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 रविवार, 9 अगस्त, 2009 को 13:32 GMT तक के समाचार

छोड़ दी सती होने की ज़िद

नारायण बारेठ

बीबीसी संवाददाता, जयपुर

राजस्थान में अपने पति की मौत पर सती होने पर उतारू शरबती आख़िर गांव और परिवारवालों के समझाने के बाद अपनी ज़िद छोड़ने को राज़ी हो गई.

सूचना मिलने पर पुलिस वहाँ पहुँची भी, लेकिन तब तक शरबती को समझाया जा चुका था.

ये घटना सीकर ज़िले में उस जगह हुई जहाँ से दिवराला केवल पाँच किलोमीटर दूर है. दिवराला में लगभग 22 साल पहले रूप कँवर को सती प्रथा के नाम पर कथित तौर पर चिता पर बिठाकर सती होने के लिए बाध्य किया गया था.

महिला संगठनों का कहना है कि ये सती विरोधी आंदोलन से बने माहौल का ही असर है कि शनिवार को शरबती को गांववालों ने रोक लिया.

सती होने की ज़िद

पुलिस के मुताबिक़ शरबती के पति 60 वर्षीय नंछू राम मीणा की शनिवार को मौत हो गई थी.

गांववालों के अनुसार जब वे नंछू राम का शव अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले जाने लगे तो शरबती ने ख़ुद के सती होने की ज़िद की.

"हमें सूचना मिली थी कि एक औरत सती होने की इच्छा जता रही है. हम मौके पर जाने के लिए रवाना हुए, लेकिन तभी रास्ते में सूचना मिली कि शरबती मान गई है"

हेमराज, पुलिस अधिकारी

घरवालों और गाँव के प्रमुख लोगों ने उन्हें समझाया, लेकिन शरबती नहीं मानी.

ये ख़बर फैलते ही लोग वहाँ इकट्ठा होने लगे. गाँव के सरपंच और अन्य लोग शरबती को समझाते रहे, लेकिन बात नहीं बनी. इसके बाद गाँववालों ने इसकी सूचना पुलिस को दी.

इलाक़े के अजीतगढ़ थाने के अधिकारी हेमराज सिंह कहते हैं, "हमें सूचना मिली थी कि एक औरत सती होने की इच्छा जता रही है. हम मौक़े पर जाने के लिए रवाना हुए, लेकिन तभी रास्ते में सूचना मिली कि शरबती मान गई है."

बाद में शरबती के दिवगंत पति का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

1987 के सती विरोधी आंदोलन की अगुवा रही कविता श्रीवास्तव कहती हैं, "उस आंदोलन से सती विरोधी माहौल बना और अब लोग इस कुप्रथा के ख़िलाफ़ खड़े होने लगे हैं. साथ ही क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी लगता है कि इस सामाजिक बुराई को रोकना उनकी भी ज़िम्मेदारी है. यही वजह है कि रूप कँवर के बाद राजस्थान में किसी औरत को सती के नाम पर नहीं मारा गया."

महिला संगठनों के अनुसार 1947 से लेकर अब तक राजस्थान में सती होने की तकरीबन 26 घटनाएँ हुई हैं, इनमे रूप कँवर सबसे आख़िरी थी.

इसके बाद महिला संगठनों के व्यापक आंदोलन को देखते हुए सरकार ने सती विरोधी क़ानून बना दिया और इसे लागू करने में सख़्ती भी दिखाई