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लाइव रिपोर्टिंग

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  1. पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता बनर्जी ने टीएमसी का घोषणापत्र जारी किया

    ममता

    ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए टीएमसी का घोषणापत्र जारी कर दिया है.

    कोलकाता में घोषणापत्र जारी करते हुए उन्होंने कहा कि टीएमसी जब सत्ता में आई थी तो राज्य की आय 25 हज़ार करोड़ रुपये थी और जो कि अब बढ़कर 75 हज़ार करोड़ रुपये हो गई है.

    उन्होंने कहा “एक मज़बूत और समृद्ध बंगाल बनाने के लिए ताकि विकास का चक्का तीसरे कार्यकाल में भी चलता रहे, मैं 10 ‘ओंगिकार ’लेकर आई हूं. हमारा मकसद सिर्फ एक है - बंगाल को देश के सबसे अग्रणी राज्यों में से एक बनाए रखना.”

    ममता ने कहा कि उनका ज़ोर बेरोज़गारी घटाने पर होगा. उन्होंने कहा, “एक साल में 5 लाख नए रोज़गार पैदा किए जाएंगे.”

    साल में चार महीने ‘दुआरे सरकार’ कार्यक्रम चलाया जाएगा जिसके तहत सरकार मुफ़्त राशन घरों तक पहुंचाएगी.

    घोषणापत्र में कहा गया कि सरकार ग़रीबों को 6 हज़ार और गरीब एससी एसटी को सालाना 12 हज़ार रुपये की मदद देगी.

    किसानों के लिए हर साल हर एक एकड़ पर 10 हज़ार रुपये देने का वादा किया गया है.

    घोषणापत्र में कहा गया है कि छात्रों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 10 लाख रुपये तक के लोन दिए जाएंगे,इनपर 4 प्रतिशत ब्याज लगेगा. घरेलू महिलाओं को भी इनकम सपोर्ट स्कीम के तहत मदद करने की बात कही गई है.

    प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, "ये लोगों का, लोगों के लिए और लोगों द्वारा बनाया गया घोषणापत्र है."

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  2. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- कोरोना वैक्सीन की बर्बादी रोकनी होगी

    मोदी

    राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कोरोना के देश में बढ़ते मामले को लेकर बैठक की.

    इस वर्चुअल बैठक में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों के साथ टीकाकरण की योजना पर भी बातचीत की

    उन्होंने कहा, ‘’कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई को एक साल से ज्यादा समय हो रहा है. भारत के लोगों ने कोरोना का जिस तरह सामना किया है , उसे लोग उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हैं. आज देश में 96 फीसदी से ज़्यादा मामले रिकवर हो चुके हैं. मृत्यु दर में भी भारत सबसे कम दर वाले देशों में है. कुछ राज्यों में केसों की संख्या बढ़ रही है. देश के 70 जिलों में ये वृद्धि 150 फीसदी से ज्यादा है. हमें कोरोना की इस उभरती हुई 'सेकंड पीक' को तुरंत रोकना होगा. इसके लिए हमें तुरंत और निर्णयात्मक कदम उठाने होंगे.’’

    "हमें जहां ज़रूरी हो माइक्रोकंटेनमेंट ज़ोन बनाने में संकोच नहीं करना चाहिए, इसे लेकर हर स्तर पर चर्चा होनी चाहिए. हमें इसे उतनी ही गंभीरता से करने की ज़रूरत है जैसी हम एक साल से करते आ रहे हैं. कई राज्यों में रैपिड एंटीजन टेस्ट पर ही निर्भरता है. लेकिन आरटीपीसीआर टेस्ट पर ध्यान देने की ज़रूरत है. इस बार टीयर-2 के शहर ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं. हमें छोटे शहरों में टेस्ट बढ़ाना होगा.’’

    ‘’पूरा देश ट्रैवेल के लिए खुल चुका है ऐसे में हर राज्यों को लोगों की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग करते रहना चाहिए. वैक्सीन की बर्बादी पर राज्यों के ख़ास ध्यान रखना चाहिए. हर शाम को इसका वैक्सीन केंद्रो पर इसका आकलन होना चाहिए. एक भी डोज़ के बर्बाद होने से हम किसी का हक़ मार रहे हैं जिसकी हमें इजाज़त नहीं है. राज्यों को ज़ीरो वैक्सीन वेस्ट के अजेंडा पर काम करना चाहिए.

    ‘’इन सामूहिक नीतियों और कोशिशों का हमें जल्द ही परिणाम दिखेगा. दवाई भी और कड़ाई के मंत्र पर काम करना होगा.’’

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  3. पश्चिम बंगाल चुनाव में युवाओं की क्या हैं उम्मीदें? कोलकाता में स्टूडेंट्स से बात कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता सलमान रावी

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  4. समलैंगिक शादी पर जापान की अदालत का ऐतिहासिक फ़ैसला

    जापान

    जापान की एक अदालत ने बुधवार को कहा कि समलैंगिक शादियों को अनुमति नहीं देना असंवैधानिक है.

    जी-7 में जापान एकमात्र देश है, जहाँ समलैंगिक शादी को पूरी तरह से मान्यता नहीं दी गई है. यह फ़ैसला जापान के एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने दिया है. इसे जापान में पहली बार समलैंगिक शादियों पर प्रतीकात्मक जीत के तौर पर देखा जा रहा है.

    यहाँ के संविधान में अब भी शादी की व्याख्या महिला और पुरुषों की आपसी सहमति के तौर पर की गई है. हालाँकि रूढ़िवादी समाज वाले जापान में समलैंगिक शादी की स्वीकार्यता में अभी वक़्त लगेगा.

    एलजीबीटी समूहों ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा इसका सकारात्मक असर उनके जीवन पर पड़ेगा.

    ‘मैरिज फ़ॉर ऑल जापान’ संगठन के निदेशक गोन मतसुनाका ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "मैं बहुत खुश हूँ, जब फ़ैसला आने वाला था तो हमें नहीं पता था कि क्या होने वाला है लेकिन इस फ़ैसले से बहुत उत्साहित हूँ.’’

    हालाँकि जापान में एशिया के बाक़ी देशों की तुलना में समलैंगिकों को लेकर क़ानून उदार है. लेकिन दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले जापान में एलजीबीटी समुदाय बहुत मुखर नहीं है. वहाँ सामाजिक स्वीकार्यता नहीं है.

    वर्तमान क़ानून के अनुसार समलैंगिक विवाह वर्जित है. इन्हें अपने पार्टनर की संपत्ति में उत्तराधिकार के रूप में मान्यता नहीं है. एलजीबीटी समुदाय के लोगों को कई ऐसे अधिकार नहीं मिले हैं जो विपरीतलिंगी जोड़ों को मिले हैं.

  5. Video content

    Video caption: दशकों तक बंगाल पर राज करने वाला लेफ़्ट आज कहां खड़ा है?

    पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और बीजेपी ने पूरी ताक़त झोंक दी है.

  6. सद्दाम, गद्दाफ़ी भी चुनाव कराते थे और जीतते थे: राहुल गांधी

    राहुल गांधी

    अमेरिका स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी की फ़ैकल्टी और छात्रों के साथ वर्चुअल बातचीत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बात की है.

    उनसे उन अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्ट से संबंधित सवाल पूछा गया था जिन्होंने भारत की लोकतांत्रिक स्थिति को कम करके आंका है.

    इस पर राहुल गांधी ने कहा कि संस्थान निशाने पर हैं और सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थन में सूचनाओं को नियंत्रित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है जिसमें लोग जाते हैं और वोटिंग मशीन पर बटन दबा देते हैं बल्कि चुनाव एक गढ़ी गई प्रक्रिया है.

    उन्होंने कहा, “चुनाव संस्थानों के तहत होते हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि देश का ढांचा ठीक तरह से काम करे. चुनाव न्यायपालिका को पारदर्शी करने और संसद में बहस सुनिश्चित करने के लिए होते हैं.”

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    इसके साथ ही कांग्रेस नेता ने कहा कि इराक़ के शासक सद्दाम हुसैन और लीबिया के मुअम्मर गद्दाफ़ी के शासन में भी चुनाव होते थे और वे उन्हें जीतते थे.

    उन्होंने कहा, “सद्दाम हुसैन और गद्दाफ़ी भी चुनाव कराते थे. वे उन्हें जीतते थे. ऐसा नहीं है कि वे मतदान नहीं करते थे लेकिन वहां पर मतदान को सुरक्षित रखने का कोई संगठनात्मक ढांचा नहीं था.”

    हाल ही में राहुल गांधी ने स्वीडन के वी-डेम इंस्टिट्यूट की डेमोक्रेसी रिपोर्ट के सामने आने के बाद ट्वीट किया था कि ‘भारत अब बहुत दिनों तक लोकतांत्रिक देश नहीं रहेगा.’

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    दरअसल इस रिपोर्ट में भारत की ‘लोकतांत्रिक स्वतंत्रताके गिरने’का दावा किया गया था और कहा गया था कि भारत ‘चुनावी निरंकुशता’की ओर बढ़ रहा है.

  7. कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं पर पहली बार बोले राहुल गांधी

    राहुल गांधी

    कांग्रेस के 23 असंतुष्ट नेताओं (जी-23) के समूह पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को पहली बार टिप्पणी की.

    उन्होंने कहा है कि इस तरह का समूह कांग्रेस को छोड़कर किसी और पार्टी में हो ही नहीं सकता है.

    अमेरिका स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी की फ़ैकल्टी और छात्रों के साथ वर्चुअल बातचीत में राहुल गांधी ने गांधी परिवार के पार्टी से अलग होने या न होने जैसे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी.

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    उन्होंने कांग्रेस पार्टी के सम्मिलित स्वभाव पर बात करते हुए कहा कि यही पार्टी बातचीत और समझौतों की अनुमति देती है.

    राहुल गांधी ने कहा, “उदाहरण के लिए यहाँ पर 20 लोग हैं, 20 लोगों का समूह है जिसका कांग्रेस पर अलग नज़रिया है. क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसा बीजेपी, बीएसपी, तृणमूल कांग्रेस में हो सकता है?”

    ‘जी-23’ उन नेताओं के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में भारी परिवर्तन की मांग की थी.

    गांधी परिवार को क्या नए नेतृत्व को कांग्रेस में आगे नहीं करना चाहिए? इस सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि उनके परिवार से कोई भी व्यक्ति सन 1989 के बाद से प्रधानमंत्री पद पर नहीं रहा है.

    साथ ही उन्होंने कहा कि नया पार्टी प्रमुख चुनाव के ज़रिए चुना जाएगा.

  8. नमस्कार!

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