'ये थी मेरी क़िस्मत कि मैं देखूं मदीना'

  • 11 सितंबर 2016
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हज के लिए दुनिया के लाखों मुसलमान मक्का पहुँचे हैं.

हज मुस्लिम समुदाय की वार्षिक तीर्थ यात्रा है जो कि सऊदी अरब के शहर मक्का और मदीना में की जाती है.

हज यात्रा के दौरान सऊदी अरब में बीते साल हुई भगदड़ में दो हज़ार लोगों के मारे जाने के बावजूद हाजियों के उत्साह में कोई कमी नहीं है.

इस साल लगभग 15 लाख हाजी पवित्र हज यात्रा पर आए हैं.

हर साल लाखों हज यात्री मक्का आते हैं और सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को अरबों डालर दे जाते हैं.

जहां मोबाइल कंपनियां, रेस्तरां, होटल, ट्रैवेल एजेंट और एयरलाइंस करोड़ों का मुनाफ़ा हासिल करती हैं वहीं सरकार को टैक्स के रूप में मोटी रक़म मिल जाती है.

इस्लाम की जन्म स्थली मक्का में किराया सऊदी के किसी भी दूसरे इलाक़े से महंगा होता है.

हर साल मुस्लिम श्रद्धालु सऊदी अरब में मक्का की यात्रा पर जाते हैं और पवित्र स्थल काबा के सामने एक साथ नमाज़ अदा करते हैं.

श्रद्धालु मदीना में मस्जिदे-नबवी भी जाते हैं.

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हज का मक़सद इस्लाम में बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देना और ये बताना है कि अल्लाह की नज़र में हर कोई बराबर है.

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मुस्लिम तीर्थयात्री काबा के सोने के दरवाज़े को छू रहे हैं. ये मस्जिद जिसे हरम शरीफ़ कहा जाता है, इस्लाम का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है.

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पैंगबर मोहम्मद ने चौदह सौ वर्ष पहले अपने अनुयायियों के साथ हज यात्रा की थी. आज हज यात्री उसी यात्रा का अनुसरण कर हज पर आते हैं.

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हज का उद्देश्य ग़रीब, अमीर और सामाजिक स्तर पर हर तरह के भेदभाव को ख़त्म करना है.

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हज यात्रियों के रहने के लिए सऊदी अरब नए रिहायशी इलाक़े बना रहा है.

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इस वर्ष तीर्थयात्रियों को कड़े सुरक्षा मानकों का सामना करना पड़ रहा है.

ईरान और सऊदी अरब के अधिकारियों के बीच नए इंतज़ामों को लेकर हुई कूटनीतिक बातचीत के टूटने के बाद ईरान इस वर्ष आधिकारिक तौर पर हज यात्रियों को हज के लिए नहीं भेज रहा है.

दोनों देशों में सीरिया और यमन के मामलों पर भी मतभेद हैं.

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सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में एक मुस्लिम अहराम पहने हुए (हज के दौरान पहना जाने वाला कपड़ा) हरम शरीफ़ के अंदर क़ुरान पढ़ते हुए.

सऊदी अरब ने इस साल मक्का जाने वाले हज यात्रियों के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक ब्रेसलेट तैयार किया है. इसमें हज यात्रा और श्रद्धालुओं से जुड़ी कई अहम जानकारियां होगीं.

सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक ब्रेसलेट में श्रद्धालुओं की निजी और मेडिकल जानकारियां दर्ज की जाएंगी ताकि अधिकारी यात्रियों की पहचान कर सकें और उन्हें ज़रूरी मदद मुहैया करा सकें.

इसके अलावा हज यात्रियों की सुरक्षा के लिए 1000 नए निगरानी कैमरे भी लगाए गए हैं.

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