एडिटर्स पिक: ये 10 बातें आपसे मिस तो नहीं हो गईं?

  • 15 जनवरी 2017
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बीते सप्ताह अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने गृहनगर शिकागो में अपना अंतिम संबोधन दिया तो उन मुद्दों का जिक्र भी किया जिसको लेकर उनको अफ़सोस रहा.

अंतिम भाषण में ओबामा थोड़े भावुक भी हुए और उन्होंने कहा कि भेदभाव ख़त्म करना है तो दिलों में बदलाव लाना होगा.

वहीं भारत में समाजवादी पार्टी का घमासन, चुनाव आयोग के दरवाजे पर पहुंच गया है. सोशल मीडिया में सीमा सुरक्षा बल के जवान और खादी एवं ग्रामोद्योग के कैलेंडर पर नरेंद्र मोदी की तस्वीर का मुद्दा छाया रहा.

इन ख़बरों पर तो आपकी नज़रें पड़ी ही होंगी, लेकिन बीबीसी हिंदी पर ऐसा बहुत कुछ आया, जो शायद आप मिस कर रहे होंगे.

चलिए कोई बात नहीं, आपको बीते सप्ताह की दस चुनिंदा ख़बरों के बारे में हम आपको बताते हैं, जिसे आप एक ही जगह देख सकते हैं-

1. ज़री के तारों के साथ बिखरा धूलागढ़

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पश्चिम बंगाल का धूलागढ़ पिछले महीने सांप्रदायिक हिंसा की वजह से सोशल मीडिया पर सुर्खियों में था. ऐसे में वहां के मौजूदा हालात क्या हैं, इसे जानने की कोशिश हमने ग्राउंड रिपोर्ट के ज़रिए की.

सांप्रदायिक हिंसा का नुकसान दोनों समुदायों को हुआ है और इससे उबरने में उन्हें लंबा वक्त लगेगा. इस रिपोर्ट को यहां देख सकते हैं

2. मुसलमानों में बेरोजगारी का जानलेवा चक्कर

बीबीसी उर्दू की मुस्लिम युवाओं की सोच समझ की सिरीज़ को हमने हिंदी के पाठकों के सामने भी रखा क्योंकि उनमें व्यापक तौर पर उन चुनौतियों और मुद्दों की बात थी, जिससे आम मुस्लिम युवा रोजमर्रा संघर्ष कर रहा है और उनमें बेरोजगारी आम भारतीयों की तरह सबसे बड़ा मुद्दा था. पढ़िए ये रिपोर्ट.

3. जनता की वेदना या कांग्रेस की

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नोटबंदी के मुद्दे पर भारत सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस पार्टी ने नई दिल्ली में जन वेदना सम्मेलन का आयोजन किया. इस सम्मेलन में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने फिर से नरेंद्र मोदी की जमकर आलोचना की. लेकिन ये सम्मेलन किसका था, जनता की वेदना का या कांग्रेस की वेदना का. आप जानना चाहते हैं तो फिर ये विश्लेषण पढ़िए.

4. शायरी से आवाज़ बुलंद करती कश्मीरी औरतें

बीते छह महीने से भारत प्रशासित कश्मीर में तनावपूर्ण स्थिति रही है. लेकिन इसका असर वहां की उन महिलाओं के हौसले पर बिलकुल नहीं दिखा है, जो शायरी के क्षेत्र में तेजी से अपना मुकाम बना रही हैं. ऐसी चार महिलाओं के बारे में यहां जानिए.

5. कुरान ने बचाई हिंदू की जान

इस ख़बर की शीर्षक से चौंकिए नहीं. ऐसा क्या हुआ कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका के रेस्त्रां में हुए चरमपंथी हमले में शिशिर सरकार की जान बच गई. अगर आपकी दिलचस्पी ये जानने में है कि कुरान से कैसे किसी की जान बच सकती है, तो यहां पढ़िए.

6. क्या आपका ब्लड ग्रुप भी 'बॉम्बे' है?

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दुनिया के प्रत्येक दस लाख लोगों में से चार लोगों का ब्लड ग्रुप होता है, बॉम्बे. इस ग्रुप की ख़ासियत ये है कि इस ग्रुप के लोगों को केवल इसी ग्रुप का ब्लड चढ़ाया जा सकता है लेकिन इनका ख़ून, ए, बी और ओ ग्रुप के लोगों को भी चढ़ाया जा सकता है. ऐसे ही कुछ लोगों के अनुभव जानना चाहते हैं तो यहां पढ़िए.

7. फ़ोन पर बात करने से डरते हैं आप

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हम आप ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जिसमें बिना फ़ोन के जीवन की कल्पना मुश्किल है, लेकिन हमारे आस पड़ोस में ऐसे ढेरों लोग रह रहे हैं जो फ़ोन पर बात करने से डरते हैं. आख़िर क्या है इसकी वजह और आप इसकी चपेट में तो नहीं आने वाले हैं, जानने के लिए पढ़िए.

8. ओम पुरी से और क्या चाहिए?

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ओम पुरी ऐसे अभिनेता थे, जिनकी लोकप्रियता का दायरा दूसरे मुल्कों तक फैला हुआ था. अंतरराष्ट्रीय स्तर के सिनेमा में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी थी. पाकिस्तान में भी उनके चाहने वाले बहुत थे. इस ब्लॉग को आप देखेंगे तो पता चलेगा कि ओम पुरी के जाने से सिनेमा की दुनिया कितनी खाली हो गई है.

9. महिला सैफ़ फ़ुटबॉल चैंपियन से मुलाकात

भारत की महिला फ़ुटबॉल टीम ने लगातार चौथी बार सैफ़ फ़ुटबॉल का ख़िताब जीत लिया. इस चैंपियन टीम की सदस्य डालिमा छिब्बड़ ने टीम की कामयाबी के क़िस्से फ़ेसबुक लाइव पर विस्तार से बताया. ये बातचीत आप इस लिंक पर देख सकते हैं.

10. सर्दी-ज़ुकाम-बुख़ार: क्या करें क्या ना करें

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सर्दी-ज़ुकाम-बुख़ार की दवाओं में मामूली अंतर होता है, तो कई बार लोग इसके भेद को समझ नहीं पाते हैं और इनका असर भी अलग अलग होता है. इस अंतर को जानने के लिए आप इस कहानी को पढ़िए.

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