क़त्ल के बाद बिखरा ख़ून साफ़ करने की नौकरी

डोनोवन टवेरा

सबसे ज़्यादा हत्याएं मेक्सिको में होती हैं. पर हत्या के बाद मौके पर बिखरे ख़ून को कौन साफ़ करता है?

यह काम डोनोवन टवेरा का है, वे देश के पहले फ़ोरेंसिक क्लीनर हैं. उनका काम ही इस बिखरे हुए ख़ून को साफ़ करना है.

टवेरा बताते हैं कि उन्होंने जब पहली बार लाश देखी थी उस समय वो सिर्फ़ 12 साल के थे.

वो बताते हैं कि उनके फ्लैट के पास ही एक हत्या हुई थी और वे वहां उसे देखने गए थे. चारों ओर बिखरे ख़ून और हिंसा के निशान देख वे सकते में आ गए, पर उन्हें तनिक भी डर नहीं लगा.

टवेरा कहते हैं, "मैं इसका इंतजार करता रहा कि कोई तो आकर ख़ून साफ़ करेगा. ख़ून का थोड़ा हिस्सा बह कर हमारे फ़्लैट के पास भी पंहुच गया और मेरी मां ने उसे पानी से धोया."

टवेरा आगे बताते हैं, "मेरे पिता घर लौटे तो मैंने उनसे भी पूछा कि हत्या के बाद इस ख़ून का क्या होता है? हम इसे किस तरह साफ़ करते हैं? "

उन्होंने यह सवाल दूसरे लोगों से किया तो लोगों ने उन्हें कहा कि वे इस तरह के सवाल न किया करें.

इसके बाद वे पुस्तकालय गए और मेडिसिन पर एक किताब निकाली, पर वह बेहद सामान्य जानकारियों वाली थी. उन्होंने उसके बाद फ़ोरेंसिक मेडिसिन पर एक किताब पढ़ी और इससे उन्हें मौत की प्रक्रिया के बारे में जानने में काफ़ी मदद मिली.

टवेरा जब 17 साल के हुए, उन्होंने इस पर प्रयोग करने शुरू कर दिए. वे कसाईखाने गए, वहां गाय का यकृत और उसकी हड्डियां लीं और घर आकर उससे लगे ख़ून को साफ़ करने का काम सीखने लगे.

और वे इस तरह फ़ोरेंसिक क्लीनर बन गए.

टवेरा ने कहा, "कई सालों में मैंने ख़ून साफ़ करने के अलग अलग 300 फ़ार्मूलों की खोज की. मैंने शोध के बल पर कुछ को तो बिल्कुल पक्का कर दिया है, कुछ में पहले से लेकर अब तक कोई बदलाव किसी ने नहीं किया है. "

मेक्सिको का यह पहला फ़ोरेंसिक क्लीनर बताता है कि किस तरह ख़ून साफ़ करने के अलग अलग तरीकों का इस्तेमाल करना होता है. मसलन, मोटरगाड़ी हो या गलीचा, घड़ी हो अंगूठी, उससे लगे ख़ून को साफ़ करने के तरीके भी अलग होंगे.

यह इस पर भी निर्भर करता है कि शख़्स की मौत कब और कैसे हुई. यह हो सकता है कि कोई आदमी बाथरूम या घर के किसी कोने में हफ़्ते भर से मरा पड़ा हो. यह भी हो सकता है कि किसी आदमी ने अपनी टाई का फंदा बना कर ख़ुदकुशी कर ली हो. इसी तरह शरीर से निकलने वाले द्रव का भी ख्याल रखना पड़ता है.

टवेरा कहते हैं, "मुझे यह भी पता करना होता है कि क्या हुआ, कैसे हुआ और लाश कहां पड़ी हुई है. यह देखना होता है कि क्या मृतक पहले से बीमार था और यह भी कि किसी तरह के संक्रमण का ख़तरा तो नहीं है. आपको हर मामले में अलग अलग तरीका अपनाना पड़ता है."

लेकिन उनकी भूमिका इससे भी ज़्यादा होती है. वे कहते हैं, "मैं पुलिस के जाने के बाद मौके पर पंहुचता हूं और मृतक के रिश्तेदारों के लिए एक तरह की थैरेपी का काम भी करता हूं, क्योंकि वहां मौजूद होने वाला मैं अंतिम आदमी जो होता हूं. "

टवेरा आगे जोड़ते हैं, "मैं अमूमन संगीत सुनते हुए काम करता हूं क्योंकि इससे काम पर ध्यान देने में मुझे काफ़ी मदद मिलती है. मैं हमेशा तीन तरह के संगीत ही सुनता हूं-वैगनर का ट्रिस्टन अंड आइसोल्ड, आईरन मेडन के बीस्ट का गाना नंबर 666 और पैरानॉयड का ब्लैक सैबथ. मुझे ओपरा से काफ़ी सुकून मिलता है."

टवेरा के मुताबिक़, अधिकारी मौत से जुड़े काग़ज़ात दे देते हैं उसके बाद ही वे अपना काम शुरू करते हैं. कई बार वे लोगों से काग़ज़ात मांगते हैं तो वे उसके बदले पैसे की पेशकश कर देते हैं. पर वे इससे साफ़ इंकार कर देते हैं और कह देते हैं कि काग़ज़ात के बग़ैर वे काम शुरू भी नहीं करेंग तो लोगों को उनकी बात माननी पड़ती है.

उन्हें अपने काम के साथ ही मृतक के रिश्तेदारों की भावनाओं और मानसिक स्थितियों का भी ख्याल रखना होता है.

उन्होंने कहा, "यह उनके लिए बेहद दुख की घड़ी होती है. जब तक मैं अपना काम ख़त्म न कर लूं, फ़र्श, दीवार, बाथरूम, तमाम जगहों पर ख़ून फैला होता है और बदबू भी रहती है. ऐसे में घर की साफ़ सफ़ाई होने और बदबू दूर होने से लोगों को थोड़ी सी राहत मिलती है. कई बार जब वे बहुत रोते हैं तो उनके ऊपर जमा बोझ बाहर निकल जाता है."

टवेरा पुरानी बातों को याद करते हुए कहते हैं कि उन्होंने जो अपराध देखे हैं, उनमें सबसे बड़ा वह हत्याकांड था, जिसमें चार लोग मारे गए थे. यह राजधानी मेक्सिको सिटी में हुआ था. उनकी हत्या चाक़ू मार कर की गई थी, हत्या की जगह से साफ़ था कि उन्होंने प्रतिरोध किया था और उनके साथ बहुत ही ज़्यादा हिंसा हुई थी. वहां मौजूद लोगों में बहुत अधिक गुस्सा था. इस जगह को साफ़ करने में टवेरा को पूरे दस घंटे लग गए थे.

उस जगह की साफ़ सफ़ाई हो जाने के बाद वहां लगों को कुछ राहत महसूस हुआ और लोगों ने टवेरा को धन्यवाद कहा. वहां का पूरा माहौल ही बदल गया. इससे उन्हें बहुत ही अच्छा लगा.

लेकिन टवेरा यह भी कहते हैं कि उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि यह उनकी रोज़ी रोटी का ज़रिया बनेगा. वे तो यह भी नहीं जानते थे कि यह कोई पेशा है. उन्होंने तो ख़ुद ब ख़ुद सीख सीख कर यह सब काम जाना.

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