किम जोंग-उन की कैसे मदद कर रहे हैं कुछ रूसी?

  • 18 सितंबर 2017
उत्तर कोरिया इमेज कॉपीरइट AFP

रूसियों की मिल्कियत वाली कंपनी 'वेलमुर मैनेजमेंट' और 'ट्रांसैटलांटिक पार्टनर्स' के नाम एक बार फिर से सुर्खियों में हैं.

पिछले हफ्ते ही अमरीकी न्याय विभाग ने उत्तर कोरिया के पैसों को मैनेज करने के आरोप में इन कंपनियों के ख़िलाफ़ दीवानी मुक़दमा दायर किया था.

वाशिंगटन की फेडरल कोर्ट में दायर किए गए इस केस में न्याय विभाग ने कहा है कि प्रतिबंधों के कारण अमरीका की वित्तीय व्यवस्था तक उत्तर कोरिया की कोई सीधी पहुंच नहीं है, लेकिन वह शेल (फर्जी) कंपनियों के जरिए ऐसा कर पा रहा है.

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रूसी कंपनी का नाम

सरकारी वकीलों की दलील है कि उत्तर कोरिया के पैसे के हवाला लेनदेन को 'ट्रांसैटलांटिक पार्टनर्स' और 'वेलमुर मैनेजमेंट' अंजाम देते हैं.

इस सिलसिले में उत्तर कोरिया को पेट्रोलियम उत्पाद की सप्लाई करने वाली रूस की 'इंडिपेंडेंट ऑयल एंड गैस कंपनी' (एनओसी) का नाम भी आया है.

अमरीका के न्याय विभाग के अनुसार, रूसियों ने साल 2014 में 'वेलमुर मैनेजमेंट' का सिंगापुर में रजिस्ट्रेशन कराया था. ये कंपनी खुद को रियल इस्टेट के प्रबंधन से जुड़ी बताती है लेकिन इसका मुख्य काम उत्तर कोरिया के पैसे का हवाला लेनदेन करना है.

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डॉलर में भुगतान

सरकारी वकीलों के मुताबिक वेलमुर का कोई दफ्तर नहीं है, न ही कोई वेबसाइट, इसके सारे लक्षण शेल कंपनी वाले हैं, यानी ऐसी कंपनी जो केवल कागज़ों पर ही वजूद में हो.

कोर्ट में दाखिल किए गए दस्तावेज़ों में ये कहा गया है कि इस साल फरवरी और मई के बीच वेलमुर ने एनओसी से डीज़ल खरीदने के लिए 70 लाख डॉलर का करार किया था. कंपनी ने इस सौदे के लिए डॉलर में भुगतान किया और व्लादीवोस्टोक से उत्तर कोरिया को डीज़ल की सप्लाई की गई.

न्याय विभाग ने वेलमुर से इस 70 लाख डॉलर को वसूलने की मांग कोर्ट से की है. इसके साथ ही वेलमुर और ट्रांसैटलांटिक पर हवाला लेनदेन के लिए जुर्माना लगाने की मांग भी की गई है.

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रूसी विदेश मंत्रालय

22 अगस्त को अमरीकी न्याय विभाग ने रूसी महिला इरीना खुइश पर प्रतिबंध लगाए थे. इस महिला पर उत्तर कोरिया को प्रतिबंधों से बचाने के लिए वेलमुर और ट्रांसैटलांटिक के साथ काम करने का आरोप है.

ट्रांसैटलांटिक को मई, 2016 में सिंगापुर में रजिस्टर्ड कराया गया था. कोर्ट में दाखिल दस्तावेज़ों के मुताबिक़ ट्रांसैटलांटिक की मिल्कियत का एक हिस्सा रूसी नागरिक आंद्रेयी सेरबिन के पास है. 22 अगस्त को अमरीका ने आंद्रेयी सेरबिन पर भी प्रतिबंध लगाए थे.

अमरीकी प्रतिबंध सूची में एक और रूसी नागरिक मिखाइल पिस्कलिन का भी नाम आया है. हालांकि अभी तक प्रतिबंधों को जद में आए किसी रूसी ने कोई टिप्पणी नहीं दी है लेकिन रूसी विदेश मंत्रालय उनके पक्ष में दिखने लगा है.

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अमरीकी अख़बार

उपविदेश मंत्री सरगेई रयाबकोव ने कहा है कि अमरीका एक बार फिर से उसी पुराने ढर्रे पर लौट आया है.

उन्होंने कहा कि ओबामा प्रशासन के दौरान भी द्विपक्षीय संबंधों को नुक़सान पहुंचाने का काम शुरू हुआ था. रूसियों पर प्रतिबंध वाली सूची में और नाम जोड़ने का 22 अगस्त का फैसला उत्तर कोरिया के बहाने से किया गया है. चार रूसी और एक अमरीकी कंपनी को इस लिस्ट में और जोड़ा गया है.

कुछ दिनों पहले ही अमरीकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट ने विस्तार से एक रिपोर्ट छापी थी जिसमें ये बताया गया था कि कुछ रूसी चुपके से उत्तर कोरिया को प्रतिबंध से बचाने के लिए उसकी मदद कर रहे हैं. ऐसा तेल की तस्करी और अन्य प्रतिबंधित चीज़ों की आपूर्ति के जरिए किया जा रहा है.

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चीन का असर

इस सिलसिले में अमरीकी अधिकारी ये सवाल उठा रहे हैं कि केवल प्रतिबंधों के बूते उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को अपनी परमाणु महत्वाकांक्षा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक़ रूस से उत्तर कोरिया को मदद बढ़ रही है, हालांकि परमाणु परीक्षण के बाद चीन ने आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है.

अख़बार की रिपोर्ट कहती है कि कुछ रूसी कारोबारी इन हालात का फायदा उठाने के लिए फर्जी कंपनियां बना रहे हैं और हवाला लेनदेन को अंजाम दे रहे हैं. व्लादीवोस्टोक से उत्तर कोरियाई बंदरगाह के बीच टैंकों की आमदरफ्त बढ़ गई है और इससे ट्रंप प्रशासन को अपनी योजना पर अमल करने में दिक्कत पेश आ रही है.

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