'वेश्यावृत्ति छोड़ने के लिए मदद मांगी, मिले कॉन्डोम'

  • 3 अक्तूबर 2017
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सबरीना वैलिस देह व्यारपार के पेशे से जुड़ी हुई हैं. अपने जीवन के ज्यादातर साल उन्होंने न्यूजीलैंड में देह व्यापार को अपराध के दायरे से निकालने के लिए काम किया.

लेकिन जब वाकई में ऐसा हो गया, तब उन्होंने अपना मन बदल दिया. अब उनका तर्क है कि जो आदमी वेश्याओं का इस्तेमाल करते हैं उन पर मुकदमा चलाना चाहिए.

जब सबरिना वालिसेस 12 साल की थी, तब उनके पिता ने खुदखुशी कर ली. इस एक वाक़ये ने उनकी जि़ंदगी बदल कर रख दी.

दो साल के अंदर उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली और पूरा परिवार ऑस्ट्रेलिया से न्यूज़ीलैंड के वेलिंगटन शहर शिफ्ट हो गया. यहां उनका जीवन दुख भरा ही रहा.

सबरीना से बात करने के बाद लेखिका जूली बिंदल बता रही हैं उनकी कहानी, उन्हीं की जुबानी.

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सबरीना की कहानी

मैं खुश नहीं थी. मेरे सौतेले पिता हिंसक थे, और कोई भी बात करने वाला नहीं था. मैं एक पेशेवर डांसर बनना चाहती थीं.

मैंने एक लंचटाइम बैले क्लास की शुरूआत की, जो इतना लोकप्रिय हुआ कि एक प्रसिद्ध नृत्य समूह, लिंब, वहां डांस सिखने आने लगा.

लेकिन कुछ दिनों बाद ही मैं दोबारा सड़क पर आ गई और सेक्स बेचने लगी.

स्कूल से घर जाने के रास्ते में जब मैं पार्क से गुज़र रही थी, वहां एक आदमी ने सेक्स के लिए 100 डॉलर की पेशकश की.

मैं अपने स्कूल ड्रेस में थी. इसलिए इस बात की संभावना नहीं थी कि उस आदमी को मेरी उम्र का अंदाज़ा न रहा हो.

मैंने उस पैसे का इस्तेमाल ऑकलैंड जाने के लिए किया, जहां मैं वायएमसीए में रहीं.

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पुलिस की तलाशी

मैं होस्टल के बाहर लगे फोन बूथ से किसी को फोन कर मदद मांगना चाहती थीं, लेकिन उनका फोन व्यस्थ था, इसलिए मुझे इंतजार करना पड़ा. पास से गुज़र रहा पुलिस वाला मेरे पास आकर रुक गया और पूछा कि मैं क्या कर रही हूं. मैंने कहा, फोन इस्तेमाल करना है, इसलिए इंतजार कर रही हूं.

पुलिस वाले ने कहा कि कोई भी फोन का इस्तेमाल नहीं कर रहा, इसलिए इंतजार करने की जरूरत नहीं.

पुलिस वाले को लगा कि वो ज़्यादा चालाक हैं. फिर मैंने उन्हें बताया कि जिनसे मुझे बात करनी है, उनका फोन व्यस्त है. फिर उन्होंने कॉन्डोम के लिए मेरी तलाशी ली, ये सोच कर कि मैं एक वेश्या हूं. दरअसल वायएमसीए का होस्टल खारैंगैप रोड के पास था, जो वेश्यावृत्ति के लिए जाना जाता था.

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महिला की सलाह

विडम्बना ये है कि उसी वक्त मुझे ख्याल आया कि पुलिस वाले से कुछ पैसा मिल सकता है. हालांकि पुलिस वाले से मुझे डर लग रहा था क्योंकि मुझे दीवार के सहारे झुका कर तलाशी ली जा रही थी और धमकाया जा रहा था. लेकिन मुझे पता था कि अगर मेरे पास नकद पैसे नहीं रहे तो मैं सड़को पर रहने वाली हूं. इसलिए मुझे इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि मैं क्या हूं और क्या नहीं.

मैं खारैंगैप रोड की तरफ चलने लगी और वहीं कि एक महिला से सलाह मांगी.

महिला ने कहा कि दो जगह है जहां मैं काम कर सकती हूं. उस महिला ने मुझे कॉन्डोम दिया और वेश्यावृत्ति के रेट भी बताए. महिला ने मुझे सलाह दी कि मैं लोगों को उन सेवाओं के लिए लड़ाऊं जो मैं खुद देने के लिए तैयार थी.

मदद में कॉन्डोम

उन सेवाओं के लिए न लड़ाऊं जो देने के लिए मैं खुद तैयार न हूं. वो महिला बहुत अच्छी थी. वहां रहने के हिसाब से काफी जवान थी, लेकिन बहुत सालों से वहां रह रही थी.

वहां दो साल काम करने के बाद 1989 में मैं क्राइस्टचर्च में न्यूज़ीलैंड प्रोस्ट्टीयूट कलेक्टिव में चली गईं.

मैं मदद की तलाश में थी ताकि वेश्यावृत्ति छोड़ सकूं, लेकिन मदद में मुझे सिर्फ कॉन्डोम मिले.

मुझे अकसर शुक्रवार रात को होने वाले सामूहिक वाइन और चीज़ पार्टी के लिए नियमित आमंत्रण भी मिला करता था.

अक़सर उन पार्टियों में देह व्यापार से जुड़े कलंक के बारे में बातें होती थीं और ये भी कहा जाता था कि वेश्यावृत्ति किसी भी पेशे की तरह ही एक पेशा है.

कुल मिला कर पार्टी में ये बताने की कोशिश होती थी कि वो जो कर रही है, वो स्वीकार्य है.

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देह व्यापार

इस तरह से मैं एक मसाज़ पार्लर में संयोजक बन गई और देह व्यापार को अपराध की श्रेणी से अलग करने के लिए चलाए जा रहे अभियान की समर्थक भी, जिसमें दलाली भी शामिल थी.

मुझे लग रहा था कि क्रांति आ रही है. मैं इस बात के बारे में बहुत उत्साहित थी कि देह व्यापार को अपराध की श्रेणी से अलग करने से महिलाओं के लिए चीजें ज्यादा बेहतर हो जाएंगी.

2003 में देह व्यापार को अपराध की श्रेणी से अलग भी कर दिया गया. न्यूज़ीलैंड प्रोस्ट्टियूट कलेक्टिव में इसके बाद आयोजित हुई पार्टी में मैंने भाग भी लिया.

लेकिन जल्द ही उससे भी मोहभंग हो गया.

वेश्यावृत्ति सुधार अधिनियम ने वेश्यालय को वैध व्यवसाय के रूप में संचालित करने की अनुमति दी. ये एक ऐसा मॉडल था जिसे देह व्यापार से जुड़ी हर महिला सबसे सुरक्षित मॉडल मानती है.

महिला के साथ

यूके में गृह मामलों की सेलेक्ट समिति देह व्यापार को अलग अलग तरीकों से संचालित करने के लिए विचार कर रही थी, जिसमें इसे अपराध की श्रेणी से अलग करना भी शामिल था. लेकिन न्यूज़ीलैंड में ये एक मुसीबत बन गई थी, जिसका फ़ायदा केवल दलाल और ग्राहक ही उठा रहे थे.

मैंने सोचा था कि यह महिलाओं को ज्यादा शक्ति और अधिकार देगी, लेकिन हुआ इसके उलट.

इस नियम के साथ एक समस्या ये थी कि सभी वेश्यालय के मालिकों को ये अधिकार था कि ग्राहकों के साथ "सभी समावेशी" सौदा कर सकते थे. उस सौदे के तहत ग्राहक निर्धारित राशि का भुगतान कर महिला के साथ कुछ भी कर सकता था.

एक वादा जो हमसे किया गया था, वो था कि इस तरह का कोई "सभी समावेशी" सौदा करने की किसी को इजाज़त नहीं होगी.

क्योंकि इस सौदे का मतलब साफ था, महिलाएं कौन सी सेक्स संबंधी सेवाएं देना चाहती हैं और कौन सी नहीं इसकी कीमत वो खुद नहीं तय कर सकतीं थीं. यही मुख्य आधार था और लाभ भी, देह व्यापार को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के लिए.

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काम मांगने गई...

चालीस साल की उम्र में मैं वेंलिंगटन के एक वेश्यालय में काम मांगने गई और वहां जो कुछ देखा, उससे हैरान रह गई.

पहली ही शिफ्ट के दौरान, मैंने देखा कि एक लड़की घबराते हुए, रोते हुए आई. वो कुछ भी बोलने में असमर्थ थी. वो कहीं पहरा दे रही थी. रिसेप्शननिस्ट उस पर चिल्ला रही थी, उसे काम पर वापस जाने के लिए कह रही थी.

मैंने अपना सामान उठाया और वहां से चली गई. कुछ समय बाद मैंने वेलिंगटन के प्रोस्ट्टीयूट कलेक्टिव को बताया जो उसने वहां देखा. साथ ही पूछा आखिर इसमें क्या किया जा सकता है. महिलाओं को इससे बाहर निकालने के लिए क्या किया जा सकता है?

मेरी पूरी तरह से अनदेखी की गई. फिर मैंने प्रोस्ट्टीयूट कलेक्टिव छोड़ दिया. इससे पहले तक यही संगठन मेरे समर्थन का एकमात्र स्रोत था.

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मेरी ही कहानी...

इसके बाद मेरे पास कहीं जाने की जगह नहीं थी जहां मुझे देह व्यापार में काम करने के लिए न परखा जाता.

हालांकि मैं खुद उस संगठन में गई थीं लेकिन "उन्मूलनवादी" बनने की दिशा में अपनी यात्रा की शुरूआत वहीं से की थी.

न्यूज़ीलैंड प्रोस्ट्टीयूट कलेक्टिव में मेरी नौकरी मीडिया क्लिप को ढूंढना था. मैंने एक बात पढ़ी, कोई था जो बात कर रहा था आसूंओं के बारे में लेकिन क्यूं इसके बारे में उसे खुद नहीं पता था और तब तक नहीं पता चला जब था खुद देह व्यवसाय के बाहर नहीं आ गया.

मैं बहुत सालों तक उस मीडिया क्लिप के बारे में सोचती रही, मैं नहीं जानती थी क्या हो रहा है, मुझे ऐसा क्यों महसूस हो रहा है? फिर एक दिन बाद अहसास हुआ कि, हे भगवान, ये तो मेरी ही कहानी है.

इसके बाद मैंने वापस मुड़ कर पीछे नहीं देखा.

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महिलावादी आंदोलन

वह 2011 के शुरूआती दौर में मैं वेश्यावृत्ति छोड़कर ऑस्ट्रेलिया गोल्ड कोस्ट, क्वींसलैंड चली गईं. वो जीवन में एक नई दिशा की तलाश में थीं, लेकिन मैं उलझन में थी और उदास थी.

जब मेरे पड़ोसी ने मुझे वेबकैम वेश्यावृत्ति में भर्ती करने की कोशिश की, तो मैंने विनम्रता से मना कर दिया. मुझे लगा जैसे कि मेरे माथे पर वेश्या लिखा हो उसे कैसे इस बात का पता चला. अब मैं जानती हूं कि महिला होना ही एकमात्र कारण है. बाद में पड़ोसी जब मुझे देखता, मुझे अपमानित करता था.

मैं महिलाओं के लिए और अपराधीकरण के ख़िलाफ़ काम करने लगी. ब्रिटेन के आंतरिक मामलों की कमिटी ने वेश्यावृत्ति में दलालों को अपराधियों की श्रेणी में रखा और वेश्यावृत्ति में फंसे व्यक्ति को अपराध मुक्त किया.

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विरोध होता रहा...

मैंने ऑस्ट्रेलियाई उग्र महिलावादियों का एक समूह स्थापित किया और जल्द ही उन्हें एक कॉन्फ्रेंस में बुलाया गया. ये कार्यक्रम मेलबर्न यूनिवर्सिटी में हुआ. ऑस्ट्रेलिया में हुआ पहला दासता विरोधी कार्यक्रम था, जहां कई राज्यों ने एक साथ देह व्यापार को कानूनी मान्यता दी.

मेलबर्न में 1980 के दशक के मध्य से ही देह व्यापार को कानूनी मिली है और जबकि उसके ख़िलाफ़ लगातार विरोध होता रहा है.

जब मैं सेक्स ट्रेड के ख़िलाफ़ महिलावादी एक्टिविस्ट बनीं तो मुझे कुछ बेहतर महसूस हुआ और लगा कि मैं पिछले वक़्त से मुक़्त होकर अपनी नई ज़िंदगी शुरू कर रही हूं.

पहले मैं भावनात्मक रूप से मुक्त हुई, फिर शारीरिक और आखिर में बौद्धिक रूप से.

कॉन्फ्रेंस के बाद मैं डॉक्टर के पास गईं और पता चला कि मैं पीटीएसडी (पोस्ट ट्रामाटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर) से पीड़ित हूं.

उत्पीड़न के खिलाफ़

वेश्यावृत्ति के दौरान जो वक़्त बीता ये उसका नतीजा था. इसका असर मुझ पर बुरी तरह पड़ा लेकिन मैं इसके प्रभाव को छुपाती रही. फिर से सब कुछ महसूस करने में बड़ा वक़्त लगता है.

मेरे लिए सबसे अच्छा उपाय उन महिलाओं के साथ काम करना है जो समझती हैं कि सेक्स ट्रेड में काम करना कैसा होता है और वे लोग जो वेश्यावृत्ति से होने वाले नुकसान को उजागर करने के लिए कैंपेन चलाते हैं.

मैं उन महिलाओं की आवाज़ उठाने के लिए भी तैयार रहती हूं जो उत्पीड़न करने वाले के ख़िलाफ़ खामोश रहती हैं.

मेरा काम ये नहीं है कि मैं लोगों को इंड्रस्ट्री में फंसा दूं या फिर कहूं कि यहां से बाहर भागो. लेकिन मैं एक अंतर स्थापित करना चाहती हूं और उसका मतलब है कि दूसरी महिलाओं की मदद के लिए जितना अधिक से अधिक हो सके बोलना चाहिए.

(जूली बिंदल 'द पिंपिंग ऑफ प्रॉस्टीट्यूशन: अबॉलिशिंग द सेक्स वर्क मिथ' की लेखिका हैं.)

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