एक स्कूल जिसकी फीस है 21 लाख

 शुक्रवार, 5 अक्तूबर, 2012 को 11:27 IST तक के समाचार
स्कूली बच्चे (फाइल फोटो)

अमरीका के न्यूयॉर्क में ऐसा स्कूल खुला है, जहां एक बच्चे की सालाना पढ़ाई का सालाना खर्च 40 हज़ार डॉलर यानी लगभग 21 लाख रुपए है. इसे दुनिया के सबसे महंगे स्कूलों में माना जा रहा है.

कुछ वर्षों में इस स्कूल की शाखाएं बीजिंग, लंदन और सॉओ पॉलो में खोली जाएगी और बाकी शहरों को बाद में जोड़ा जाएगा.

न्यूयॉर्क के इस स्कूल में कई मशहूर हस्तियों के बच्चे दाखिला ले चुके हैं जिनमें हॉलीवुड अभिनेता टॉम क्रूज़ की बेटी सिरी भी शामिल है.

इस स्कूल का नाम है एवेन्यूज़- द वर्ल्ड स्कूल, जिसके विज्ञापन का दावा है कि इस स्कूल में आपको सब कुछ विश्व का सबसे बेहतरीन मिलेगा.

स्कूल की खूबियां

"मेरी तीन बेटियां हैं जिन्होंने यहां दाखिला लिया है. एक ग्रेड 2 में हैं, एक नर्सरी में हैं और एक केजी में है. मुझे इस स्कूल के बारे में इंटरनेट पर पता चला. मुझे लगा कि ये ऐसा स्कूल हैं जहां बच्चे के तौर पर मैं पढ़ना चाहती, यानी एक स्कूल जो कि अनुभव पर आधारित पढ़ाई करवाता हो"

माया टैलेट

भले ही अमरीका में पिछले दस साल में निजी स्कूलों में शिक्षा हासिल करने वालों की संख्या में 10 प्रतिशत की कमी आई हो लेकिन एवेन्यूज़ स्कूल के सह संस्थापक क्रिस विटल कहते हैं कि ये बिजनस मॉडल इस स्थिति को बदल देगा.

न्यूयॉर्क शहर के इतिहास में ये सबसे महंगा निजी स्कूल है. एवेन्यूज़ स्कूल के प्रबंधन ने इस स्कूल के लिए सात करोड 50 लाख डॉलर यानी लगभग तीन अरब 92 करोड़ रुपए जुटाए है. इस स्कूल के लिए पैसा देने वालों के 600 बच्चे इस स्कूल में दाखिला ले चुके हैं.

ये स्कूल न्यूयॉर्क के बाहरी इलाके में एक गोदाम को बदलकर बनाया गया है.

माया टैलेट नाम की एक महिला का कहना है, “मेरी तीन बेटियां हैं जिन्होंने यहां दाखिला लिया है. एक ग्रेड-2 में हैं, एक नर्सरी में हैं और एक केजी में है. मुझे इस स्कूल के बारे में इंटरनेट पर पता चला. मुझे लगा कि ये ऐसा स्कूल हैं जहां बच्चे के तौर पर मैं पढ़ना चाहती, यानी एक स्कूल जो कि अनुभव पर आधारित पढ़ाई करवाता हो, कौशल विकसित करता हो, विश्व की असल स्थिति के लिए आपको तैयार करता है. यही मुझे बहुत अच्छा लगा.”

'एलिट स्कूल'

इस स्कूल में तीन साल की उम्र में बच्चों की दो क्लास होंगी. इनमें एक क्लास अंग्रेजी की होगी, दूसरी भाषा वो चुन सकते हैं वो चाहे स्पैनिश हो या मैंडरिन हो.

अमरीकी पढ़ाई

इस स्कूल में बच्चों की हर जरूरत का ख्याल रखा जाएगा

जब इस स्कूल के संस्थापक क्रिस विटल से पूछा गया कि वो उन आलोचकों को क्या जवाब देंगे जो कहते हैं कि जिन बच्चों के लिए ये स्कूल बनाया गया है वो तो पहले ही अच्छी शिक्षा हासिल करने में सक्षम हैं, तो उनका कहना था, “बच्चे, बच्चे होते हैं उन्हें विषेश अधिकार हैं या नहीं ये अलग बात है.और बच्चों को बेहतरीन शिक्षा हासिल करने का ह़क है. मैंने अपनी ज़िंदगी के 20 साल सबसे कमज़ोर वर्ग के लिए स्कूल बनाते हुए बिताए हैं. हम कमज़ोर वर्ग के बारे में भी सोचते हैं और इस स्कूल में कई ऐसी सुविधाएं हैं जो कमज़ोर वर्ग के साथ बांटी जा सकती हैं.”

विटल बताते हैं कि आई पैड इस स्कूल में पढ़ाई का मुख्य अंग है.

तकनीक मूल मंत्र

हॉई स्कूल के प्रमुख गॉर्डनर डनन पहले डल्टन स्कूल को चलाते थे. वो कहते हैं कि तकनीक ही मूल मंत्र है. उनके अनुसार, “हम बड़े स्तर पर हर क्लासरूम में तकनीक का इस्तेमाल करेंगे.”

लेकिन बाकी स्कूल तो इस तरह का निवेश नहीं कर सकते. इस बारे में डनन कहते हैं, “वो फिलहाल इस तरह का निवेश नहीं कर सकते पर हम उन्हें शिक्षा में तकनीक का महत्व या ताकत दिखा सकते हैं. तब उन्हें लगेगा कि वो इस तरह की तकनीक को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं.”

न्यूयॉर्क की एक प्रमुख ब्लॉगर और निजी स्कूल में पढ़ाने वाली एक मां कहती हैं कि न्यूयॉर्क के माता पिता इस तरह के स्कूल का विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं. लेकिन क्रिस विट्टल कहते हैं कि उन्हे इतनी जल्दी राय ना बनाएं.

उनके अनुसार, “मैं इस स्कूल को विशिष्ट वर्ग का स्कूल नहीं मानता. हां ये बात सच हैं कि यहां आने वाले बच्चों को हर तरह की सुविधाएं प्राप्त हैं. लेकिन हमारी सोच यही हैं कि हम एक ऐसी संस्कृति विकसित करे जो उदारवादी हो.”

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