पिता भी उसके साथ नहीं होते हैं.

इसके बाद जानलेवा बीमारी से ग्रस्त एक कुत्ते की एक दूसरी फिल्म शुरू होती है. तभी कॉन्फ्रेस हॉल में किसी के सुबकने की आवाज़ सुनाई पड़ती है.

कुछ ही मिनट में कई दूसरे लोगों के तेज़-तेज़ सुबकने की आवाज़ सुनाई पड़नी शुरू हो जाती है.

पंद्रह मिनट के अंदर कमरे में मौजूद आधे लोग स्क्रीन की ओर टिकटिकी लगाकर देख रहे थे और उनकी आंखों से झर-झर आंसू बह रहे थे.

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तभी फिल्म दिखाने वाला शख़्स उठा और एक बड़े रुमाल से सबके आंसू पोछने लगता है.

लोगों के आंसू पोंछने वाला यह शख़्स यू जई किसी मॉडल की तरह दिखता है. और लोगों के आंसू पोछने के अपने काम को वो बहुत शिद्दत के साथ पूरा करता है.

उसने मुझसे कहा, "जब मैंने इस तरह के वर्कशॉप शुरू किए, तो मुझे कुछ अजीब हालात का सामना करना पड़ा. मुझे इस काम की बहुत प्रैक्टिस नहीं थी, इसलिए मैं आसानी से रो नहीं सकता था. इसका असर यह होता था कि मैं लोगों को भी नहीं रुला सकता था. लेकिन अब ठीक है. अब मैं रो सकता हूं और दूसरों को भी रुला सकता हूं."

उन्हें इस काम की वजह से 'हैंडसम वीपींग ब्वॉय' कहा जाता है.

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वो बताते हैं,"जापानी लोग आम तौर पर सार्वजनिक रूप से नहीं रोते हैं. लेकिन एक बार अगर आप दूसरे के सामने रोने लगते हैं तो इससे आस-पास के माहौल पर फ़र्क़ पड़ता है. खासतौर पर व्यापार के क्षेत्र में."

इसके पीछे मकसद आपकी कोमल भावनाओं को दिखाना होता है. माना जाता है कि ऐसा करने से आपके साथ दूसरे लोग भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं और वे एक टीम के तौर पर बेहतर काम करते हैं.

इस तरह के वर्कशॉप के दौरान यू जई बीमार पालूत जानवरों या पिता-पुत्री के संबंधों पर फिल्में दिखाते हैं.

कंपनियां कई 'हैंडसम वीपींग ब्वॉय' में से किसी एक का चुनाव करती हैं. रुलाने के लिए होने वाली इस वर्कशॉप का आइडिया हीरोकी तराई के दिमाग की उपज है जो कि एक व्यवसायी हैं.

उनका कहना है, "मेरी हमेशा से इंसानों की छुपी हुई भावनाओं में दिलचस्पी रही है. मैं जापानी लोगों को रुलाना चाहता था."

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Image caption इस वर्कशॉप का आइडिया हीरोकी तराई के दिमाग की उपज है

उनके अंदर यह ख्याल सबसे पहले सोलह साल की उम्र में आया था. स्कूल में कोई उनका दोस्त नहीं था.

वो टॉयलेट में अपना लंच खाते थे. वो उसे एक मुश्किल समय बताते हैं. वो बताते हैं, "उस वक्त मैंने लोगों के सच्चे जज़्बातों को खोजना शुरू किया. ऊपर से तो वो मुस्कुराते हुए नज़र आते थे लेकिन हमेशा हक़ीक़त वैसी होती नहीं जैसी ऊपर से दिखती थी."

उनका पहला प्रोजेक्ट तलाक ले रहे जोड़ों के लिए था. इसके लिए शादी समरोह की तरह तलाक लेने के लिए भी समारोह रखे गए.

वो बताते हैं, "इस समारोह के दौरान हथौड़े से शादी की अंगुठी को चकनाचूर किया गया."

इसके बारे में जोड़ों की राय थी कि रोना दिल को सबसे राहत देने वाला लम्हा था. हिरोकी ने फिर 2013 में रोने के इस व्यवसाय को शुरू करने का फ़ैसला लिया.

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